राम मंदिर चढ़ावा विवाद: 5 जून को जानकारी मिलने के बाद भी FIR क्यों नहीं, ट्रस्ट बैठक में उठे सवाल गंभीर सवाल
राम मंदिर चढ़ावा विवाद में अब जांच का फोकस सिर्फ आरोपियों पर नहीं, बल्कि ट्रस्ट की भूमिका पर भी आ गया है। 5 जून को कथित गड़बड़ी की जानकारी मिलने और रकम बरामद होने के बाद भी FIR क्यों नहीं हुई, यही सवाल अब पूरे मामले की सबसे अहम कड़ी बन गया है। पढ़ें पूरी खबर।

In Short
- राम मंदिर चढ़ावा विवाद में अब ट्रस्ट की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
- आरोप है कि 5 जून को जानकारी मिलने के बाद भी तुरंत FIR नहीं कराई गई।
- ट्रस्ट बैठक में चंपत राय और चढ़ावे की सुरक्षा पर गंभीर चर्चा हुई।
Ram Mandir donation case: अयोध्या के राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी का मामला अब सिर्फ चोरी की जांच तक सीमित नहीं रह गया है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे ट्रस्ट के फैसलों, पदाधिकारियों की भूमिका और शुरुआती कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। पुलिस जेल में बंद आरोपियों से आमने-सामने पूछताछ कर रही है। वहीं, ट्रस्ट की बैठक में भी कई अहम मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई।
आरोपियों से आमने-सामने पूछताछ
अयोध्या पुलिस ने जेल में बंद अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय को रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू की है। पुलिस का मानना है कि कई अहम बातें सिर्फ दस्तावेजों से साफ नहीं होंगी। इसके लिए आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर सवाल-जवाब करना जरूरी है। इसी वजह से पुलिस जांच को आगे बढ़ा रही है।
5 जून को ही सामने आई थी कथित गड़बड़ी
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर कथित चोरी की जानकारी पहले ही मिल गई थी, तो उसी समय एफआईआर क्यों नहीं कराई गई। आरोप है कि तत्कालीन महासचिव चंपत राय को 5 जून को ही चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की जानकारी मिल गई थी। बताया जा रहा है कि पुलिस की मदद से कथित तौर पर चोरी की गई रकम भी बरामद कर ली गई थी। इसके बाद भी उस समय एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई।
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यही बात अब पूरे विवाद की अहम कड़ी मानी जा रही है। ट्रस्ट की बैठक में भी इस पर चर्चा हुई कि अगर शुरुआत में ही मुकदमा दर्ज करा दिया जाता, तो मामला इतना नहीं बढ़ता और कानूनी प्रक्रिया समय रहते शुरू हो सकती थी।
7 जून के बाद बढ़ा मामला
बाद में 7 जून को समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने यह मामला सार्वजनिक किया। इसके बाद यह मुद्दा और ज्यादा चर्चा में आ गया। माना जा रहा था कि ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार होने के बाद विवाद धीरे-धीरे शांत हो जाएगा।
कुछ समय के लिए माहौल सामान्य भी दिखा, लेकिन बैठक में हुई चर्चा ने फिर नए सवाल खड़े कर दिए।
ट्रस्ट पदाधिकारियों की भूमिका पर सवाल
बैठक में ट्रस्ट पदाधिकारियों की जिम्मेदारियों पर भी चर्चा हुई। सदस्यों ने कहा कि चढ़ावे की सुरक्षा और उसकी गिनती की निगरानी ट्रस्ट की जिम्मेदारी थी। यह सवाल भी उठा कि चंपत राय ने कथित तलाशी और बरामदगी किस अधिकार के तहत कराई और बरामदगी के बाद तुरंत पुलिस में शिकायत क्यों नहीं दी।
बैठक में यह भी कहा गया कि अगर जांच में किसी पदाधिकारी की जिम्मेदारी में कमी सामने आती है, तो उनके खिलाफ आपराधिक जिम्मेदारी तय होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

