रसोई से खड़ा किया करोड़ो का ब्रांड, बिहार की पूर्व टीचर ने ‘ठेकुआ’ से ऐसे बदली अपनी जिंदगी
बिहार के पारंपरिक ठेकुआ से शुरू हुआ एक छोटा सा काम आज करोड़ों के बिजनेस में बदल चुका है। कभी बच्चों को पढ़ाने वाली वीणा देवी ने अपने घर के किचन से यह सफर शुरू किया था। जानिए कैसे देसी स्वाद, मां की रेसिपी और एक छोटे आइडिया ने उनकी जिंदगी बदल दी।

In Short
- बिहार की पूर्व टीचर वीणा देवी ने घर के किचन से ठेकुआ बनाकर ₹15 करोड़ का Momsmade ब्रांड खड़ा किया।
- कंपनी अब रोजाना 1,000 से ज्यादा ऑर्डर पूरे करती है और करीब 50 महिलाएं इससे जुड़ी हैं।
- स्टार्टअप को करीब ₹1.5 करोड़ का इन्वेस्टमेंट मिला और कंपनी ने एक साल से कम समय में 15 गुना ग्रोथ की।
बिहार का पारंपरिक ठेकुआ अब सिर्फ त्योहारों और घरों तक सीमित नहीं रह गया है। एक पूर्व टीचर ने इसी देसी स्वाद को अपने बिजनेस की पहचान बनाकर ₹15 करोड़ की कंपनी खड़ी कर दी। छोटे से किचन से शुरू हुआ यह सफर आज देशभर में हजारों लोगों तक पहुंच रहा है।
लेकिन 15 साल तक बच्चों को पढ़ाने वाली वीणा देवी के बिजनेस की शुरुआत आखिर कैसे हुई?
15 साल तक बच्चों को पढ़ाया
वीणा देवी बिहार में करीब 15 साल तक बच्चों को पढ़ाती थीं। बाद में वह अपने बेटे समीर के साथ बेंगलुरु चली गईं। नई जगह पर खुद को एडजस्ट करना और खाली समय बिताना उनके लिए आसान नहीं था।
हमेशा काम में बिजी रहने वाली वीणा देवी को घर पर खाली बैठना पसंद नहीं था। तभी उनकी नजर सोसाइटी में घर का खाना बेचने वाली महिलाओं पर पड़ी, लेकिन यहीं से उन्हें अपना काम शुरू करने का आइडिया कैसे मिला?
सोसाइटी से मिला बिजनेस का आइडिया
वीणा देवी ने देखा कि उनकी हाउसिंग सोसाइटी की कई महिलाएं घर का बना खाना बेचकर अच्छी कमाई कर रही हैं। इसके बाद उन्होंने अपने किचन से नमकीन ठेकुआ, मीठा ठेकुआ और दालभूटे बनाकर बेचना शुरू किया।
बेटे समीर की सलाह पर उन्होंने छठ पूजा में बनने वाला गुड़ ठेकुआ भी तैयार किया। सोसाइटी के लोगों को इसका स्वाद पसंद आया और ऑर्डर तेजी से बढ़ने लगे, लेकिन शुरुआती ऑर्डर हजारों तक कैसे पहुंचे?
10 ऑर्डर से शुरू हुआ सफर
शुरुआत में वीणा देवी को हर दिन 10 से 50 ऑर्डर मिलते थे। कुछ समय बाद यह संख्या 100 के पार चली गई। धीरे-धीरे उनके काम ने Momsmade नाम के होमग्रोन फूड ब्रांड का रूप ले लिया।
आज कंपनी रोजाना 1,000 से ज्यादा ऑर्डर पूरे करती है। ठेकुआ के अलावा यहां निमकी और चना दाल जैसे पारंपरिक स्नैक्स भी बनाए जाते हैं। बढ़ते ऑर्डर संभालने में महिलाओं की टीम ने क्या भूमिका निभाई?
करीब 50 महिलाओं को मिला काम
Momsmade के साथ आज करीब 50 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। ये महिलाएं प्रोडक्ट बनाने से लेकर उनकी पैकिंग तक का काम संभालती हैं। टेक्नोलॉजी इन्वेस्टर आदित्य सिंह ने सोशल मीडिया पर कंपनी की कहानी शेयर करते हुए बताया कि उनकी फर्म ने स्टार्टअप में करीब ₹1.5 करोड़ का इन्वेस्टमेंट किया है।
उनके मुताबिक कंपनी ने एक साल से भी कम समय में 15 गुना ग्रोथ की, लेकिन ज्यादा प्रोडक्शन के बीच पुराने स्वाद को बचाना आसान नहीं था।
स्वाद एक जैसा रखना बनी बड़ी चुनौती
शुरुआत में वीणा देवी कम मात्रा में ठेकुआ बनाती थीं और आटा, गुड़ और घी का सही बैलेंस अपने अनुभव से तय करती थीं। जब प्रोडक्शन हजारों पीस तक पहुंचा, तो उन्होंने इसी अनुभव को एक फिक्स प्रोसेस में बदल दिया।
इससे हर ठेकुआ का स्वाद, क्रंच और सुनहरा रंग एक जैसा रखा जा सका। आखिर इस खास स्वाद की असली सीख उन्हें कहां से मिली?
मां की रेसिपी बनी ब्रांड की नींव
वीणा देवी ने ठेकुआ बनाने का पारंपरिक तरीका अपनी मां से सीखा था। घर में सालों से अपनाई जा रही वही रेसिपी और स्वाद उनके बिजनेस की नींव बने। आज कस्टमर तक पहुंचने से पहले हर बैच को अच्छी तरह चेक किया जाता है।
छोटे से होम किचन में शुरू हुआ Momsmade आज बिहार के पारंपरिक स्वाद को देशभर के घरों तक पहुंचाने वाला जाना-पहचाना ब्रांड बन चुका

