Retirement Planning: 67% भारतीय खुद को रिटायरमेंट के लिए मानते हैं तैयार: PGIM Survey

संगठन सफल रिटायरमेंट की योजना को प्रभावित कर सकते हैं और अपने कर्मचारियों के बीच वित्तीय बेहतरी सुनिश्चित कर सकते हैं, जिससे कर्मचारियों की वफादारी और प्रोडक्टिविटी में बढ़ोतरी का लाभ मिल सकता है।

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भारतीयों की बड़ी आबादी का मानना है कि वे रिटायरमेंट के लिए तैयार हैं
भारतीयों की बड़ी आबादी का मानना है कि वे रिटायरमेंट के लिए तैयार हैं

By BT बाज़ार डेस्क:

भारतीयों की बड़ी आबादी का मानना है कि वे रिटायरमेंट के लिए तैयार हैं, ऐसे लोगों की संख्या 2020 में 49% की तुलना में बढ़कर 2023 में 67% हो गई है। पहले, रिटायरमेंट मुख्य रूप से परिवार के दायित्वों को पूरा करने को लेकर जुड़ी थी। पिछले कुछ साल में, इसकी परिभाषा आत्म-सम्मान और खुद की पहचान की तलाश तक पहुंच गई है - जिसमें खुद की देखभाल करते हुए और अपने हितों की खोज करके अपने व्यक्तित्व का पालन पोषण करना शामिल है। पीजीआईएम इंडिया रिटायरमेंट रेडीनेस सर्वे 2023 से पता चलता है कि आज, भारतीय अपनी जरूरतों या इच्छाओं आकांक्षाओं से समझौता किए बिना अपने वित्त (फाइनेंस) पर नियंत्रण चाहते हैं।

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इस सर्वेक्षण में कुछ मुख्य बातें निकलकर सामने आईं हैं:
 

1. व्यक्तिगत आय में बढ़ोतरी के साथ लोगों की आय में से कर्ज और देनदारियों के लिए आवंटन बढ़ रहा है। भारतीय अपने धन का 59 फीसदी घरेलू खर्चों के लिए और 18 फीसदी लोन चुकाने के लिए आवंटित कर रहे हैं, जो 2020 के सर्वेक्षण के निष्कर्षों से थोड़ा अधिक है।

2. लोगों द्वारा पूंजी के निर्माण की दिशा में एक सचेत प्रयास किया जा रहा है, जहां कुल आय का 5 फीसदी कौशल विकास या एजुकेशन लोन के लिए आवंटित किया जाता है।

3. सर्वे में भाग लेने वाले 48% ने बताया कि महामारी के कारण सोच, व्यवहार और वित्तीय योजना में बदलाव आया है - भारतीय वित्तीय रूप से अधिक जागरूक, योजनाबद्ध और अनुशासित हो गए हैं।

4. कम आय के साथ, अधिक रिटर्न पैदा करने और वित्तीय रूप से सुरक्षित रहने पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। जैसे-जैसे आय बढ़ रही है, लोगों की प्राथमिकता अपने वर्तमान संस्‍थान यानी वर्किंग प्लेस में उच्च पद तक पहुंचना और पैसिव इनकम के सोर्स विकसित करने जैसे अन्य पहलुओं को दी जा रही है।

5. पहचान' और 'आत्म-सम्‍मान' अब केवल भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को पूरा करने तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि खुद की देखभाल करना और जानने तक भी बढ़ रहा है।

6. महामारी के बाद, भारतीयों ने पारिवारिक सुरक्षा के अलावा, मेडिकल इमरजेंसी और रिटायरमेंट योजना जैसी लंबी अवधि के लक्ष्‍य पर अधिक जोर देना शुरू कर दिया है।

7. महामारी के बाद वित्त प्रबंधन से संबंधित 'आय के वैकल्पिक सोर्स की कमी' के बारे में चिंता करने वालों की संख्या साल 2020 में 8% से बढ़कर 2023 में 38% तक पहुंच गई है।

8. महामारी के बाद, 'महंगाई' और 'आर्थिक मंदी' रिटायरमेंट के बाद वित्त प्रबंधन से संबंधित चिंताओं की टॉप लिस्ट में आ गए - यह 2020 के सर्वे की तुलना में दोगुना हो गया, जो हाल की व्यापक-आर्थिक चुनौतियों के प्रभाव को दर्शाता है।

9. उत्साहजनक रूप से, 67 फीसदी भारतीयों का कहना है कि वे रिटायरमेंट के लिए तैयार हैं, जिससे कुल मिलाकर भावनात्मक लाभ होता है, जिससे उन्हें काम और जीवन के बारे में सकारात्मक सोच मिलती है। जिन लोगों ने अपनी रिटायरमेंट की योजना बनाई है, वे आमतौर पर इसे 33 साल की उम्र के आसपास शुरू करते हैं और जिन्होंने नहीं किया है, वे 50 की उम्र में शुरू करने का इरादा रखते हैं।

