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इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ ग्राहकों का बढ़ता रूझान

इलेक्ट्रिक वाहन बाजार अभी शुरुआती चरण में है लेकिन आने वाले समय में इसमें काफी वृद्धि होने की उम्मीद है। इलेक्ट्रिक वाहन बाजार के 2029 तक 110.74 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।

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हाल ही में ईवी वाहनों का रुख करना परिवहन क्षेत्र में आए सभी बड़े बदलावों के बीच एक सबसे महत्वपूर्ण बदलाव है
हाल ही में ईवी वाहनों का रुख करना परिवहन क्षेत्र में आए सभी बड़े बदलावों के बीच एक सबसे महत्वपूर्ण बदलाव है

हाल ही में ईवी वाहनों का रुख करना परिवहन क्षेत्र में आए सभी बड़े बदलावों के बीच एक सबसे महत्वपूर्ण बदलाव है। आज, हमारे पास ऐसे वाहन हैं जो बिजली से चलते हैं और ये वाहन हमें ढेरों आर्थिक, पर्यावरणीय और सामाजिक लाभ प्रदान करते हैं और लोगों को लगने लगा  है कि जीवाश्म ईंधन से चलने वाले वाहनों का भविष्य सीमित है।

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रिपोर्ट्स

कई रिपोर्ट्स से पता चलता है कि जीवाश्म ईंधन पर कम निर्भरता, कम कार्बन उत्सर्जन, ईंधन के बेहतर इस्तेमाल और बेहतर एयर क्वॉचलिटी जैसे कई मानकों पर इलेक्ट्रिक वाहन, पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहनों से बेहतर प्रदर्शन करते हैं। यह स्थाकयी परिवहन के लिए वाहनों को नया आकार देने में उनकी अहम भूमिका की ओर संकेत करता है और इस बात पर प्रकाश डालता है कि इलेक्ट्रिक वाहन भविष्य के परिवहन के लिए पर्यारवण की रक्षा करने वाली एनर्जी टेक्नोहलॉजी के रूप में उभर रहे हैं। 


ईवी के अर्थशास्त्रव में सुधार 

पिछले कुछ सालों में इलेक्ट्रिक वाहनों की लागत में काफी सुधार हुआ है। इसका संचालन काफी किफायती है। इसके अलावा ऊर्जा भंडारण से जुड़े खर्चों में भी कमी आई है। पेट्रोल की कीमतों में भारी उछाल को देखते हुए इलेक्ट्रिक वाहन परिवहन का एक पसंदीदा साधन बन गया है। इसके साथ ही यह सतत विकास को बढ़ावा देता है। आगे इनकी बैटरी, चार्जिंग और मैन्युफैक्चरिंग में तकनीकी विकास के चलते लागत में और कमी आने की संभावना है। ईवी लागत में संभावित गिरावट से बेड़े का रिनोवेशन फायदेमंद हो जाएगा और मौजूदा घाटे पर काबू पाने के साथ ही स्था यी परिवहन को बढ़ावा मिलेगा।


ईवी: भारत को उसके वैश्विक पर्यावरण और जलवायु लक्ष्यों के करीब लाने में सहायक

वर्तमान में स्था यी विकास की अवधारणा जोर पकड़ रही है। इलेक्ट्रिक वाहन परिवहन के लिए पर्यावरण के अनुकूल सॉल्यूशन प्रदान करते हैं, जो भारत को पेरिस समझौते में उल्लिखित जलवायु कार्रवाई लक्ष्यों और 2030 तक 30% परिवहन बेड़े के इलेक्ट्रिफिकेशन के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने में सहायता दे रहा है। अपनी वैश्विक प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए भारत सरकार बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के लिए तैयार है। इस समय दुनिया भर में वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने पर फोकस किया जा रहा है। ऐसे में गाडि़यों के इलेक्ट्रिफिकेशन से एक स्वच्छ और हरा-भरा भविष्य बनेगा।

