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Lays चिप्स के आलू पर सुप्रीम कोर्ट में छिड़ी कानूनी जंग, PepsiCo और किसानों के अधिकारों पर होगा बड़ा फैसला

इंडिया टुडे के पत्रकार संजय शर्मा ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि किसान संगठनों और कार्यकर्ताओं ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें पेप्सिको के इस आलू की किस्म पर पौध संरक्षण पंजीकरण अधिकार (Breeder Rights) को बहाल कर दिया गया था।

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पेप्सिको (PepsiCo) के प्रोडक्ट 'Lays' चिप्स बनाने में इस्तेमाल होने वाले विशेष किस्म के आलू FL 2027 (FC5) के पेटेंट और अधिकारों को लेकर कानूनी लड़ाई अब देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गई है।

इंडिया टुडे के पत्रकार संजय शर्मा ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि किसान संगठनों और कार्यकर्ताओं ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें पेप्सिको के इस आलू की किस्म पर पौध संरक्षण पंजीकरण अधिकार (Breeder Rights) को बहाल कर दिया गया था।

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जानिए पूरा मामला

​यह पूरा मामला FL 2027 नामक आलू की एक खास किस्म से जुड़ा है। यह आम रसोइयों में इस्तेमाल होने वाला आलू नहीं है, बल्कि इसे विशेष रूप से चिप्स और वेफर्स बनाने के लिए तैयार किया गया है। इसमें नमी की मात्रा कम होती है, जो चिप्स निर्माण के लिए कमर्शियल रूप से सही है।

​पेप्सिको का दावा है कि इस किस्म को उन्होंने विकसित किया है और पौध किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 2001 के तहत इस पर उनका विशेष अधिकार है। दूसरी ओर, किसान संगठनों का कहना है कि भारतीय कानून देश के किसानों को बीजों को उगाने, सहेजने और बेचने का अटूट अधिकार देता है।

​पेप्सिको की दलील है कि इसके ​ब्रीडर का एक्सक्लूसिव अधिकार उसके पास है। कंपनी के वकील के अनुसार, 2016 में मिला पंजीकरण उन्हें इस किस्म को उत्पादित करने, बेचने और बाज़ार में उतारने का पूरा अधिकार देता है। बिना अनुमति कोई अन्य इसे नहीं उगा सकता।

पेप्सिको का तर्क है कि वे आम छोटे किसानों के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उन मामलों में कार्रवाई कर रहे थे जहां दूसरी कपीटिटर चिप्स निर्माता कंपनियों के इशारे पर इस आलू की व्यावसायिक खेती कराई जा रही थी।

किसानों और याचिकाकर्ताओं का पक्ष है कि कृषक अधिकार कानून की​धारा 39 के तहत उनका विशेषाधिकार पेप्सिको के एकाधिकार पर भारी है। वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोंसाल्विस और याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि कानून की धारा 39(1)(iv) किसानों को स्पष्ट सुरक्षा देती है। किसान किसी भी संरक्षित किस्म के बीज को उगाने, सहेजने, आपस में बदलने और बेचने के लिए स्वतंत्र हैं, जब तक कि वे उसे 'ब्रांडेड बीज' के रूप में न बेचें।