वीज़ा प्रोसेस होगा आसान
राष्ट्रपति मैक्रों ने भारतीय छात्रों की सराहना करते हुए यह भी कहा कि भारतीय छात्रों के लिए फ्रांस जल्द ही अपने वीजा नियमों को आसान बनाएगा, जिससे 2030 तक 30,000 भारतीय छात्र फ्रांस में आकर पढ़ सकें। फिलहाल हर साल अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए लगभग 10,000 भारतीय छात्र फ्रांस जाते हैं।
अब भारत और फ्रांस का लक्ष्य इस आंकड़े को 2030 तक 30,000 तक ले जाना है। वीजा नियमों को आसान बनाने के साथ-साथ फ्रांस में पढ़ाए जाने वाले कोर्स में नए इंग्लिश कोर्स भी जोड़े जाएंगे, जिससे भारतीय छात्रों को पढ़ाई में कोई परेशानी न हो।
साथ ही फ्रांस अपने प्रोसेस को बेहतर तरीके से स्ट्रीमलाइन करेगा, जिससे भारतीय छात्रों को फ्रांस में आकर पढ़ने में कोई परेशानी न हो। मैक्रों ने कहा कि भारतीय छात्रों को वर्ल्ड-क्लास टीचिंग, लीडिंग रिसर्च सेंटर्स और मजबूत इंटरडिसिप्लिनरी कोलैबोरेशन तक पहुंच मिलेगी।
शिक्षा, इनोवेशन और मोबिलिटी पे होगा फोकस
दोनों देशों के नेताओं ने शिक्षा के क्षेत्र में फ्रांस और भारत के संबंधों को और मजबूत बनाने को लेकर चर्चा की। साथ ही इंटरनेशनल क्लास इनिशिएटिव की भी सराहना की। इस प्रोग्राम के तहत भारतीय छात्रों की मदद की जाती है, जिसके जरिए वे फ्रांस की यूनिवर्सिटीज में एडमिशन ले सकते हैं।
इसके साथ ही दोनों ने मुंबई में बनने वाले नए हब का भी स्वागत किया। इस हब को ESSEC Business School और सेंट्रल सुपेलेक (CentraleSupélec) मिलकर ला रहे हैं।
दोनों यूनिवर्सिटीज एक नए एग्रीमेंट पर भी काम कर रही हैं, जिससे एक-दूसरे की यूनिवर्सिटी में मिलने वाले अकादमिक क्रेडिट्स को मान्यता मिलेगी।
दोनों देशों द्वारा जारी जॉइंट स्टेटमेंट में जल्द आने वाली वीजा-फ्री ट्रांजिट सुविधा का भी स्वागत किया गया। इस सुविधा का इस्तेमाल भारत के लोग फ्रांस के एयरपोर्ट्स पर कर सकेंगे। हालांकि यह सुविधा फिलहाल छह महीने के ट्रायल के लिए लाई जाएगी, जिसके बाद इसका रिव्यू होगा।
इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन 2026 के तहत भारत और फ्रांस कई अलग-अलग क्षेत्रों में साथ मिलकर काम करेंगे। दोनों देश विज्ञान, एआई, स्वास्थ्य, संस्कृति, डिजिटल साइंस, टेक्नोलॉजी और सस्टेनेबल डेवलपमेंट जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाएंगे। इसके साथ ही फ्रेंच कंपनी आईएनआरआईए (INRIA) और भारत का विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Science and Technology) मिलकर एक नया सेंटर बनाएंगे, जो डिजिटल साइंस और टेक्नोलॉजी पर काम करेगा।