प्याज ने रुलाया! 25 बोरी बेचकर भी किसान के हाथ आए '0' रुपये, उल्टा 1 रुपये चुकाने की आई नौबत
महाराष्ट्र की एक मंडी से सामने आई किसान की कहानी ने सबको चौंका दिया है। प्याज बेचने के बाद जो हुआ, उसने खेती और किसानों की हालत पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। पढ़िए पूरी खबर।

महाराष्ट्र में थोक प्याज कीमतों में आई भारी गिरावट ने एक बार फिर किसानों की बदहाल स्थिति को सामने ला दिया है। संभाजीनगर जिले के वरुडी गांव के 45 वर्षीय किसान प्रकाश गलाधर ने कृषि उपज बाजार समिति (APMC) में प्याज की 25 बोरियां बेचीं।
उन्हें कुल सिर्फ 1,262 रुपये मिले, यानी करीब 1 रुपये प्रति किलो का भाव मिला। लेकिन ढुलाई, तौल, भंडारण और अन्य खर्च कटने के बाद उनके हाथ कुछ नहीं बचा। उल्टा उनसे 1 रुपये और जमा करने को कहा गया।
गलाधर ने कहा कि बहुत कम दाम मिलने के बाद मैंने बाकी प्याज भारी मन से फेंक दी। उनका यह बिल अब किसानों की परेशानियों का प्रतीक बन गया है।
ओवरसप्लाई और गुणवत्ता पर उठे सवाल
व्यापारियों का कहना है कि बाजार में जरूरत से ज्यादा आवक और गुणवत्ता संबंधी समस्याओं की वजह से कीमतों में तेज गिरावट आई है। हालांकि बाजार अधिकारियों का मानना है कि मामला सिर्फ सप्लाई का नहीं बल्कि नीति स्तर की बड़ी समस्या का भी है।
Sambhajinagar APMC के चेयरमैन राधाकिसन पाथडे ने कहा कि सरकार की खरीद और निर्यात नीतियों में बदलाव की जरूरत है। उनके मुताबिक किसानों को कम से कम 1,200 रुपये प्रति 100 किलो का भाव मिलना चाहिए।
आंदोलन की चेतावनी
महाराष्ट्र प्याज किसान संघ ने सरकार से मांग की है कि पिछले चार से पांच महीनों में कम दाम पर प्याज बेचने वाले किसानों को तुरंत 1,500 रुपये प्रति क्विंटल की सहायता दी जाए। संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर राहत नहीं मिली तो राज्यभर में आंदोलन शुरू किया जाएगा।
महाराष्ट्र देश के सबसे बड़े प्याज उत्पादक राज्यों में शामिल है। ऐसे में कीमतों में लगातार गिरावट का असर सीधे लाखों किसानों की आय पर पड़ रहा है।

