90 हजार से 66 करोड़ रोजाना ट्रांजैक्शन तक पहुंचा UPI, अब अगले दशक में क्या होगा बड़ा बदलाव?
UPI ने डिजिटल पेमेंट की दुनिया में 10 साल पूरे कर लिए हैं। 90 हजार ट्रांजैक्शन से शुरू हुआ सफर अब रोजाना 66 करोड़ से ज्यादा लेनदेन तक पहुंच चुका है। एक दशक में UPI भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम का अहम हिस्सा बन गया है और 11 देशों तक विस्तार कर चुका है।

In Short
- UPI के 10 साल पूरे, पहले महीने के 90 हजार ट्रांजैक्शन से बढ़कर अब रोजाना 66 करोड़ से ज्यादा लेनदेन संभाल रहा है।
- 10 साल में बड़ा उछाल, ट्रांजैक्शन वॉल्यूम 1.78 करोड़ से बढ़कर 24,162 करोड़ और वैल्यू ₹0.07 लाख करोड़ से बढ़कर ₹314 लाख करोड़ पहुंची।
- दुनिया में UPI की पहचान, IMF ने इसे वॉल्यूम के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा रियल टाइम पेमेंट सिस्टम बताया, 11 देशों में मौजूदगी।
भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI ने 25 अगस्त 2026 को अपने ऑपरेशन के 10 साल पूरे कर लिए। शुरुआत में जहां UPI ने अपने पहले महीने में करीब 90 हजार ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए थे, वहीं अब यह रोजाना 66 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन संभाल रहा है। एक दशक में UPI ने देश में डिजिटल पेमेंट के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है।
10 साल में UPI ने बनाया नया रिकॉर्ड
UPI को 2016 में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की निगरानी में नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने लॉन्च किया था। यह प्लेटफॉर्म एक घरेलू पेमेंट टूल से आगे बढ़कर भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की रीढ़ बन चुका है और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए दुनिया में एक उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है।
पिछले 10 साल में UPI के ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में करीब 13 हजार गुना बढ़ोतरी हुई है। वित्त वर्ष 2016-17 में जहां सालाना ट्रांजैक्शन संख्या 1.78 करोड़ थी, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 24,162 करोड़ से ज्यादा हो गई। इस दौरान ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में 188 प्रतिशत की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट दर्ज की गई।
ट्रांजैक्शन वैल्यू में भी बड़ा उछाल
UPI के जरिए होने वाले लेनदेन की कुल वैल्यू में भी कई गुना बढ़ोतरी हुई है। वित्त वर्ष 2016-17 में जहां कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू करीब 0.07 लाख करोड़ रुपये थी, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर लगभग 314 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई। इस दौरान वैल्यू ग्रोथ की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट 155 प्रतिशत रही।
2026 में बने कई नए रिकॉर्ड
साल 2026 UPI के लिए कई अहम उपलब्धियों वाला रहा। मई 2026 में पहली बार मंथली ट्रांजैक्शन वॉल्यूम 2,300 करोड़ के पार पहुंचा और यह 2,320 करोड़ रहा। इसके बाद जुलाई 2026 में UPI ने नया रिकॉर्ड बनाया, जब 2,366 करोड़ ट्रांजैक्शन के साथ कुल वैल्यू 29.88 लाख करोड़ रुपये रही।
UPI से जुड़े बैंकों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। शुरुआती लॉन्च के समय 21 बैंक जुड़े थे, जो वित्त वर्ष 2016-17 में 44 थे। अब वित्त वर्ष 2025-26 तक यह संख्या बढ़कर 703 बैंकों तक पहुंच गई है। इसमें सरकारी, निजी, स्मॉल फाइनेंस, पेमेंट और कोऑपरेटिव बैंक शामिल हैं।
छोटे पेमेंट ने बढ़ाया UPI का इस्तेमाल
वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के मुताबिक, UPI पर ट्रांजैक्शन वॉल्यूम और वैल्यू में अंतर देखने को मिला। पर्सन-टू-मर्चेंट यानी P2M ट्रांजैक्शन कुल वॉल्यूम का 63 प्रतिशत हिस्सा है, लेकिन कुल वैल्यू में इसका हिस्सा 29 प्रतिशत है। 500 रुपये से कम के छोटे पेमेंट P2M वॉल्यूम का 86 प्रतिशत हिस्सा हैं।
वहीं पर्सन-टू-पर्सन यानी P2P ट्रांजैक्शन कुल वैल्यू का 71 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं, जबकि वॉल्यूम में इनकी हिस्सेदारी 37 प्रतिशत है।
दुनिया में भी UPI की पहचान
इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने UPI को ट्रांजैक्शन वॉल्यूम के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा रियल टाइम पेमेंट सिस्टम बताया है। साल 2025 में UPI ने दुनिया के करीब 49 प्रतिशत रियल टाइम पेमेंट ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए।
भारत के बाहर भी UPI का विस्तार हुआ है। फिलहाल यह संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, भूटान, श्रीलंका, नेपाल, सिंगापुर, मॉरीशस, कतर, कंबोडिया, ग्रीस और मालदीव समेत 11 देशों में काम कर रहा है।
सरकार ने UPI के अगले चरण के विकास के लिए पॉलिसी सपोर्ट, टेक्नोलॉजी में सुधार और ज्यादा यूजर्स व मर्चेंट्स को जोड़ने की प्रतिबद्धता दोहराई है।

