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NEET रद्द होने से 22 लाख छात्रों का भविष्य संकट में, ₹23 हजार करोड़ भी दांव पर

NEET-UG 2026 रद्द होने का असर सिर्फ परीक्षा तक सीमित नहीं है। लाखों छात्रों की मेहनत, परिवारों की बचत और सालों की तैयारी अब अनिश्चितता में दिखाई दे रही है। कोचिंग, हॉस्टल और पढ़ाई पर हुए भारी खर्च के बीच कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

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AI Generated Image

NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद देशभर के करीब 22.05 लाख मेडिकल अभ्यर्थियों की पढ़ाई और करियर प्लानिंग अनिश्चितता में फंस गई हैं। इस फैसले ने सिर्फ शैक्षणिक संकट नहीं पैदा किया, बल्कि छात्रों और उनके परिवारों द्वारा तैयारी पर खर्च किए गए करीब 23,152.5 करोड़ रुपये को भी सवालों के घेरे में ला दिया है।

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यह अनुमान प्रति छात्र औसतन 1.05 लाख रुपये के खर्च के आधार पर लगाया गया है, जिसमें कोचिंग फीस, स्टडी मटेरियल, हॉस्टल, ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन, मॉक टेस्ट और यात्रा खर्च शामिल हैं।

मेडिकल सीट के लिए सालों की तैयारी

NEET-UG देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा है, जिसके जरिए MBBS, BDS और अन्य मेडिकल कोर्सों में दाखिला मिलता है। हर साल लाखों छात्र सीमित सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं।

कई छात्र 11वीं कक्षा से ही तैयारी शुरू कर देते हैं, जबकि बड़ी संख्या में विद्यार्थी बेहतर रैंक के लिए ड्रॉप लेकर दोबारा परीक्षा देते हैं। ऐसे में NEET सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि मीडिल क्लास परिवारों के लिए लंबे समय की आर्थिक और इमोशनल कमिटमेंट बन चुकी है।

कोटा से दिल्ली तक बना करोड़ों का कोचिंग इकोसिस्टम

कोटा, दिल्ली, हैदराबाद और चेन्नई जैसे शहरों में NEET की तैयारी के आसपास बड़ा कोचिंग इकोसिस्टम खड़ा हो चुका है। उद्योग अनुमान के मुताबिक बड़े संस्थानों में ऑफलाइन कोचिंग की फीस सालाना 1 लाख से 2.5 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। हॉस्टल और इंटीग्रेटेड स्कूलिंग वाले प्रीमियम प्रोग्राम में खर्च इससे भी ज्यादा हो सकता है।

ऑनलाइन कोचिंग ऑफलाइन की तुलना में सस्ती मानी जाती है, लेकिन वहां भी छात्रों को डिजिटल सब्सक्रिप्शन, डिवाइस, टेस्ट सीरीज और किताबों पर भारी रकम खर्च करनी पड़ती है।

हॉस्टल और रहने का खर्च बढ़ाता है बोझ

कोचिंग हब वाले शहरों में रहने का खर्च भी बड़ा दबाव बनता है। कोटा जैसे शहरों में हॉस्टल और PG का किराया ही 10 हजार से 20 हजार रुपये प्रति महीने तक पहुंच जाता है। इसके अलावा खाना और ट्रैवल खर्च अलग से जुड़ते हैं।

छात्रों में बढ़ा मानसिक दबाव

परीक्षा रद्द होने से छात्रों के बीच मानसिक तनाव भी बढ़ गया है। कई छात्र महीनों नहीं बल्कि सालों से तैयारी कर रहे थे। अब नई परीक्षा तारीख को लेकर अनिश्चितता, दोबारा तैयारी की थकान और रैंक पर असर की चिंता बढ़ती जा रही है।

सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीट पाने के लिए NEET को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में माना जाता है। सीमित सीटों के बीच कुछ अंकों का अंतर भी छात्रों की रैंक और दाखिले को पूरी तरह बदल देता है।

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फिर उठे परीक्षा सुरक्षा पर सवाल

ताजा विवाद के बाद National Testing Agency की परीक्षा सिस्टम पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं। छात्रों और अभिभावकों ने परीक्षा सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत करने की मांग तेज कर दी है।

उनका कहना है कि इतनी बड़ी परीक्षा में किसी भी गड़बड़ी का असर सीधे लाखों परिवारों पर पड़ता है, इसलिए भविष्य में कड़े सुरक्षा इंतजाम और निगरानी तंत्र जरूरी हैं।