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RBI के आंकड़ों ने चौंकाया! Bank Fraud के मामलों ने तोड़े रिकॉर्ड

इस साल के पहले 6 महीनों में यानी अप्रैल-सितंबर के दौरान बैंकों में फ्रॉड के मामलों में काफी इजाफा हुआ है। RBI के ताजा आंकड़ों के मुताबिक मौजूदा हालात चिंता की वजह बन गए हैं। RBI की रिपोर्ट "ट्रेंड एंड प्रोग्रेस ऑफ बैंकिंग इन इंडिया 2023-24 में बैंकों के प्रदर्शन की विस्तार से जानकारी दी गई है।

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इस साल के पहले 6 महीनों में यानी अप्रैल-सितंबर के दौरान बैंकों में फ्रॉड के मामलों में काफी इजाफा हुआ है। RBI के ताजा आंकड़ों के मुताबिक मौजूदा हालात चिंता की वजह बन गए हैं। RBI की रिपोर्ट "ट्रेंड एंड प्रोग्रेस ऑफ बैंकिंग इन इंडिया 2023-24 में बैंकों के प्रदर्शन की विस्तार से जानकारी दी गई है।

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RBI की तरफ से जो जानकारी मिली है उसके हिसाब से 2024-25 की पहली छमाही में 18 हजार 461 फ्रॉड के मामले सामने आए हैं जो पिछले साल के 14 हजार 480 के मुकाबले काफी ज्यादा हैं। इन फ्रॉड में कुल रकम भी 2 हजार 623 करोड़ रुपये के मुकाबले आठ गुना बढ़कर 21 हजार 367 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

कमर्शियल बैंकों, सहकारी बैंकों और NBFCs का डेटा शामिल

इसमें कमर्शियल बैंकों, सहकारी बैंकों और NBFCs का डेटा शामिल है। RBI के मुताबिक, फ्रॉड बैंकिंग सिस्टम के लिए कई तरह की समस्याएं पैदा करते हैं जिनमें प्रतिष्ठान से जुड़े जोखिम, कामकाज से जुड़े खतरे, ग्राहकों का भरोसा खोने का डर शामिल है।

जो आखिरकार वित्तीय स्थिरता पर असर डालता है। इसके साथ ही इंटरनेट और कार्ड फ्रॉड के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। RBI के आंकड़ों के मुताबिक कुल फ्रॉड मामलों में 44.7 फीसदी रकम  और 85.3 परसेंट मामलों का संबंध इंटरनेट और कार्ड फ्रॉड से है।

इससे साफ है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फ्रॉड का खतरा बढ़ गया है। इसके अलावा, 2023-24 में निजी बैंकों ने कुल फ्रॉड मामलों का 67.1 फीसदी हिस्सा रिपोर्ट किया है। हालांकि, सरकारी बैंकों में रकम के हिसाब से फ्रॉड के मामले ज्यादा रहे हैं। खासकर कार्ड और इंटरनेट फ्रॉड के मामलों में सार्वजनिक बैंकों का हिस्सा सबसे ज्यादा था। RBI की रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि पिछले साल के मुकाबले 2023-24 में वित्तीय संस्थाओं पर जुर्माना लगाने के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। 

इस दौरान जुर्माने की रकम भी 86.1 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जो पिछले साल के मुकाबले दोगुनी से ज्यादा है। रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी और निजी बैंकों पर सबसे ज्यादा जुर्माना लगाया गया है जबकि सहकारी बैंकों पर कम जुर्माना हुआ है, लेकिन इनपर जुर्माना लगाने के मामले बढ़े हैं। 

RBI ने ये भी बताया कि कई डिजिटल फ्रॉड ग्राहकों पर सोशल इंजीनियरिंग हमलों की वजह से होते हैं। लेकिन इसके साथ-साथ फ्रॉड को अंजाम देने के लिए म्यूल बैंक अकाउंट्स का भी इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इस हालात से बैंक ना केवल वित्तीय और सामान्य कामकाज से जुड़े जोखिमों का सामना कर रहे हैं बल्कि उनकी साख भी खतरे में है।

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RBI ने ये भी कहा कि बैंकों को अपनी ग्राहक ऑनबोर्डिंग और लेन-देन निगरानी सिस्टम को मजबूत करने की जरूरत है जिससे फ्रॉड की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके और इसे रोका जा सके। ये हालात बैंकों और वित्तीय संस्थाओं के लिए बड़ी चुनौती हैं क्योंकि अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो फ्रॉड बैंकिंग सिस्टम को ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके लिए बैंकों को अपने सुरक्षा सिस्टम और प्रोसेस में सुधार करना होगा जिससे इस तरह के फ्रॉड को रोका जा सके।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल सूचना के उद्देश्यों के लिए है और इसे निवेश सलाह के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए। निवेश निर्णय लेने से पहले एक वित्तीय सलाहकार से परामर्श करने की सिफारिश की जाती है।

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।