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Maruti Suzuki बढ़ाएगी रेलवे का इस्तेमाल, 35% गाड़ियां रेल से भेजने की तैयारी

Maruti Suzuki अब अपनी गाड़ियों को एक जगह से दूसरी जगह भेजने के लिए रेलवे का इस्तेमाल और बढ़ाएगी। कंपनी का लक्ष्य FY31 तक 35% गाड़ियों को रेल के जरिए भेजने का है। इसके लिए खरखौदा प्लांट में नई रेलवे साइडिंग बनाने की भी तैयारी है। जानिए कंपनी का पूरा प्लान।

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In Short

  • Maruti Suzuki का FY31 तक 35% गाड़ियों को रेल के जरिए भेजने का लक्ष्य है।
  • गुजरात और मानेसर की इन-प्लांट रेलवे साइडिंग से अब तक 10 लाख गाड़ियां भेजी जा चुकी हैं।
  • कंपनी खरखौदा मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में भी नई इन-प्लांट रेलवे साइडिंग तैयार करेगी।

देश की बड़ी कार कंपनी Maruti Suzuki India Ltd अपनी गाड़ियों को एक जगह से दूसरी जगह भेजने के लिए रेलवे का इस्तेमाल और बढ़ाने की तैयारी कर रही है। कंपनी का लक्ष्य FY 2030-31 तक अपनी कुल गाड़ियों की डिस्पैच में रेल की हिस्सेदारी बढ़ाकर 35% करने का है। FY 2025-26 में यह हिस्सेदारी 26.5% है। इसके लिए कंपनी हरियाणा के खरखौदा मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में नई इन-प्लांट रेलवे साइडिंग भी तैयार करेगी।

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10 लाख गाड़ियों का आंकड़ा पार

मारुति सुजुकी ने अपने इन-प्लांट रेलवे साइडिंग के जरिए 10 लाख गाड़ियों की डिस्पैच का आंकड़ा भी पार कर लिया है। इनमें गुजरात के हंसलपुर रेलवे साइडिंग से करीब 7.9 लाख गाड़ियां भेजी गई हैं। वहीं हरियाणा के मानेसर रेलवे साइडिंग से करीब 2.1 लाख गाड़ियों की डिस्पैच हुई है।

कंपनी ने यह उपलब्धि सिर्फ तीन साल और पांच महीने में हासिल की है। गुजरात रेलवे साइडिंग में मार्च 2023 और मानेसर रेलवे साइडिंग में जून 2025 में ऑपरेशन शुरू हुआ था।

क्या होती है इन-प्लांट रेलवे साइडिंग?

इन-प्लांट रेलवे साइडिंग एक ऐसा रेल टर्मिनल होता है, जो मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के अंदर ही बनाया जाता है। इससे तैयार गाड़ियों को प्लांट के अंदर से ही सीधे ट्रेन में लोड किया जा सकता है। इसके कारण गाड़ियों को ट्रक के जरिए नजदीकी रेलवे स्टेशन तक पहुंचाने की जरूरत नहीं पड़ती।

मारुति सुजुकी भारत की पहली और एकमात्र पैसेंजर व्हीकल कंपनी है, जिसके हंसलपुर और मानेसर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में इन-प्लांट रेलवे साइडिंग मौजूद हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर

सड़क पर कम होगा गाड़ियों का दबाव

इन रेलवे साइडिंग को PM GatiShakti National Master Plan के तहत तैयार किया गया है। कंपनी के मुताबिक, सड़क की जगह रेल से गाड़ियों को भेजने से फ्यूल की खपत कम करने, उत्सर्जन घटाने और सड़कों पर भीड़ कम करने में मदद मिली है।

Maruti Suzuki के MD और CEO Hisashi Takeuchi ने बताया कि मौजूदा वित्त वर्ष में गुजरात और मानेसर की इन-प्लांट रेलवे साइडिंग कंपनी के कुल रेल आधारित डिस्पैच में 70% योगदान दे रही हैं।

5% से बढ़कर 26.5% हुई हिस्सेदारी

कंपनी के मुताबिक, FY15 में रेल के जरिए गाड़ियों की डिस्पैच की हिस्सेदारी सिर्फ 5% थी, जो FY26 में बढ़कर 26.5% हो गई है। अब कंपनी FY31 तक इसे बढ़ाकर 35% करना चाहती है। इसके लिए खरखौदा प्लांट में भी इन-प्लांट रेलवे साइडिंग बनाई जाएगी।

मारुति सुजुकी FY15 से अब तक रेल के जरिए 33 लाख से ज्यादा गाड़ियां भेज चुकी है। इनमें 10 लाख गाड़ियां गुजरात और मानेसर की इन-प्लांट रेलवे साइडिंग से भेजी गई हैं। मौजूदा वित्त वर्ष में 31 अगस्त तक रेल के जरिए गाड़ियों की डिस्पैच 3 लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है।

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