10. 2020 में 10% की तुलना में 2023 में 23% लोगों को सीधे इक्विटी/शेयर और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) की तुलना में म्‍यूचुअल फंड ज्यादा आकर्षक दिख रहा  है। सर्वे के अनुसार भारतीय निवेशक अभी भी फिक्‍स्‍ड इनकम विकल्‍पों और बीमा को प्राथमिकता देते हैं।

11. बदल रही जीवनशैली और व्यापक-आर्थिक स्थितियों के साथ, भारतीयों को लगता है कि उन्हें अपने रिटायरमेंट फंड बनाने के लिए अपनी सालाना आय का 10-12 गुना चाहिए, जो 2020 के सर्वेक्षण में 8-9 गुना था।

12. 2020 के सर्वे में हमने महामारी से पहले के युग में जो देखा उसके विपरीत, भारतीयों ने अब वित्तीय सुरक्षा को स्वतंत्रता के साथ जोड़ना शुरू कर दिया है - संयुक्त परिवार में रहने वाले भी अब वित्तीय सुरक्षा को लेकर सजग हैं। 2020 के सर्वे में 89 फीसदी की तुलना में 2023 में सिर्फ 70 फीसदी ने बताया कि वे संयुक्त परिवारों में रहकर आर्थिक रूप से सुरक्षित महसूस करते हैं।

13. आय का वैकल्पिक सोर्स होने से रिटायरमेंट के लिए तैयारी की भावना काफी बढ़ जाती है। सर्वे में भाग लेने वाले 36 फीसदी में से जिनके पास वैकल्पिक आय के सोर्स हैं, उनमें से 42 फीसदी ऐसे हैं, जिन्हें फाइनेंशियल एसेट्स यानी वित्तीय परिसंपत्तियों में निवेश से अतिरिक्त आय होती है।

14. ऐसा लगता है कि भारतीयों को रिटायरमेंट के लिए कुशलतापूर्वक योजना बनाने के लिए थोड़ी अधिक सहायता और समर्थन की आवश्यकता है। बीमा में निवेश करना और बीमा एजेंट से सलाह लेना वित्तीय रूप से सुरक्षित माना जाता है या रिटायरमेंट के लिए योजना बनाई जाती है। लगभग दो तिहाई उत्तरदाताओं ने बीमा एजेंटों से वित्तीय सलाह लिया और इसकी तुलना में एक कम लोगों ने पंजीकृत निवेश सलाहकारों से बीमा के बारे में सलाह ली।

15. वित्तीय सलाह लेने वालों के लिए धन के प्रबंधन पर वर्कलोड साझा करना सलाहकारों के बारे में सबसे मूल्यवान पहलू है। हालांकि, आज जिनके पास रिटायरमेंट योजना है, उनमें से सिर्फ 10 फीसदी ही पंजीकृत निवेश सलाहकार से उचित फाइनेंशियल प्लानिंग को लेकर सेवाएं चाहते हैं और जिनके पास लिखित योजना है उनमें से केवल 16 फीसदी ने पंजीकृत निवेश सलाहकार के साथ अपनी योजना के बारे में जानकारी ली है।

16. भले ही 55% से अधिक लोगों की अपने संगठनों के प्रति वफादारी बढ़ी है, लेकिन लगभग एक तिहाई लोग वित्त से जुड़ी चिंताओं का अनुभव करते हैं। जिनमें से लगभग दो तिहाई का मानना है कि यह दिन के आधे समय के लिए उनकी प्रोडक्टिविटी पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।

17. संगठन सफल रिटायरमेंट की योजना को प्रभावित कर सकते हैं और अपने कर्मचारियों के बीच वित्तीय बेहतरी सुनिश्चित कर सकते हैं, जिससे कर्मचारियों की वफादारी और प्रोडक्टिविटी में बढ़ोतरी का लाभ मिल सकता है। सर्वे में भाग लेने वाले 2 में से 1 ने महसूस किया कि अगर कंपनी या संगठन उनकी रिटायरमेंट/फाइनेंशियल प्लानिंग को आगे बढ़ाता है या सुविधा प्रदान करता है, तो कर्मचारियों की वफादारी भी उनके प्रति बढ़ेगी।
 
पीजीआईएम इंडिया म्यूचुअल फंड के सीईओ अजीत मेनन ने कहा लोग अब 'खुद की पहचान', 'खुद की देखभाल' और 'आत्म-सम्‍मान' पर ज्यादा जोर दे रहे हैं।

लोगों द्वारा पूंजी के निर्माण की दिशा में एक सचेत प्रयास किया जा रहा है

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