कॉर्पोरेट क्लाइमेट एक्शन

जलवायु संकट का मुद्दा पूरी दुनिया में सुर्खियों में है। इस पर्यावरणीय चुनौती से निपटने की कोशिश में एक कॉर्पोरेट क्लाइमेट एक्शन ऑर्गानाइजेशन SBTi ने अपने दिशानिर्देशों को नए सिरे से अपडेट किया है, जिसमें वाहन निर्माताओं से 1.5 डिग्री सेल्सियस उत्सर्जन कटौती लक्ष्य निर्धारित करने के लिए शून्य-उत्सर्जन वाहनों और प्रक्रियाओं को अपनाने का अनुरोध किया गया है। इसके अलावा एक पर्यावरण के अनुकूल भविष्य के निर्माण के लिए संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य ब्लूप्रिंट में कार्बन डिस्क्लोजर प्रोजेक्ट (CDP) सक्रिय रूप से शामिल रहा है। गैर-लाभकारी चैरिटी कंपनियों और फाइनेंशिल मार्केट को इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ शिफ्ट होने और 1.5°C, नेचर-पॉजिटिव वर्ल्ड विजन के साथ आगे बढ़ने में सहायता करती है। भारत में ईटी (ET) का नवीनीकरण SBTi और CDP के लक्ष्यों के अनुरूप है। इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ होने वाले शिफ्ट से उत्सर्जन को कम करने में सहायता मिलेगी जिससे जलवायु परिवर्तन से प्रभावी ढंग से निपटने में मदद मिलेगी।  

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इलेक्ट्रिक वाहनों का ढांचागत विस्तार 

अभी तक मांग में कमजोरी के साथ बुनियादी ढांचागत बाधाएं भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के विस्तार में  बड़ी बाधा बनी हुई हैं। वर्तमान में, भारत की रीसाइक्लिंग प्रणाली भी कमजोर है क्योंकि बैटरियों को आमतौर पर लैंडफिल में फेंक दिया जाता है। 

स्वामित्व की कुल लागत (TCO) में समानता

तमाम प्रचार के बावजूद जब ईवी भारत में पहली बार पेश की गई तो लागत के मामले में ये ग्राहकों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी। बेहद उच्च  लागत भारत में ईवी को अपनाने में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक थी। हालांकि, इस बाधा को दूर करने के उद्देश्य से  निर्माता इलेक्ट्रिक वाहनों की इकोनॉमी में सुधार करने और इनकी लागत घटाने के लिए ठोस प्रयास कर रहे हैं। वास्तव में, ईवी अपनाने को प्रोत्साहित करने की राज्य सरकार की नीतियां अपफ्रंट कॉस्ट गैप को कम कर सकती हैं। प्रचलित मिथक के विपरीत  इलेक्ट्रिक वाहनों की परिचालन लागत कम होती है और यह ट्रेंड सभी वाहन श्रेणियों में देखने को मिलता है। हमने टू, थ्री और कमर्शियल फोर-व्ही लर्स वाहनों के लिए TCO समानता हासिल कर ली है। उम्मीद है कि हम 2025 तक पर्सनल फोर व्ही लर्स के लिए भी इसे हासिल कर लेंगे। हालांकि, इस कहानी का एक और पहलू ये है कि उच्च प्रारंभिक लागत के बावजूद ईवी से लंबी अवधि में कम ईंधन और रखरखाव खर्च के चलते बचत होती है जिससे गाडि़यां ज्याोदा दिनों तक चलती हैं।

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इलेक्ट्रिक वाहन: सप्लाई चेन की स्थिरता की कुंजी 

