E20 पेट्रोल पर माइलेज घटने की आशंका नई नहीं, सरकार ने 5 साल पहले ही दे दी थी इसकी पूरी चेतावनी
E20 पेट्रोल को लेकर चल रही बहस के बीच सरकार की 2021 की एथेनॉल ब्लेंडिंग रोडमैप रिपोर्ट फिर चर्चा में है। रिपोर्ट में पुराने वाहनों में माइलेज घटने, पुर्जों में बदलाव की जरूरत और E20 को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की सलाह पहले ही दी गई थी।

देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर माइलेज और गाड़ियों की अनुकूलता पर बहस तेज हो गई है। इस बीच सामने आया है कि सरकार ने करीब पांच साल पहले ही इन चुनौतियों का अंदाजा लगा लिया था। जून 2021 में नीति आयोग और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने मिलकर 'Roadmap for Ethanol Blending in India 2020-25' जारी किया था।
इस रोडमैप में E10 से E20 पेट्रोल पर जाने के लिए जरूरी तकनीकी बदलाव, नियमों में बदलाव और वाहन बनाने वाली कंपनियों को क्या-क्या तैयारियां करनी होंगी, इसका पूरा खाका पहले ही तैयार कर दिया गया था।
पुराने वाहनों में माइलेज घटने का था अनुमान
रिपोर्ट के मुताबिक, E10 के लिए कैलिब्रेट किए गए मौजूदा चार पहिया वाहनों में E20 फ्यूल इस्तेमाल करने पर फ्यूल एफिशिएंसी में करीब 6-7 फीसदी तक कमी आ सकती है। वहीं, दोपहिया वाहनों में यह गिरावट 3-4 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया था।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि E20 के लिए स्पेशल रूप से डिजाइन और कैलिब्रेट किए गए वाहनों में माइलेज पर असर काफी कम होगा और फ्यूल एफिशिएंसी में केवल 1-2 फीसदी तक की कमी आने की उम्मीद है।
वाहन कंपनियों के लिए सुझाए गए थे तकनीकी बदलाव
रोडमैप में साफ कहा गया था कि अधिक एथेनॉल मिश्रण के लिए वाहनों के कई पुर्जों में बदलाव जरूरी होंगे। रिपोर्ट के अनुसार, E10 के लिए इस्तेमाल होने वाले रबर और प्लास्टिक के कई हिस्से E20 के लिए पर्याप्त नहीं होंगे। इसके लिए बेहतर एलास्टोमर, प्लास्टिक और कुछ धातु वाले पुर्जों को अधिक एथेनॉल के अनुरूप विकसित करना होगा। इसके चलते ऑटोमोबाइल कंपनियों को इंजीनियरिंग स्तर पर बदलाव करने की जरूरत होगी।
बदलाव की दी थी सलाह
रिपोर्ट में सरकार को सलाह दी गई थी कि E20 पेट्रोल को एकदम लागू करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए। ऐसा इसलिए ताकि वाहन बनाने वाली कंपनियों को इंजन में जरूरी बदलाव करने, नए पुर्जों की टेस्टिंग करने, सप्लाई चेन मजबूत करने और अपनी फैक्ट्रियों को तैयार करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि जब तक सभी वाहन E20 के लिए तैयार नहीं हो जाते, तब तक पुराने वाहनों के लिए कम एथेनॉल मिश्रण वाला पेट्रोल भी उपलब्ध रहना चाहिए। इसके लिए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय को अलग से एक ट्रांजिशन प्लान जारी करने की भी सिफारिश की गई थी, ताकि बदलाव बिना किसी परेशानी के हो सके।

