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घर खरीदने से पहले मोहल्ले का ‘टेस्ट ड्राइव’ कर रहे भारतीय, जानें क्यों बदल रही है Home Buying की सोच

घर खरीदने का फैसला अब सिर्फ बजट और फ्लैट की कीमत तक सीमित नहीं रह गया है। भारतीय खरीदार प्रॉपर्टी लेने से पहले उसके आसपास के इलाके को भी परख रहे हैं। ट्रैफिक, कनेक्टिविटी, स्कूल, अस्पताल और मानसून में जलभराव जैसी चीजें अब घर खरीदने के फैसले में अहम भूमिका निभा रही हैं।

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AI Generated Image

घर खरीदना पहले अक्सर एक आसान सवाल से शुरू होता था- “मैं कितना महंगा घर खरीद सकता हूं?” लेकिन अब यह सोच बदल रही है। आज कई खरीदार यह जानना चाहते हैं कि “मैं वास्तव में कहां रहना चाहता हूं?” BASIC Home Loan के CEO अतुल मोंगा के मुताबिक, भारतीयों के घर खरीदने का तरीका धीरे-धीरे बदल रहा है। अब सिर्फ घर या फ्लैट की कीमत और होम लोन ही मायने नहीं रखते, बल्कि घर के आसपास का पूरा माहौल भी फैसला लेने में अहम भूमिका निभा रहा है।

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घर के साथ अब पूरा मोहल्ला भी जरूरी

आज के खरीदार घर देखने के साथ-साथ उसके आसपास के इलाके को भी अच्छी तरह समझने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए वे अलग-अलग समय पर उस इलाके में जाते हैं। वे देखते हैं कि ऑफिस तक पहुंचने में कितना समय लगेगा, ट्रैफिक की स्थिति कैसी है और पब्लिक ट्रांसपोर्ट या दूसरी कनेक्टिविटी कितनी बेहतर है।

इसके अलावा स्कूल, अस्पताल, बाजार, रिटेल और सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है। यानी खरीदार अब सिर्फ यह नहीं देख रहा कि घर कैसा है, बल्कि यह भी देख रहा है कि वहां रहकर उसकी रोजमर्रा की जिंदगी कैसी होगी।

बारिश में इलाके का असली टेस्ट

अतुल मोंगा के मुताबिक, मानसून किसी इलाके को परखने का एक अच्छा उदाहरण है। बारिश के दौरान जलभराव, ड्रेनेज, सीलन और सड़कों की स्थिति ऐसी कई बातें सामने ला सकती हैं, जो किसी प्रॉपर्टी के ब्रोशर में नहीं दिखाई देतीं।

इसके साथ ही बढ़ते जलवायु जोखिम भी अब अहम हो रहे हैं। बाढ़, हीटवेव और पानी की कमी जैसी समस्याएं बढ़ने के साथ भविष्य में खरीदार यह भी देख सकते हैं कि कोई इलाका इन चुनौतियों से निपटने के लिए कितना तैयार है।

Millennials और Gen Z बदल रहे हैं सोच

यह बदलाव खास तौर पर Millennials और Gen Z के बीच देखने को मिल रहा है। BASIC Home Loan के 7,400 से ज्यादा होमबायर्स पर किए गए कंज्यूमर इनसाइट्स स्टडी के अनुसार, इन दोनों पीढ़ियों की हिस्सेदारी लगभग 90-95% होम परचेज में है।

इनके लिए अफोर्डेबिलिटी का मतलब भी बदल रहा है। सबसे सस्ता घर हमेशा सबसे बेहतर विकल्प नहीं होता। अगर थोड़ी ज्यादा कीमत देकर बेहतर इलाका, छोटा कम्यूट और बेहतर लाइफस्टाइल मिलती है, तो खरीदार उसके लिए ज्यादा खर्च करने को तैयार हो सकते हैं।

शहरों की ग्रोथ से बढ़ेगी अहमियत

भारत में तेजी से हो रहे शहरीकरण के कारण यह बदलाव और महत्वपूर्ण हो जाता है। 2025 की World Bank रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक भारत में पैदा होने वाली नई नौकरियों में 70% शहरों से आने की उम्मीद है। वहीं, 2050 तक भारत की शहरी आबादी 951 मिलियन तक पहुंच सकती है और 2070 तक 144 मिलियन से ज्यादा नए घरों की जरूरत हो सकती है।

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ऐसे में ड्रेनेज, पानी की उपलब्धता, ऊर्जा दक्षता, ट्रांसपोर्ट, हरित क्षेत्र और पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर किसी इलाके की रहने लायक क्षमता और उसकी वैल्यू तय करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे।

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।