भारत का इकलौता राज्य जहां पात्र लोगों को नहीं देना पड़ता इनकम टैक्स ,आखिर क्या है इसके पीछे की वजह?
भारत में हर साल करोड़ों लोग अपनी कमाई पर इनकम टैक्स भरते हैं, लेकिन एक राज्य के पात्र स्थानीय लोगों के लिए नियम बिल्कुल अलग हैं। आखिर इस राज्य को यह खास छूट क्यों मिली और क्या वहां रहने वाला हर व्यक्ति टैक्स से बच सकता है? जानिए इसके पीछे की पूरी कहानी।

In Short
- सिक्किम के कानून के तहत मान्यता प्राप्त लोगों को इनकम टैक्स एक्ट की धारा 10(26AAA) के तहत टैक्स छूट मिलती है।
- यह छूट सिक्किम के भारत में विलय और संविधान के आर्टिकल 371F से जुड़ी खास कानूनी व्यवस्था का हिस्सा है।
- सिक्किम में रहने वाला हर व्यक्ति टैक्स फ्री नहीं है, केवल कानून के तहत मान्यता प्राप्त सिक्किमी लोगों को ही इसका फायदा मिलता है।
Income Tax: देशभर में इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR भरने का समय आते ही लोग अपनी कमाई और टैक्स का हिसाब लगाने लगते हैं। हालांकि सिक्किम में इनकम टैक्स से जुड़े नियम देश के बाकी राज्यों से कुछ अलग हैं।
इसके पीछे कोई हाल में लिया गया फैसला नहीं, बल्कि राज्य के भारत में शामिल होने से जुड़ी पुरानी कहानी है। तो सबसे पहले जानते हैं कि सिक्किम में टैक्स छूट का फायदा किन लोगों को मिलता है?
सिक्किम में किन लोगों को मिलती है टैक्स छूट?
सिक्किम में रहने वाला हर व्यक्ति इनकम टैक्स से बाहर नहीं है। यह छूट केवल उन लोगों को मिलती है, जिन्हें कानून के मुताबिक ‘सिक्किमी’ माना गया है। ऐसे लोगों की इनकम पर इनकम टैक्स नहीं लगता।
अगर कोई व्यक्ति दूसरे राज्य से जाकर सिक्किम में रहने लगा है, तो सिर्फ वहां का निवासी बनने से उसे यह फायदा नहीं मिलेगा। उसके लिए सामान्य इनकम टैक्स के नियम लागू हो सकते हैं। लेकिन सिक्किम में टैक्स के नियम बाकी राज्यों से अलग क्यों हैं? इसका जवाब राज्य के पुराने इतिहास में मिलता है।
भारत में शामिल होने से पहले क्या था सिक्किम?
सिक्किम शुरू से भारत का हिस्सा नहीं था। पहले यह एक अलग किंगडम था, जिसे ‘किंगडम ऑफ सिक्किम’ कहा जाता था। साल 1975 में रेफरेंडम के बाद सिक्किम भारत में शामिल हुआ और देश का 22वां राज्य बना।
भारत में शामिल होते समय यह जरूरी था कि वहां पहले से रहने वाले लोगों के पुराने नियम और उन्हें मिली सुविधाएं अचानक खत्म न हों। इसी वजह से संविधान में सिक्किम के लिए एक खास नियम जोड़ा गया।
क्यों जोड़ा गया आर्टिकल 371F?
सिक्किम के भारत में शामिल होने के बाद संविधान में आर्टिकल 371F जोड़ा गया। इसका मकसद वहां के पुराने कानूनों, लोगों को पहले से मिली सुविधाओं और राज्य की पुरानी व्यवस्था को जारी रखना था।
इस खास नियम के तहत सिक्किम को कुछ मामलों में अलग कानूनी और सरकारी व्यवस्था रखने की छूट मिली। इसी पुराने समझौते से आगे चलकर इनकम टैक्स में मिलने वाली छूट का रास्ता भी बना।
कौन-सा सेक्शन देता है इनकम टैक्स से छूट?
इनकम टैक्स एक्ट 1961 में बाद में सेक्शन 10(26AAA) जोड़ा गया। इस सेक्शन के तहत कानून में सिक्किमी माने गए लोगों की इनकम को इनकम टैक्स से छूट दी गई है।
यह नियम सिक्किम के भारत में शामिल होने के समय वहां के लोगों को दी गई सुविधाओं को बनाए रखने के लिए लाया गया था। हालांकि इस छूट के लिए कानून में तय शर्तों को पूरा करना जरूरी है।
क्या सिक्किम में रहने वाला हर व्यक्ति टैक्स फ्री है?
नहीं, सिक्किम में घर होने या वहां रहने भर से कोई व्यक्ति टैक्स फ्री नहीं हो जाता। अगर वह कानून के मुताबिक सिक्किमी कैटेगरी में नहीं आता, तो उसे सामान्य इनकम टैक्स नियमों का पालन करना होगा।
ऐसे व्यक्ति को अपनी कमाई के हिसाब से टैक्स देना और ITR भरना पड़ सकता है। इसलिए यह छूट पूरे राज्य में रहने वाले हर व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि कानून में सिक्किमी माने गए लोगों के लिए है।
नई स्कीम नहीं, पुराना कानूनी नियम
सिक्किम में मिलने वाली यह टैक्स छूट कोई नई सरकारी स्कीम नहीं है। यह सिक्किम के भारत में शामिल होने के समय तय किए गए पुराने कानूनी नियमों का हिस्सा है। इसी वजह से सिक्किम देश का इकलौता राज्य माना जाता है, जहां कानून में सिक्किमी माने गए लोगों को इनकम टैक्स से खास छूट मिलती है।

