E20 पेट्रोल पर बहस तेज, BJP सांसद ने पेट्रोल-इथेनॉल का अंतर दिखाया, वीडियो वायरल
E20 पेट्रोल को लेकर देश में बहस लगातार तेज हो रही है। इसी बीच तेलंगाना की चेवेल्ला लोकसभा सीट से सांसद कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी वीडियो सामने आता है, जिसमें वह पेट्रोल और इथेनॉल को जलाकर दोनों के बीच अंतर दिखाने की कोशिश करते हैं।

In Short
- बीजेपी सांसद कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी ने वीडियो में पेट्रोल और शुद्ध इथेनॉल जलाकर E20 को लेकर फैल रही गलत जानकारी पर सवाल उठाए।
- खुले बर्तन में ईंधन जलाने के प्रयोग से सिर्फ जलने का अंतर दिखता है, वाहन के वास्तविक प्रदर्शन और उत्सर्जन का पूरा आकलन नहीं किया जा सकता।
- E20 से आयातित पेट्रोल पर निर्भरता कम करने की कोशिश हो रही है, लेकिन माइलेज और पुराने वाहनों पर असर जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
E20 Petrol: E20 पेट्रोल को लेकर देश में बहस लगातार तेज हो रही है। इसी बीच बीजेपी सांसद कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह पेट्रोल और इथेनॉल को जलाकर दोनों के बीच अंतर दिखाने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं। बीजेपी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से शेयर किए गए इस वीडियो में सांसद E20 को लेकर फैल रही गलत जानकारी पर सवाल उठा रहे हैं।
तेलंगाना की चेवेल्ला लोकसभा सीट से सांसद कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी वीडियो में 100 फीसदी पेट्रोल और शुद्ध इथेनॉल को अलग-अलग स्टील की कटोरियों में डालते हैं। इसके बाद दोनों में आग लगाई जाती है।
वीडियो में पेट्रोल ज्यादा तेज और ऊंची लौ के साथ जलता दिखाई देता है, जबकि इथेनॉल की लौ अपेक्षाकृत कम दिखाई देती है। सांसद दोनों ईंधनों के जलने के बाद कटोरियों को दिखाते हैं। उनके मुताबिक, पेट्रोल वाली कटोरी ज्यादा काली दिखाई देती है, जबकि इथेनॉल वाली कटोरी काफी साफ रहती है।
रेड्डी इस प्रयोग के जरिए यह बताने की कोशिश करते हैं कि इथेनॉल ज्यादा क्लीन तरीके से जलता है और पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिलाने यानी E20 से प्रदूषण कम करने में मदद मिल सकती है। वह इसे भारत में किसानों द्वारा तैयार किए जा रहे इथेनॉल और आयातित पेट्रोल के बीच तुलना के तौर पर भी पेश करते हैं।
क्या इस प्रयोग से E20 को पूरी तरह बेहतर साबित किया जा सकता है?
किसी ईंधन को खुले बर्तन में जलाकर उसके वास्तविक वाहन उत्सर्जन का फैसला नहीं किया जा सकता। गाड़ी में फ्यूल किस तरह जलता है, यह इंजन का डिजाइन, फ्यूल की क्वालिटी, वाहन की तकनीक और Emission Control System जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है।
E20 को लेकर सबसे बड़ा सवाल माइलेज और पुराने वाहनों पर इसके असर को लेकर है। सरकार भी यह मान चुकी है कि पुराने वाहनों में E20 के इस्तेमाल से माइलेज में करीब 6 फीसदी तक की कमी हो सकती है। वहीं, लंबे समय तक इस्तेमाल का असर कुछ पुराने वाहनों के रबर और दूसरे फ्यूल सिस्टम कंपोनेंट्स पर भी पड़ सकता है।
हालांकि, E20 के समर्थकों का तर्क है कि इससे पेट्रोल में घरेलू स्तर पर तैयार इथेनॉल की हिस्सेदारी बढ़ती है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में घरेलू कृषि उत्पादों से तैयार इथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ाकर आयातित पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने की कोशिश की जा रही है।
क्या E20 आपकी गाड़ी के लिए खराब है?
इसका जवाब हर गाड़ी के लिए एक जैसा नहीं है। जो वाहन E20 के लिए तैयार किए गए हैं, उनमें इस फ्यूल के इस्तेमाल के हिसाब से जरूरी तकनीकी बदलाव किए जाते हैं। पुराने वाहनों में इसका असर अलग हो सकता है।
इथेनॉल पेट्रोल से अलग तरीके से व्यवहार करता है और नमी सोखने की क्षमता भी रखता है। इसलिए फ्यूल की क्वालिटी, स्टोरेज और वाहन की तकनीक काफी महत्वपूर्ण हो जाती है।
यानी सांसद का यह छोटा प्रयोग इथेनॉल के जलने का एक अंतर जरूर दिखाता है, लेकिन सिर्फ इस आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि E20 हर वाहन के लिए बेहतर है या नहीं। E20 को समझने के लिए Mileage, Engine Compatibility, Emissions और Long-Term Vehicle Performance इन सभी पहलुओं को साथ देखना जरूरी है।

