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ट्रंप का टैरिफ दांव अमेरिका पर ही पड़ रहा भारी! कार कंपनियों की बढ़ी मुश्किल, आम लोगों की जेब पर भी असर?

डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति अब अमेरिकी ऑटो कंपनियों के लिए ही महंगी साबित हो सकती है। मेक्सिको से आने वाली कारों और उनके पार्ट्स पर भारी टैरिफ से उत्पादन लागत बढ़ने का खतरा है। एक अध्ययन में कंपनियों पर अरबों डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ने का अनुमान जताया गया है। आखिर इसका असर कारों की कीमतों और अमेरिकी ग्राहकों पर कैसे पड़ेगा?

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ट्रंप के टैरिफ से अमेरिकी ऑटो इंडस्ट्री पर बढ़ा दबाव, कारों की कीमतें बढ़ने की आशंका। (AI जनरेटेड तस्वीर)
ट्रंप के टैरिफ से अमेरिकी ऑटो इंडस्ट्री पर बढ़ा दबाव, कारों की कीमतें बढ़ने की आशंका। (AI जनरेटेड तस्वीर)

In Short

  • ट्रंप के टैरिफ से अमेरिकी ऑटो कंपनियों की लागत बढ़ने का खतरा।
  • 25% टैरिफ से 107.8 अरब डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ने का अनुमान।
  • जनरल मोटर्स को 2025 में 3.1 अरब डॉलर का टैरिफ खर्च उठाना पड़ा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति अब अमेरिका की अपनी ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए भी चुनौती बन रही है। मेक्सिको से आने वाली कारों, स्टील और एल्युमीनियम पर लगाए गए भारी टैरिफ के कारण अमेरिकी कार कंपनियों की लागत बढ़ रही है। इससे कंपनियों के मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है और ग्राहकों को भी नई कार खरीदने के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं।

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अमेरिका और मेक्सिको के बीच क्यों अटकी ट्रेड डील?

अमेरिका और मेक्सिको के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत में रुकावट आ गई है। दोनों देश United States Mexico Canada Agreement (USMCA) की समीक्षा से पहले टैरिफ विवाद सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।

15 अक्टूबर की वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लटनिक मेक्सिको से आने वाली कारों और धातुओं पर टैरिफ में बड़ी कटौती के पक्ष में नहीं हैं। इसी वजह से बातचीत की रफ्तार धीमी पड़ गई है।

USMCA के तहत अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा की कंपनियों को व्यापार में कई सुविधाएं मिलती हैं। करीब 280 अरब डॉलर की उत्तरी अमेरिकी ऑटो इंडस्ट्री को इस समझौते से फायदा होता है।

अमेरिकी कार कंपनियों को कैसे हो रहा नुकसान?

अमेरिका की कई बड़ी ऑटो कंपनियां मेक्सिको में कारें और उनके पार्ट्स बनाती हैं। ऐसे में मेक्सिको से आने वाले सामान पर टैरिफ लगने से अमेरिकी कंपनियों को भी अतिरिक्त लागत उठानी पड़ती है।

उदाहरण के लिए, अगर अमेरिका में बनी किसी कार की कीमत 40,000 डॉलर है और उसमें मेक्सिको से आए 8,000 डॉलर के पार्ट्स लगे हैं, तो उन पार्ट्स पर टैरिफ लगने से कार बनाने की लागत बढ़ जाएगी।

कंपनियों के सामने दो रास्ते हैं। या तो वे अतिरिक्त खर्च खुद उठाकर कम मुनाफा कमाएं या फिर कारों की कीमत बढ़ाकर ग्राहकों पर बोझ डालें।

ऑटो कंपनियों पर अरबों डॉलर का बोझ

टैरिफ का आर्थिक असर भी सामने आ रहा है। जनरल मोटर्स (GM) के मुताबिक, कंपनी को 2025 में करीब 3.1 अरब डॉलर का टैरिफ खर्च उठाना पड़ा।

सेंटर फॉर ऑटोमोटिव रिसर्च के अनुमान के अनुसार, कारों और पार्ट्स पर 25% टैरिफ से अमेरिकी ऑटो कंपनियों की लागत में 107.8 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हो सकती है।

अमेरिका हर साल मेक्सिको को करीब 35.8 अरब डॉलर के ऑटो पार्ट्स निर्यात करता है। ऐसे में मेक्सिको में कार उत्पादन घटने से अमेरिकी पार्ट्स बनाने वाली कंपनियों को भी नुकसान हो सकता है।

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क्या अमेरिका में कारें और महंगी होंगी?

टैरिफ के कारण जनरल मोटर्स, फोर्ड, स्टेलेंटिस और टेस्ला जैसी कंपनियों के लिए उत्पादन की लागत बढ़ने का जोखिम है। कंपनियां उत्पादन अमेरिका में स्थानांतरित कर सकती हैं, लेकिन नई फैक्ट्रियां लगाने और सप्लाई चेन बदलने में कई साल लग सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर टैरिफ लंबे समय तक जारी रहे, तो कारों की कीमतें बढ़ सकती हैं और बिक्री प्रभावित हो सकती है। यानी विदेशी कंपनियों पर दबाव बनाने के लिए लगाए गए टैरिफ का असर अमेरिकी कंपनियों और ग्राहकों पर भी पड़ सकता है।