नए टैक्स बिल में इलेक्ट्रॉनिक्स से डेटा सेंटर तक राहत, जानें किन नियमों में हुआ बदलाव
टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (अमेंडमेंट) बिल, 2026 में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और डेटा सेंटर सेक्टर के लिए कई बदलाव किए गए हैं। बिल का फोकस टैक्स नियमों में ज्यादा स्पष्टता और काम करने की शर्तों में ढील देकर लंबे समय के विदेशी निवेश को आकर्षित करने पर है।

In Short
- विदेशी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों के लिए इनकम टैक्स छूट 31 मार्च 2041 तक बढ़ाई गई है।
- कस्टम-बॉन्डेड वेयरहाउस में कंपोनेंट रखने वाली विदेशी कंपनियों को 15 साल की टैक्स छूट मिलेगी।
- डेटा सेंटर के लिए मंजूरी और नोटिफिकेशन की कुछ जरूरतें हटाई गई हैं और लीज इंफ्रास्ट्रक्चर की भी इजाजत दी गई है।
Tax Amendment Bill 2026: लोकसभा से पास टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (अमेंडमेंट) बिल, 2026 में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और डेटा सेंटर सेक्टर पर खास ध्यान दिया गया है। यह कानून 5 जून के अध्यादेश की जगह लेता है। इसका मकसद टैक्स से जुड़े नियमों को ज्यादा साफ बनाना है, ताकि ग्लोबल कंपनियां भारत में लंबे समय के लिए निवेश करने का फैसला आसानी से कर सकें।
इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों को लंबे समय की टैक्स राहत
बिल के तहत उन विदेशी कंपनियों के लिए इनकम टैक्स छूट 31 मार्च 2041 तक बढ़ाई गई है, जो खास इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने के लिए भारतीय कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स की मदद लेती हैं।
इसके अलावा, जो विदेशी कंपनियां भारतीय कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स को सप्लाई करने के लिए कस्टम-बॉन्डेड वेयरहाउस में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स रखती हैं, उन्हें भी 15 साल की टैक्स छूट दी गई है।
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समरकूल होम अप्लायंसेज लिमिटेड के सेल्स और मार्केटिंग डायरेक्टर आशुतोष गुप्ता के मुताबिक, इस बदलाव से लंबे समय के निवेश से जुड़े फैसले लेने में कंपनियों को ज्यादा साफ तस्वीर मिल सकती है। इससे प्रोडक्शन क्षमता बढ़ाने, ज्यादा कंपोनेंट भारत में तैयार करने और सप्लायर नेटवर्क मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
टैक्स नियमों को लेकर बढ़ सकती है स्पष्टता
लेसोल ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर नमन शाह के मुताबिक, बढ़ाए गए इंसेंटिव्स से विदेशी निवेशकों और सप्लाई-चेन पार्टनर्स की टैक्स व्यवस्था को लेकर चिंता कम हो सकती है।
उनका कहना है कि इससे ग्लोबल टेक्नोलॉजी कंपनियों और भारतीय प्रोड्यूसर्स के बीच ज्यादा सहयोग हो सकता है। इससे सप्लाई चेन मजबूत करने, कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ाने और प्रोडक्शन बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
डेटा सेंटर के लिए भी नियम आसान
डेटा सेंटर भी इस बिल का एक बड़ा हिस्सा हैं। बिल में भारतीय डेटा सेंटर का इस्तेमाल करने वाली विदेशी कंपनियों के लिए मंजूरी और नोटिफिकेशन से जुड़ी कुछ जरूरतों को हटाया गया है।
इसके साथ डेटा सेंटर कंपनियां खुद का इंफ्रास्ट्रक्चर रखने के बजाय लीज पर लिए गए इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए भी काम कर सकेंगी।
यूथो क्लाउड के फाउंडर और सीईओ मनोज ढांडा के मुताबिक, इससे निवेश बढ़ सकता है और भारत में हाइपरस्केल डेटा सेंटर क्षमता तेजी से बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर कंट्रोल भी अहम
मनोज ढांडा ने यह भी कहा कि भारत के लिए सिर्फ डेटा सेंटर की फिजिकल क्षमता बढ़ाना ही काफी नहीं है। अहम डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का मालिकाना हक और उस पर कंट्रोल भी जरूरी है। उनके मुताबिक कंप्यूट, स्टोरेज, नेटवर्किंग और वर्चुअलाइजेशन सहित पूरे क्लाउड स्टैक पर कंट्रोल डिजिटल संप्रभुता के लिए जरूरी होगा।
कुल मिलाकर, इन बदलावों का मकसद टैक्स से जुड़ी स्पष्टता और नियमों में ढील देकर ग्लोबल कैपिटल को आकर्षित करना है। अब असली परीक्षा यह होगी कि ये बदलाव वास्तविक निवेश, ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, मजबूत लोकल सप्लाई चेन और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर घरेलू कंट्रोल में कितना बदल पाते हैं।

