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भारत में बच्चों के Social Media पर लगाम की तैयारी, लेकिन सामने खड़ी है एक बड़ी चुनौती

भारत में 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के नियम बदल सकते हैं। सरकार IT intermediary rules में बदलाव की योजना बना रही है, लेकिन इसे लागू करने का रास्ता आसान नहीं है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक age verification से लेकर privacy तक कई बड़ी चुनौतियां सामने आ सकती हैं। जानिए दूसरे देशों का अनुभव क्या बताता है।

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नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के अपने जोखिम हो सकते हैं, ऐसा एक्सपर्ट्स का कहना है।
नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के अपने जोखिम हो सकते हैं, ऐसा एक्सपर्ट्स का कहना है।

In Short

  • भारत में 18 साल से कम उम्र वालों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाने की चर्चा तेज है।
  • नए नियम लागू हुए तो यूजर्स की उम्र verify करना बड़ी चुनौती बन सकता है।
  • - एक्सपर्ट्स ने age verification के साथ privacy और sensitive data के जोखिमों की ओर ध्यान दिलाया है।

भारत में 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लग सकती है। हाल में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा कि वह IT Intermediary Rules में बदलाव करने की योजना बना रही है। इन बदलावों के बाद 18 साल से कम उम्र के यूजर्स के सोशल मीडिया अकाउंट बनाने पर रोक लग सकती है। हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसा नियम लागू करना आसान नहीं होगा और इसके साथ privacy से जुड़े कई खतरे भी सामने आ सकते हैं।

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दूसरे देशों में भी लगा है बैन

भारत ऐसा कदम उठाने वाला पहला देश नहीं होगा। ऑस्ट्रेलिया ने दिसंबर 2025 में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लागू किया था। इसके तहत Instagram, X, Facebook और YouTube जैसे प्लेटफॉर्म्स के कम उम्र के यूजर्स के अकाउंट्स को ब्लॉक करने के निर्देश दिए गए।

इसके बाद इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देशों ने भी इसी तरह के प्रतिबंध लागू किए, जबकि UK समेत कुछ देशों में ऐसे नियम आने वाले हैं।

क्यों उठ रही है Social Media Ban की मांग?

Economic Survey 2025-26 में 15 से 24 साल के युवाओं में सोशल मीडिया की लत को लेकर चिंता जताई गई थी। सर्वे के मुताबिक सोशल मीडिया addiction का संबंध anxiety, depression, low self-esteem और cyberbullying stress से देखा गया।

Cybersecurity expert Mukul Kumar के मुताबिक सोशल मीडिया बच्चों को ध्यान में रखकर नहीं बनाया गया था। उनका कहना है कि बच्चे ऐसे सिस्टम का सबसे कमजोर हिस्सा हैं, जिन्हें engagement बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है।

भारत में नियम कैसे लागू हो सकता है?

फिलहाल भारत में ऐसा कोई कानून नहीं है, जो नाबालिगों को सीधे सोशल मीडिया इस्तेमाल करने से रोकता हो। हालांकि Digital Personal Data Protection यानी DPDP Act 2023 के तहत 18 साल से कम उम्र के यूजर का personal data process करने से पहले parental consent जरूरी होगा। यह कानून 13 मई 2027 से लागू होगा।

IT Rules में बदलाव होने पर सोशल मीडिया कंपनियों को यूजर्स की उम्र verify करनी पड़ सकती है। यहीं सबसे बड़ी चुनौती शुरू होती है।

Cybersecurity firm Mitigata के co-founder Sarthak Dubey के मुताबिक असली age verification में पैसा और resources लगते हैं। कमजोर verification होने पर बच्चे fake age, दूसरे लोगों के accounts या दूसरे तरीकों से restrictions को bypass कर सकते हैं।

दूसरे देशों में भी सामने आई चुनौती

ऑस्ट्रेलिया ने लाखों minors के accounts हटाए, लेकिन उसके internet regulator eSafety Commissioner की एक study में सामने आया कि प्रतिबंध के तीन महीने बाद भी 10 में से 8 बच्चे सोशल मीडिया इस्तेमाल कर रहे थे।

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इंडोनेशिया में भी करीब 50 लाख underage accounts हटाए गए, लेकिन कई बच्चों ने गलत birthdate या adults की identification का इस्तेमाल जारी रखा और accounts का इस्तेमाल जारी रखा।

भारत के लिए चुनौती और बड़ी हो सकती है। Mukul Kumar के मुताबिक यहां 18 साल से कम उम्र के सोशल मीडिया यूजर्स की संख्या करोड़ों में है और इतने बड़े स्तर पर किसी देश ने ऐसा enforcement नहीं किया है।

Privacy को लेकर क्या खतरा है?

Age verification के लिए ID या biometric data की जरूरत पड़ सकती है और यही privacy का सवाल खड़ा होता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि minors की identity से जुड़ा database hackers और scammers के लिए बड़ा target बन सकता है।

Sarthak Dubey के मुताबिक DigiLocker एक विकल्प हो सकता है, जिसमें प्लेटफॉर्म को पूरा document दिए बिना सिर्फ यह verify किया जा सके कि यूजर 18 साल से ऊपर है या नहीं।

Mukul Kumar का मानना है कि बेहतर सिस्टम ऐसा होना चाहिए जो सिर्फ एक बार उम्र verify करे और sensitive information store न करे। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को केवल ‘yes’ या ‘no’ में उम्र की पुष्टि मिले, Aadhaar number या दूसरी identity details नहीं। उनके मुताबिक verification की जिम्मेदारी सरकार के पास रहना ज्यादा बेहतर हो सकता है, क्योंकि platforms कम लागत वाले और privacy के लिहाज से ज्यादा जोखिम वाले तरीकों को चुन सकते हैं।

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