सोशल मीडिया पर सरकार की सख्ती! मार्च से जुलाई के बीच हटाने के लिए भेजे गए 2.98 लाख URLs
सोशल मीडिया पर गैरकानूनी कंटेंट को लेकर सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। मार्च से जुलाई 2026 के बीच करीब 2.98 लाख URLs को हटाने के लिए फ्लैग किया गया। इनमें ज्यादातर मामले राज्य सरकारों की ओर से भेजे गए थे। जानिए ऑनलाइन कंटेंट मॉनिटरिंग और टेकडाउन प्रक्रिया में क्या बदलाव हुआ।

In Short
- मार्च से जुलाई 2026 के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से हटाने के लिए 2.98 लाख URLs फ्लैग किए गए।
- इनमें 82% से ज्यादा कंटेंट राज्य सरकारों की ओर से चिन्हित किया गया।
- नए नियमों के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को टेकडाउन आदेश पर कार्रवाई के लिए अब 3 घंटे का समय मिलेगा।
भारत सरकार ने मार्च से जुलाई 2026 के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से करीब 2.98 लाख URLs हटाने के लिए फ्लैग किए हैं। बिजनेस टुडे ने PIB Fact Check के हवाले से बताया कि, इनमें से 82 प्रतिशत से ज्यादा कंटेंट को राज्य सरकारों ने चिन्हित किया था। राज्य सरकारों की ओर से करीब 2.44 लाख URLs को हटाने के लिए भेजा गया।
बाकी कंटेंट को दूसरी सरकारी एजेंसियों ने फ्लैग किया, जिनमें इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर यानी I4C भी शामिल है। ये मामले साइबर क्राइम और अन्य गैरकानूनी ऑनलाइन गतिविधियों से जुड़े थे।
सरकार ने ऑनलाइन कंटेंट हटाने की समय सीमा घटाई
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के लिए नए नियमों के तहत सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों को कार्रवाई के लिए मिलने वाला समय कम कर दिया है। पहले जहां सरकारी आदेश के बाद कंटेंट हटाने के लिए 36 घंटे का समय मिलता था, अब इसे घटाकर 3 घंटे कर दिया गया है। इस बदलाव के बाद यह सवाल भी उठ रहे हैं कि इतनी कम समय सीमा में कंपनियां कंटेंट की जांच और कार्रवाई कैसे करेंगी।
भारत में सोशल मीडिया कंटेंट की संख्या बहुत ज्यादा
बिजनेस टुडे ने PIB Fact Check के हवाले से बताया कि Meta के भारत में करीब 60 करोड़ यूजर्स हैं। इतनी बड़ी संख्या में यूजर्स होने की वजह से देश में सोशल मीडिया पर हर समय बड़ी मात्रा में कंटेंट तैयार होता रहता है।
सरकार के मुताबिक, हर 68 सेकंड में करीब 78,703 कंटेंट पीस तैयार होते हैं। ऐसे में हर पोस्ट या कंटेंट की मैन्युअल जांच करना मुश्किल हो जाता है सरकार ने कहा कि साइबर स्पेस में गैरकानूनी गतिविधियों को रोकने के लिए राज्य और सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी बनी रहती है।
I4C ने किन मामलों में किया ज्यादा कंटेंट फ्लैग?
पिछले दो साल में I4C की ओर से फ्लैग किए गए ज्यादातर गैरकानूनी कंटेंट में ट्रांसनेशनल फाइनेंशियल फ्रॉड, बच्चों से जुड़ी यौन शोषण सामग्री और महिलाओं व बच्चों के खिलाफ अपराध शामिल रहे हैं।
कंटेंट फ्लैग करने की प्रक्रिया सह्योग पोर्टल के जरिए होती है। इस पोर्टल की मदद से राज्य सरकारें और केंद्रीय मंत्रालय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को गैरकानूनी कंटेंट की जानकारी भेजते हैं।
सरकार के आदेश पर ही हटाया जाता है कंटेंट
सोशल मीडिया कंपनियां किसी भी व्यक्ति के कहने पर कंटेंट हटाने के लिए बाध्य नहीं होती हैं। उन्हें केवल अधिकृत सरकारी अधिकारियों की ओर से भेजे गए टेकडाउन नोटिस पर कार्रवाई करनी होती है।
सह्योग पोर्टल के जरिए केवल संबंधित मंत्रालय या राज्य सरकार ही कंटेंट हटाने का अनुरोध भेज सकती है। इसके अलावा इन नोटिस की समय-समय पर समीक्षा भी की जाती है।

