एक ही कार या बाइक के मॉडल का क्यों अलग-अलग होता है इंश्योरेंस प्रीमियम? ज्यादातर लोग नहीं जानते जवाब
बिजनेस टुडे के पर्सनल फाइनेंस शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए इंश्योरेंस एक्सपर्ट, दीपक जोहान ने कहा कि इंश्योरेंस कंपनियां ग्राहक की जोखिम प्रोफाइल, क्लेम हिस्ट्री और शहर जैसे कई दूसरे फैक्टर्स को भी प्रीमियम तय करते समय ध्यान में रखते हैं।

In Short
- क्लेम हिस्ट्री से प्रीमियम पर बड़ा असर पड़ता है।
- शहर और स्थानीय ट्रैफिक के हिसाब से प्रीमियम बदल सकता है।
- ग्राहक की जोखिम प्रोफाइल भी इंश्योरेंस कीमत तय करती है।
एक ही कार मॉडल खरीदने वाले दो लोगों को मोटर इंश्योरेंस के लिए अलग-अलग प्रीमियम देना पड़ सकता है। इसकी वजह सिर्फ कार का मॉडल या स्पेसिफिकेशन नहीं है।
बिजनेस टुडे के पर्सनल फाइनेंस शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए इंश्योरेंस एक्सपर्ट, दीपक जोहान ने कहा कि इंश्योरेंस कंपनियां ग्राहक की जोखिम प्रोफाइल, क्लेम हिस्ट्री और शहर जैसे कई दूसरे फैक्टर्स को भी प्रीमियम तय करते समय ध्यान में रखते हैं।
क्लेम हिस्ट्री का बड़ा असर
एक्सपर्ट दीपक जोहान ने कहा कि बाजार में सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि वाहन की स्पेसिफिकेशन ही प्रीमियम तय करती है। उनके मुताबिक, खासकर ओन-डैमेज कवर के मामले में ग्राहक से जुड़े जोखिम कारक भी अहम होते हैं।
जोहान ने बताया कि पॉलिसीधारक की क्लेम हिस्ट्री का ओन-डैमेज प्रीमियम पर “काफी बड़ा असर” पड़ता है। इसकी वजह नो-क्लेम बोनस है। उन्होंने कहा कि अगर ग्राहक क्लेम नहीं करता है तो उसे नो-क्लेम बोनस मिलता है, जो “ओन डैमेज प्रीमियम का 50 फीसदी तक” हो सकता है। यानी लगातार क्लेम-फ्री रिकॉर्ड रखने वाले ग्राहकों का रिन्यूअल प्रीमियम काफी कम हो सकता है।
दिल्ली और मुंबई में प्रीमियम अलग-अलग
कार कहां चलाई और रजिस्टर की जाती है, यह भी प्रीमियम में अंतर पैदा कर सकता है। जोहान के मुताबिक, दिल्ली में चलने वाली कार का प्रीमियम उसी मॉडल की मुंबई, चेन्नई या बेंगलुरु में चलने वाली कार से अलग हो सकता है।
उन्होंने कहा कि “इंश्योरेंस कंपनियां ड्राइविंग पैटर्न और ऐतिहासिक डेटा के आधार पर अंडरराइट करती हैं।” कंपनियां यह भी देखती हैं कि किन वाहनों में दुर्घटना और नुकसान का जोखिम ज्यादा है। इस वजह से स्थानीय ट्रैफिक, दुर्घटनाओं और क्लेम के आंकड़े प्रीमियम की गणना में भूमिका निभाते हैं।
कार का मॉडल सिर्फ शुरुआत है
मेक, मॉडल और फ्यूल टाइप जैसे वाहन से जुड़े आंकड़े भी प्रीमियम तय करने में अहम हैं। लेकिन ये अंडरराइटिंग की शुरुआत भर हैं। ग्राहक की जोखिम प्रोफाइल और स्थानीय परिस्थितियां अंतिम प्रीमियम को प्रभावित कर सकती हैं।
पॉलिसी रिन्यू कराते समय सिर्फ सबसे कम प्रीमियम देखना भी सही रणनीति नहीं हो सकती। ग्राहकों को बीमाकर्ता की विश्वसनीयता, गैराज नेटवर्क और जीरो डेप्रिसिएशन व रोडसाइड असिस्टेंस जैसे ऐड-ऑन पर भी ध्यान देना चाहिए।
पॉलिसीधारकों के लिए क्या समझना जरूरी है?
अलग-अलग प्रीमियम हमेशा मनमाने नहीं होते। सुरक्षित ड्राइविंग, सोच-समझकर क्लेम करना और अपनी जरूरत के हिसाब से पॉलिसी की तुलना करना लंबे समय में लागत कम रखने में मदद कर सकता है।

