भारतीय रूपये से क्यों बिदक गया रूस ?

रूस के लिए डॉलर पर प्रतिबंध लगने से वो मुख्य धारा से अलग-थलग पड़ गया था। उस वक्त भारत ही था जो रूस की मदद के लिए सामने आया था। रूस ने भारत को रुपये में बिजनेस और ट्रांजैक्शन करने के लिए प्रोत्साहित किया था। जिसके बाद भारत ने रूस की परेशानी को समझते हुए रुपये में ट्रांजैक्शन शुरू किया।

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रूस ने चीन के लिए दिया भारत को झटका!
रूस ने चीन के लिए दिया भारत को झटका!

By Harsh Verma:

रूस ने चीन के लिए दिया भारत को झटका!

आपको वो दौर याद होगा कि जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था, जिसके बाद ज्यादातर दुनिया के देश रूस के खिलाफ हो गए थे और उस पर प्रतिबंधों की झड़ी लगा दी थी। जिसमें से एक था अमेरिका के जरिए रूसी बैंकों पर कई तरह के प्रतिबंध। चूंकि इस फैसले के बाद स्विफ्ट मैसेजिंग सिस्टम से रूसी बैंकों को बाहर कर दिया गया था, इसलिए डॉलर समेत कई करेंसी में रूसी कारोबार के ट्रांजैक्शन बंद हो गए थे। जिसके बाद रूस को जबरदस्त नुकसान हो रहा था। रूस किसी भी सामान का इंपोर्ट और एक्सपोर्ट नहीं कर पा रहा था।  रूस के लिए डॉलर पर प्रतिबंध लगने से वो मुख्य धारा से अलग-थलग पड़ गया था। उस वक्त भारत ही था जो रूस की मदद के लिए सामने आया था। रूस ने भारत को रुपये में बिजनेस और ट्रांजैक्शन करने के लिए प्रोत्साहित किया था। जिसके बाद भारत ने रूस की परेशानी को समझते हुए रुपये में ट्रांजैक्शन शुरू किया। लेकिन अब इसी रूस ने भारत को बड़ा झटका दिया है। रूस ने ऐसा कदम उठाया है जिससे भारत बीच मचधार में फंस गया है। इतना ही नहीं बल्कि रूस तो अब ऐसे-ऐसे कारनामे कर रहा है जिससे भारत को नुकसान और चीन को सीधा फायदा हो सकता है। आइये समझते हैं आखिर मामला क्या है?

सबस पहले जान लीजिए रूस ने क्या कदम उठाया है?

भारत और रूस के बीच रुपये में व्यापार करने को लेकर रूस ने इनकार कर दिया है।  शंघाई सहयोग संगठन के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान गोवा में आए रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोफ ने पत्रकारों को बताया कि रूस के भारतीय बैंकों में अरबों रुपए पड़े हैं, लेकिन वो इसका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। हमें इसे दूसरी मुद्रा में ट्रांसफर करना होगा। 

भारत और रूस के बीच व्यापार संतुलन रूस के पक्ष में झुका हुआ

इस बयान के मायने समझते हैं। जब रूस ने भारत को रुपये में ट्रांजैक्शन करने के लिए जोर दिया था, तो भारत ने रूस से भारी मात्रा में कच्चा तेल और कोयला खरीदा और तय हुआ कि सारे ट्रांजैक्शन अब रुपये में ही होंगे। चूंकि रूस सस्ता तेल दे रहा था, इसलिए भारत ने अपना इंपोर्ट बढ़ाना शुरू कर दिया था। भारत की ओर रूसी हथियार, तेल, कोयला और दूसरी चीजों का इंपोर्ट बढ़ने से रूस का ट्रेड सरप्लस हो गया यानि कि भारत और रूस के बीच व्यापार संतुलन रूस के पक्ष में झुका हुआ है और रुपये में पेमेंट लेने के चलते रूस के पास रुपये का भंडार लग गया है। एक आंकड़े के मुताबिक रूस के बैंकों में 40 अरब डॉलर के बराबर रुपया जमा हो गया है। दूसरी ओर रूस इस पैसे का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है क्योंकि उसके पास रुपये को लेकर विकल्प सीमित हैं और वैसे भी पश्चिमी देशों ने उस पर कई तरह प्रतिबंध लगा दिए हैं। इसका असर ये हो रहा है कि रूस के बैंकों में पड़े रुपये की वैल्यू लगातार घटती जा रही है। ऐसे में रुपये की दूसरी करेंसी में कन्वर्जन की लागत भी बढ़ गई है। रिपोर्ट के मुताबिक अगर रूस भारत के साथ रुपये में पेमेंट लेता रहा तो उसके पास हर साल करीब 3 लाख 27 हजार करोड़ रुपये जमा होंगे। रूस का मानना है कि इतने रुपये इकट्ठे होना उसकी वित्तीय सेहत के लिए ठीक नहीं है। 

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वहीं दूसरी ओर रूस चाहता है कि अब भारत को पेमेंट युआन या किसी दूसरी करेंसी में करना चाहिए, क्योंकि अगर भारत ये पेमेंट युआन में करेगा तो ये सौदा भारत के लिए महंगा साबित होगा, लेकिन चीन को इसका सीधा फायदा मिलेगा। इस झटके का एक पहलू ये भी है कि रूस के साथ भारत ने 9 वोस्ट्रो अकाउंट खोले हैं और पेमेंट भी उसमें रुपये में ही हो रही है। लेकिन अब रूस के इनकार के भारत के इंपोर्टर को भी बड़ा झटका लगा है। ऐसे में देखना होगा कि आने वाले दिनों में भारत सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है।

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