एथेनॉल की कीमत ₹71 प्रति लीटर, फिर भी पेट्रोल में क्यों मिलाया जा रहा है? सरकार ने बताई बड़ी वजह
पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने को लेकर अक्सर कीमत पर सवाल उठते हैं। जब एथेनॉल करीब ₹71 प्रति लीटर में खरीदा जा रहा है, तो सरकार इसे क्यों बढ़ावा दे रही है? इसके पीछे सिर्फ Fuel की कीमत नहीं, बल्कि कई बड़े कारण हैं, जिन्हें जानना जरूरी है। पूरी कहानी पढ़ें।

In Short
- एथेनॉल की खरीद कीमत करीब ₹71 प्रति लीटर होने के बावजूद सरकार इसे Petrol में मिला रही है, क्योंकि मकसद सिर्फ सस्ता Fuel नहीं बल्कि Crude Oil Import कम करना और Energy Security बढ़ाना है।
- West Asia Crisis के दौरान सरकार के मुताबिक Ethanol Blending ने Petrol Prices पर दबाव कम करने में मदद की, जब Global Crude Oil Prices में 70-80% तक बढ़ोतरी हुई।
- सरकार का दावा है कि 23 करोड़ से ज्यादा Vehicles Higher Ethanol Blends पर चल रहे हैं और E20 Fuel को लेकर बड़े स्तर पर Engine Failure का कोई Verified Evidence नहीं मिला है।
भारत में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने को लेकर अक्सर सवाल उठते हैं कि जब एथेनॉल की कीमत करीब ₹71 प्रति लीटर है, तो सरकार इसे पेट्रोल में क्यों मिला रही है? सरकार का कहना है कि इसका मकसद सिर्फ सस्ता ईंधन खरीदना नहीं, बल्कि देश की एनर्जी सिक्योरिटी, कच्चे तेल के आयात में कमी और किसानों को फायदा पहुंचाना है। इसी वजह से एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) प्रोग्राम को आगे बढ़ाया जा रहा है।
इस योजना के तहत ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) एथेनॉल खरीद रही हैं और इसे पेट्रोल में मिलाया जा रहा है। लेकिन इसकी कीमत और फायदे को समझने के लिए पूरी तस्वीर जानना जरूरी है।
एथेनॉल की कीमत कितनी है?
मौजूदा एथेनॉल सप्लाई ईयर (नवंबर 2025 से अक्टूबर 2026) के लिए सरकार ने बताया है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) करीब ₹71 प्रति लीटर की कीमत पर एथेनॉल खरीद रही हैं। इसमें जीएसटी और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट भी शामिल है।
अलग-अलग कंपनियों की खरीद कीमत इस तरह है:
- आईओसी (IOC): ₹71.18 प्रति लीटर
- एचपीसीएल (HPCL): ₹71.10 प्रति लीटर
- बीपीसीएल (BPCL): ₹71.21 प्रति लीटर
वहीं अलग-अलग स्रोतों जैसे गन्ने के रस, बी-हेवी मोलासेस, सी-हेवी मोलासेस, खराब अनाज, एफसीआई चावल और मक्का से मिलने वाले एथेनॉल की औसत एक्स-मिल प्राइस ₹66.61 प्रति लीटर है। इसमें जीएसटी और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट शामिल नहीं है।
लेकिन सवाल यह है कि अगर एथेनॉल सस्ता विकल्प नहीं है, तो सरकार इसे पेट्रोल में मिलाने पर इतना जोर क्यों दे रही है?
एथेनॉल ब्लेंडिंग का मकसद सिर्फ कम कीमत नहीं
सरकार का कहना है कि एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल प्रोग्राम का उद्देश्य ऑयल कंपनियों का प्रॉफिट बढ़ाना नहीं है। पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस मिनिस्टर ऑफ स्टेट सुरेश गोपी ने लोकसभा में बताया कि यह योजना एथेनॉल की उपलब्धता बढ़ाने, प्रोड्यूसर्स को सही कीमत देने और एग्रीकल्चर सेक्टर को सपोर्ट करने के लिए बनाई गई है।
सरकार के अनुसार एथेनॉल मिलाने से कई फायदे हैं:
- कच्चे तेल के इंपोर्ट पर निर्भरता कम होती है
- ग्लोबल ऑयल प्राइस बढ़ने का असर कम होता है
- देश की एनर्जी सिक्योरिटी मजबूत होती है
- किसानों के लिए गन्ने, मक्का और अन्य फसलों की मांग बढ़ती है
- व्हीकल एमिशन कम करने में मदद मिलती है
यानी सरकार इसे सिर्फ फ्यूल नहीं, बल्कि लंबे समय की एनर्जी स्ट्रेटजी के तौर पर देख रही है।
West Asia Crisis में कैसे मिला फायदा?
सरकार ने बताया कि हाल की वेस्ट एशिया क्राइसिस के दौरान एथेनॉल ब्लेंडिंग के फायदे दिखाई दिए। इस दौरान ग्लोबल क्रूड ऑयल प्राइस में करीब 70-80% तक बढ़ोतरी हुई, लेकिन भारत में पेट्रोल प्राइस करीब 7-8% ही बढ़े।
सरकार के मुताबिक जब इंडियन क्रूड बास्केट की कीमत लगभग $135 प्रति बैरल तक पहुंची, तब पेट्रोल की कीमत करीब ₹125 प्रति लीटर तक जा सकती थी। लेकिन दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹94.77 प्रति लीटर रही।
सरकार का कहना है कि इसमें एथेनॉल की घरेलू उपलब्धता और अन्य सरकारी कदमों की भूमिका रही। इस दौरान पब्लिक सेक्टर OMCs को पेट्रोल पर करीब ₹11 प्रति लीटर की एवरेज अंडर-रिकवरी हुई, जिससे लगभग ₹21,300 करोड़ का असर पड़ा।
E20 Fuel को लेकर सरकार का क्या कहना है?
E20 फ्यूल यानी पेट्रोल में 20% तक एथेनॉल मिलाने को लेकर कुछ लोगों ने व्हीकल सेफ्टी पर सवाल उठाए हैं। सरकार ने कहा कि इसे लागू करने से पहले एआरएआई (ARAI), सियाम (SIAM), ऑयल कंपनियों और ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स ने टेस्टिंग की है।
सरकार के अनुसार देश में 23 करोड़ से ज्यादा व्हीकल्स, जिनमें 20 करोड़ से अधिक टू-व्हीलर्स और करीब 3 करोड़ पेट्रोल कार्स शामिल हैं, हायर एथेनॉल ब्लेंड्स पर चल रहे हैं। अभी तक एथेनॉल ब्लेंडिंग की वजह से बड़े स्तर पर इंजन फेलियर का कोई वेरिफाइड एविडेंस नहीं मिला है।
कंपनियां E20 फ्यूल इस्तेमाल करने वाले व्हीकल्स की वारंटी भी जारी रख रही हैं।
आखिर एथेनॉल पर सरकार इतना जोर क्यों दे रही है?
सरकार का कहना है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग को सिर्फ इस आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए कि यह पेट्रोल से सस्ता है या महंगा। इसका मकसद देश का क्रूड ऑयल इंपोर्ट कम करना, ऑयल प्राइस शॉक से लोगों को बचाना, किसानों को नया मार्केट देना और पॉल्यूशन कम करना है।

