ED ने केजरीवाल की न्यायिक हिरासत 14 दिन बढ़ाने की मांग की
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने इससे पहले केजरीवाल की न्यायिक हिरासत 20 मई तक बढ़ा दी थी। ईडी ने केजरीवाल को 21 मार्च को उनके सरकारी आवास से गिरफ्तार किया था।

प्रवर्तन निदेशालय ED ने सोमवार को अदालत में एक आवेदन दायर कर कथित शराब नीति घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की न्यायिक हिरासत 14 दिन बढ़ाने की मांग की। अंतरिम जमानत पर जेल से बाहर चल रहे केजरीवाल को 2 जून को सरेंडर करना होगा।
केजरीवाल की न्यायिक हिरासत
.दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने इससे पहले केजरीवाल की न्यायिक हिरासत 20 मई तक बढ़ा दी थी। ED ने केजरीवाल को 21 मार्च को उनके सरकारी आवास से गिरफ्तार किया था। केंद्रीय एजेंसी ने पिछले सप्ताह आबकारी नीति मामले में एक नया आरोपपत्र दाखिल किया था, जिसमें अरविंद केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी (आप) को आरोपी बनाया गया था। यह पहली बार है कि किसी मौजूदा मुख्यमंत्री और राजनीतिक दल को धन शोधन के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है। विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा आगामी दिनों में अनुलग्नक के अलावा 200 पृष्ठों के आरोपपत्र पर संज्ञान ले सकती हैं। सूत्रों ने पीटीआई-भाषा को बताया कि आरोपियों पर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत आरोप लगाने की मांग की गई है।
आबकारी घोटाले
इस मामले में ईडी द्वारा दायर यह आठवां आरोपपत्र है जिसमें उसने अब तक 18 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस महीने की शुरुआत में एजेंसी ने बीआरएस नेता के कविता और चार अन्य के खिलाफ इसी तरह की शिकायत दर्ज की थी। एजेंसी ने केजरीवाल को दिल्ली आबकारी घोटाले का "सरगना और मुख्य साजिशकर्ता" बताया है। इसने यह भी आरोप लगाया है कि उन्होंने दिल्ली सरकार के मंत्री, आप नेताओं और अन्य लोगों के साथ मिलीभगत करके काम किया। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि केजरीवाल ने अब खत्म हो चुकी आबकारी नीति के निर्माण में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा, "हमारे पास प्रत्यक्ष सबूत हैं कि केजरीवाल एक सात सितारा होटल में रुके थे, जिसका बिल आंशिक रूप से मामले के एक आरोपी ने चुकाया था।"
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जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत
ईडी ने पहले दावा किया था कि आप, एक राजनीतिक दल होने के नाते, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत भारत के नागरिकों के एक संघ या निकाय के रूप में परिभाषित है, और इसलिए इसे पीएमएलए की धारा 70 के तहत एक “कंपनी” के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है। इसमें कहा गया था कि चूंकि अरविंद केजरीवाल अपराध के समय उक्त कंपनी यानी आप के प्रभारी और जिम्मेदार थे, इसलिए उन्हें और उनकी पार्टी को धन शोधन निरोधक कानून के तहत उल्लिखित अपराधों का दोषी माना जाएगा और उन पर मुकदमा चलाया जाएगा तथा उन्हें दंडित किया जाएगा।
(पीटीआई से इनपुट्स सहित)