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सुपरटेक केस में बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में रुके प्रोजेक्ट्स पूरे करने की राह साफ

रियल एस्टेट दिवाला मामलों में शामिल सुपरटेक लिमिटेड के घटनाक्रम ने अब सॉल्यूशन की दिशा पकड़ ली है। इस प्रक्रिया में एक बड़ा कदम NBCC (India) Ltd को कई रुके हुए प्रोजेक्ट्स को पूरा करने की जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव है।

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रियल एस्टेट दिवाला मामलों में शामिल सुपरटेक लिमिटेड के घटनाक्रम ने अब सॉल्यूशन की दिशा पकड़ ली है। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप और गाइडेंस से रुके हुए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को पूरा करने का रास्ता पहले से अधिक स्पष्ट और संरचित होता दिख रहा है।

इस पूरी प्रक्रिया का सबसे अहम पहलू हजारों होमबायर्स के हितों की रक्षा है, जो सालों से अपने घर का इंतजार कर रहे हैं। दिवाला प्रक्रिया के दौरान इंटरिम रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (IRP) की निगरानी में ऐसे व्यावहारिक समाधान खोजे गए, जिनसे रुकी परियोजनाओं को दोबारा शुरू किया जा सके। इस दौरान प्राथमिकता यही रही कि होमबायर्स का भरोसा बना रहे और सभी स्टेकहोल्डर्स के बीच संतुलन कायम हो।

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NBCC को सौंपी गई जिम्मेदारी

इस प्रक्रिया में एक बड़ा कदम NBCC (India) Ltd को कई रुके हुए प्रोजेक्ट्स को पूरा करने की जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव है। इस प्रस्ताव को नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने मंजूरी दी, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी सही ठहराया। कोर्ट ने माना कि यह फैसला न तो अनुचित है और न ही दिवाला कानून के खिलाफ जाता है।

प्रोजेक्ट्स में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक एपेक्स कोर्ट कमेटी बनाई गई है। इसकी अध्यक्षता IRP हितेश गोयल कर रहे हैं। कमेटी में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के प्रतिनिधि सचिन देव, एलएंडटी फाइनेंस के प्रतिनिधि प्रवीण निजहावन और NBCC के विजय कुमार चौधरी शामिल हैं। इसके अलावा एक स्वतंत्र रियल एस्टेट या कंस्ट्रक्शन विशेषज्ञ को भी जोड़ा जाएगा।

यह कमेटी प्रोजेक्ट्स की प्रगति पर नजर रखेगी, फंड के इस्तेमाल की निगरानी करेगी और सुनिश्चित करेगी कि निर्माण कार्य तय समयसीमा में और पारदर्शी तरीके से आगे बढ़े।