scorecardresearch

भारत में कार बनाने आएंगी दुनिया की बड़ी कंपनियां? पीयूष गोयल ने बताया यूरोप छोड़ने की क्या है वजह

भारत जल्द ही दुनिया की बड़ी कार कंपनियों के लिए मैन्युफैक्चरिंग का प्रमुख केंद्र बन सकता है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने दावा किया है कि यूरोप में बढ़ती नियामकीय चुनौतियों और भारत में कारों की बढ़ती मांग के कारण विदेशी कंपनियां यहां उत्पादन बढ़ा सकती हैं। भारत-EU ट्रेड डील भी इसमें अहम भूमिका निभा सकती है। जानिए इससे भारतीय ऑटो सेक्टर को क्या फायदा होगा।

Advertisement
पीयूष गोयल का दावा, भारत बनेगा दुनिया का प्रमुख ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग हब।
पीयूष गोयल का दावा, भारत बनेगा दुनिया का प्रमुख ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग हब।

In Short

  • पीयूष गोयल ने भारत के ग्लोबल कार मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की संभावना जताई।
  • यूरोप में सख्त नियम और भारत में बढ़ती मांग विदेशी कंपनियों को आकर्षित कर सकती है।
  • भारत-EU ट्रेड डील से देश में कार उत्पादन और यूरोप को निर्यात के नए अवसर मिलने की उम्मीद।

भारत आने वाले वर्षों में दुनिया के प्रमुख ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग हब में शामिल हो सकता है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि दुनियाभर की बड़ी कार कंपनियां भारत में अपनी गाड़ियां बनाने के लिए आगे आएंगी। उनका मानना है कि भारत में कारों की बढ़ती मांग और यूरोप में सख्त नियमों के कारण विदेशी कंपनियों के लिए भारत में मैन्युफैक्चरिंग करना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।

advertisement

सोमवार को आयोजित 'द दिल्ली डायलॉग' कार्यक्रम में पीयूष गोयल ने कहा कि आखिरकार भारत कार मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बनने जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में दुनिया की बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियां भारत में आकर गाड़ियां बनाएंगी। गोयल के मुताबिक, यूरोप में लगातार बढ़ते नियमों और पाबंदियों के कारण वहां कार बनाना महंगा और प्रतिस्पर्धा के लिहाज से मुश्किल होता जा रहा है।

विदेशी कार कंपनियां भारत में क्यों लगाएंगी फैक्ट्रियां?

पीयूष गोयल ने कहा कि भारत में कारों की घरेलू मांग लगातार बढ़ रही है। जैसे-जैसे बाजार का आकार बड़ा होगा, विदेशी कंपनियों के लिए यहां फैक्ट्रियां लगाना आर्थिक रूप से ज्यादा फायदेमंद होगा।

उन्होंने लग्जरी कार कंपनियों का उदाहरण देते हुए बताया कि कुछ कंपनियों ने शुरुआत में भारतीय बाजार में अपनी गाड़ियों की बिक्री की संभावनाएं परखीं। इसके बाद मांग बढ़ने पर उन्होंने पुणे में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित किए।

गोयल का मानना है कि आने वाले समय में दूसरी अंतरराष्ट्रीय कार कंपनियां भी इसी रास्ते पर आगे बढ़ सकती हैं।

टाटा मोटर्स और जगुआर का दिया उदाहरण

पीयूष गोयल ने टाटा मोटर्स द्वारा जगुआर के अधिग्रहण का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि अधिग्रहण के बाद कंपनी को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा था।

हालांकि, टाटा मोटर्स ने धीरे-धीरे अपने कारोबार में बदलाव किए और कुछ मॉडल्स के उत्पादन को भारत में स्थानांतरित किया। कई वर्षों की मेहनत के बाद कंपनी इस कारोबार को मुनाफे में लाने में सफल रही।

गोयल ने इस उदाहरण के जरिए बताया कि भारत में मैन्युफैक्चरिंग की संभावनाएं कितनी मजबूत हो सकती हैं।

भारत-EU ट्रेड डील से ऑटो सेक्टर को क्या फायदा?

भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने जनवरी में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत पूरी की थी। इसकी संयुक्त घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन में की थी।

इस समझौते में ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए कोटा आधारित व्यवस्था शामिल है। इसके तहत यूरोपीय कार कंपनियों को भारत में ऊंची कीमत वाली गाड़ियों के कुछ मॉडल पेश करने की सुविधा मिलेगी।

साथ ही इस समझौते से भारत में गाड़ियों का उत्पादन बढ़ाने और यहां बनी कारों को यूरोपीय बाजार में निर्यात करने के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।

advertisement

ब्रिटेन के साथ ट्रेड डील में भी महंगी कारों पर राहत

भारत ने ब्रिटेन के साथ व्यापार समझौते के तहत भी ऑटोमोबाइल सेक्टर में कोटा आधारित टैरिफ रियायतें दी हैं। यह समझौता 15 जुलाई से लागू हुआ था।

पीयूष गोयल के मुताबिक, इन रियायतों का फायदा मुख्य रूप से महंगी कारों को मिलेगा। कम कीमत वाली कारों के बाजार को बड़े पैमाने पर विदेशी प्रतिस्पर्धा के लिए नहीं खोला गया है।

इसका मतलब है कि भारत में आम ग्राहकों के लिए किफायती कार बनाने वाली घरेलू कंपनियों को मौजूदा व्यवस्था में संरक्षण मिलता रहेगा।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर सेक्टर में भी बढ़ेगा निवेश?

पीयूष गोयल ने कहा कि भारत में सिर्फ कारों की ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उपकरणों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है।

इससे देश में नई फैक्ट्रियां लगाने और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में निवेश बढ़ाने के अवसर बन सकते हैं।

उन्होंने भारत की युवा आबादी को भी बड़ी ताकत बताया। गोयल के मुताबिक, जब दुनिया के कई देशों में कामकाजी आबादी की औसत उम्र बढ़ रही है, तब भारत के पास बड़ी संख्या में युवा कर्मचारी उपलब्ध हैं।

advertisement

भारत ने रखा 1 ट्रिलियन डॉलर के एक्सपोर्ट का लक्ष्य

पीयूष गोयल ने बताया कि सरकार ने चालू वित्त वर्ष में वस्तुओं और सेवाओं के कुल निर्यात को 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से अगस्त के दौरान भारत का निर्यात सालाना आधार पर 17.85 फीसदी बढ़कर 215.91 अरब डॉलर पहुंच गया।

वहीं, इसी अवधि में आयात 18.21 फीसदी बढ़कर 363 अरब डॉलर रहा।

सरकार को उम्मीद है कि ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश बढ़ने से भारत की उत्पादन क्षमता और निर्यात को मजबूती मिलेगी।