Meta की मुश्किलें बढ़ीं, डीपफेक और हानिकारक कंटेंट पर सरकार ने मांगा जवाब, जानें क्या है पूरा मामला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीडियो पोस्ट विवाद के बाद मेटा और भारत सरकार के बीच बातचीत तेज हो गई है। डीपफेक, हानिकारक एआई कंटेंट और सीएसएएम जैसे मुद्दों पर सरकार ने कंपनी से ठोस कदम मांगे हैं। अब अगली बैठक में देखा जाएगा कि मेटा ने इन चिंताओं पर कितना काम किया है।

In Short
- पीएम मोदी के पोस्ट विवाद के बाद मेटा और सरकार के बीच बढ़ी सख्ती
- डीपफेक, सीएसएएम और बिना सही लेबल वाले एआई कंटेंट पर उठे सवाल
- अगली बैठक में मेटा की कार्रवाई और प्रगति का होगा आकलन
Meta India government meeting: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीडियो पोस्ट को फेसबुक पर कुछ समय के लिए सीमित किए जाने के बाद मेटा और भारत सरकार के बीच बातचीत तेज हो गई है। पिछले हफ्ते मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने इस मामले में भारत सरकार से माफी मांगी थी। इसके बाद लगातार तीन दिन तक सरकार और मेटा की ग्लोबल टीम के बीच बैठकें हुईं। अब आईटी मंत्रालय इस हफ्ते एक बार फिर मेटा की टीम के साथ बैठक करने की तैयारी में है।
इस हफ्ते फिर होगी मेटा के साथ बैठक
बिजनेस टुडे ने PTI के हवाले से बताया कि आईटी मंत्रालय के अधिकारी इस हफ्ते मेटा की टीम से दोबारा मिल सकते हैं। इस बैठक में यह देखा जाएगा कि सरकार की ओर से उठाए गए अहम मुद्दों पर कंपनी ने अब तक क्या कदम उठाए हैं।
इन मुद्दों में हानिकारक कंटेंट का दोबारा सामने आना और चाइल्ड सेक्सुअल अब्यूज मटेरियल यानी सीएसएएम को संभालने का तरीका शामिल है।
डीपफेक और एआई कंटेंट पर मांगी गई ठोस कार्रवाई
शुक्रवार को हुई टेक्निकल बातचीत में मेटा ने डीपफेक, सीएसएएम और ऐसे सिंथेटिक कंटेंट को रोकने की अपनी योजना के बारे में जानकारी दी, जिन पर सही तरीके से लेबल नहीं लगाया गया है।
सरकार ने मेटा से इन मामलों में कुछ खास कदम उठाने और उसके नतीजों की जानकारी देने को कहा है।
अश्विनी वैष्णव ने भी किए थे सवाल
पिछले हफ्ते मेटा की ग्लोबल टीम का नेतृत्व ग्लोबल अफेयर्स हेड जोएल कपलान ने किया था। बुधवार और गुरुवार को आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मेटा की टीम से कंटेंट रिकमेंडेशन एल्गोरिदम और भारतीय कानूनों के पालन को लेकर सवाल किए थे।
इसके बाद शुक्रवार को मेटा की टीम ने सरकार की चिंताओं पर जवाब दिया और उनसे निपटने के लिए अपनी योजना भी साझा की।
मेटा ने माना कि कुछ गंभीर मुद्दे हैं
मेटा ने यह भी माना कि कुछ “गंभीर मुद्दे” मौजूद हैं। कंपनी ने केंद्र सरकार को भरोसा दिया कि इन पर लगातार कार्रवाई की जाएगी।
इसके साथ ही मेटा ने यह भी बताया कि उसका कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम कैसे काम करता है और इन समस्याओं से निपटने के लिए किन समाधानों पर काम किया जा सकता है।
हानिकारक एआई कंटेंट के दोबारा फैलने पर चिंता
सरकार ने इस बात पर चिंता जताई है कि मेटा की कोशिशों के बावजूद एआई से बना हानिकारक कंटेंट दोबारा सामने आ रहा है और लगातार फैल रहा है। एआई कंटेंट पर सही लेबलिंग को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं, जबकि आईटी नियमों के तहत सिंथेटिक कंटेंट की पहचान और लेबलिंग जरूरी है।
सरकार अब कंटेंट मॉडरेशन में ज्यादा मानवीय निगरानी के साथ भारतीय भाषाओं, स्थानीय संस्कृति और संदर्भ की बेहतर समझ पर भी जोर दे रही है। आने वाली बैठक में यह देखा जाएगा कि पिछले हफ्ते उठाए गए मुद्दों पर मेटा ने अब तक कितनी प्रगति की है।