अशोक वशिष्ठ , संस्थापक और कार्यकारी अधिकारी, WTiCabs ने कहा है की इलेक्ट्रिक वाहनों  को अपनाने से सप्लाई चेन में होने वाला उत्सर्जन कम हो जाता है। इससे पर्यावरणीय लक्ष्यों को हासिल करने में सहायता मिलती है  और कॉर्पोरेट सस्टेनेबिलिटी साख में बढ़त होती है। कई राज्य सरकारें इलेक्ट्रिक वाहन सेक्टर में निवेश आकर्षित करने के लिए मुख्य रूप से सप्लाई-साइड इन्सेंटिव पर फोकस कर रही हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों  को अपनाने की बाधाओं को दूर करने और ईवी की तरफ बदलाव में तेजी लाने के लिए सप्लाई साइड और डिमांड साइड दोनों इन्सेंटिव के जरिए ग्राहकों और वाहन निर्माताओं को प्रोत्साहन देना महत्वपूर्ण होगा। भविष्य को देखते हुए, स्थानीय सप्लाई चेन विकसित करना भी ईवी के प्रसार को प्रोत्साहन देने की नीति का अभिन्न अंग होगा। 

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ईवी के साथ रिन्यूएबल एनर्जी को शामिल करना 

ईवी कार्बन फुटप्रिंट को कम करते हैं क्योंकि उनमें शून्य टेलपाइप उत्सर्जन होता है। इलेक्ट्रिक वाहनों को रिन्यूएबल एनर्जी स्रोतों के साथ जोड़ने से पर्यावरणीय लाभ बढ़ता है, एनर्जी फ्रीडम को बढ़ावा मिलता है और परिचालन लागत कम होती है। इलेक्ट्रिक वाहनों को अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाने के लिए रिन्यूएबल एनर्जी स्रोतों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे हासिल करने का एक तरीका घर पर स्थापित रिन्यूएबल एनर्जी स्रोतों, उदाहरण के लिए, सौर पैनलों की मदद से ईवी को चार्ज करना है। 

निष्कर्ष

अशोक वशिष्ठ , संस्थापक और कार्यकारी अधिकारी, WTiCabs ने कहा है की स्थाकयी परिवहन के लक्ष्य में, इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ बदलाव एक बड़ा कदम होगा। ये न केवल कच्चे तेल पर निर्भरता कम करेंगे बल्कि ग्रीनहाउस उत्सर्जन भी कम करेंगे, जिससे एयर क्वालिटी में सुधार लाने, प्रदूषण कम करने और भारत को वैश्विक पर्यावरण और जलवायु कार्रवाई लक्ष्यों के साथ कदम मिलने में मदद मिलेगी। ईवी की हाई अपफ्रंट कॉस्ट उनके बड़े पैमाने पर इस्तेमाल में बाधा पैदा करती है। हालांकि, बैटरी टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रियाओं में प्रगति के चलते इनकी स्वामित्व की कुल लागत को कम करने और उन्हें किफायती और सुलभ बनाने में बड़ी सफलता मिलेगी। इसके अलावा, ढांचागत विकास और मजबूत रीसाइक्लिंग नीतियां,  ईंधन और रखरखाव लागत को कम करने और बेड़े के सफल विद्युतीकरण में अहम भूमिका निभाएंगी। सभी हितधारकों के बीच एक सहयोगात्मक नजरिया इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने, इनोवेशन को बढ़ावा देने और पर्यावरण के अनुकूल गाडि़यों का रुख करने में भी तेजी लाएगा।

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इलेक्ट्रिक वाहन बाजार

अशोक वशिष्ठ , संस्थापक और कार्यकारी अधिकारी, WTiCabs ने कहा है की इलेक्ट्रिक वाहन बाजार अभी शुरुआती चरण में है लेकिन आने वाले समय में इसमें काफी वृद्धि होने की उम्मीद है। इलेक्ट्रिक वाहन बाजार के 2029 तक 110.74 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। इस इंडस्ट्री से भविष्य के परिवहन के तरीके को नया आकार देने की संभावना है। नीतिगत उपाय, ढांचागत विकास, स्वाीमित्वर की कुल लागत में समानता और सस्टेनेबिलिटी पर फोकस जैसे कारकों की वजह से वाहनों के इलेक्ट्रिफिकेशन में तेजी आएगा, ऑटोमोटिव और मोबिलिटी इंडस्ट्री के लिए के एक नए युग का रास्ता खुलेगा जो स्वच्छ, हरित और पर्यावरण-हितैषी होगा।