FD पर 8 फीसदी से ज्यादा ब्याज, निवेश से पहले जान लें ये जरूरी बात
स्मॉल फाइनेंस बैंक चुनिंदा FD पर 8.10 फीसदी तक ब्याज दे रहे हैं, जो बड़े बैंकों से ज्यादा है। लेकिन ज्यादा रिटर्न के साथ DICGC की 5 लाख रुपये की बीमा सीमा, टैक्स और बैंक से जुड़े जोखिम को समझना भी जरूरी है।

In Short
- सूर्योदय और उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक चुनिंदा FD पर 8.10 फीसदी तक ब्याज दे रहे हैं
- DICGC सुरक्षा प्रति जमाकर्ता प्रति बैंक 5 लाख रुपये तक सीमित है
- FD ब्याज टैक्सेबल इनकम में जुड़ता है, इसलिए टैक्स के बाद वास्तविक रिटर्न कम हो सकता है
स्मॉल फाइनेंस बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD पर बड़े बैंकों के मुकाबले ज्यादा ब्याज दे रहे हैं। वैल्यू रिसर्च के मुताबिक सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक 30 महीने की FD पर 8.10 फीसदी ब्याज दे रहा है। उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक भी चुनिंदा अवधि पर 8.10 फीसदी और जना स्मॉल फाइनेंस बैंक 8 फीसदी तक ब्याज दे रहा है।
इसके मुकाबले HDFC Bank, ICICI Bank और Axis Bank करीब 6.40 से 6.50 फीसदी तक ब्याज दे रहे हैं। SBI की 444 दिन की स्पेशल FD पर ब्याज दर 6.45 फीसदी है।
ब्याज में 165 बेसिस पॉइंट तक का अंतर
सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक और SBI की ब्याज दरों के बीच करीब 165 बेसिस पॉइंट तक का अंतर है। ज्यादा ब्याज आकर्षक दिख सकता है लेकिन निवेशकों को सिर्फ रेट देखकर फैसला नहीं करना चाहिए।
DICGC बीमा की सीमा 5 लाख रुपये
स्मॉल फाइनेंस बैंक RBI से लाइसेंस प्राप्त शेड्यूल्ड बैंक हैं और इनके डिपॉजिट पर भी DICGC बीमा मिलता है। हालांकि यह सुरक्षा प्रति जमाकर्ता प्रति बैंक अधिकतम 5 लाख रुपये तक सीमित है। इसमें मूल रकम और जमा हुआ ब्याज दोनों शामिल होते हैं।
उदाहरण के तौर पर 5 लाख रुपये की FD अगर 8 फीसदी की दर से पांच साल तक चले तो रकम करीब 7.35 लाख रुपये हो सकती है। ऐसे में मैच्योरिटी की पूरी रकम बीमा सीमा के अंदर नहीं रहेगी।
टैक्स के बाद कम हो सकता है फायदा
FD से मिलने वाला ब्याज निवेशक की टैक्सेबल इनकम में जुड़ता है और लागू टैक्स स्लैब के हिसाब से उस पर टैक्स लगता है। इसलिए ऊंचे टैक्स स्लैब वाले निवेशकों के लिए वास्तविक रिटर्न कम हो सकता है।
फिर भी टैक्स के बाद भी स्मॉल फाइनेंस बैंक और SBI की FD के बीच रिटर्न का अंतर बना रह सकता है।
SFB ज्यादा ब्याज क्यों देते हैं
स्मॉल फाइनेंस बैंकों का बिजनेस मॉडल बड़े बैंकों से अलग होता है। इनके लोन पोर्टफोलियो में ज्यादा ब्याज वाले सेगमेंट की हिस्सेदारी अधिक होती है और इनके पास SBI जैसे बड़े बैंकों की तरह कम लागत वाला CASA डिपॉजिट बेस नहीं होता।
इसी वजह से इनके फंड की लागत ज्यादा हो सकती है और इसका असर FD ब्याज दरों पर दिखता है।
निवेशक चाहें तो अपनी FD को अलग-अलग बैंकों और अलग-अलग अवधि में बांट सकते हैं ताकि DICGC सीमा और लिक्विडिटी दोनों का ध्यान रखा जा सके।

