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Claim Settlement Ratio देखकर लेते हैं Health Insurance? एक्सपर्ट बोले- ये बड़ी गलती हो सकती है

हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते समय सिर्फ Claim Settlement Ratio देखकर फैसला लेना सही नहीं हो सकता। Hercules Advisors के फाउंडर आदित्य शाह ने बताया कि ग्राहकों को शिकायतों, Incurred Claims Ratio और कंपनी के क्लेम व्यवहार को भी समझना चाहिए। सही जानकारी के आधार पर ही बेहतर हेल्थ पॉलिसी चुनी जा सकती है।

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In Short

  • Health insurance खरीदते समय सिर्फ Claim Settlement Ratio पर भरोसा न करें, एक्सपर्ट ने दी सलाह।
  • Incurred Claims Ratio, शिकायतों और ग्राहक अनुभव को भी जांचना जरूरी बताया गया।
  • अच्छी पॉलिसी की पहचान क्लेम के समय कंपनी के भुगतान व्यवहार से होती है।

हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते समय लोग अक्सर Claim Settlement Ratio (CSR) को सबसे बड़ा पैमाना मान लेते हैं। लेकिन क्या सिर्फ यही आंकड़ा किसी इंश्योरेंस कंपनी की असली तस्वीर बताता है? एक्सपर्ट का कहना है कि पॉलिसी लेने से पहले कई दूसरे पहलुओं को समझना भी उतना ही जरूरी है।

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बिजनेस टुडे के एक शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए Hercules Advisors के फाउंडर आदित्य शाह ने बताया कि हेल्थ इंश्योरेंस चुनते समय ग्राहकों को सिर्फ Claim Settlement Ratio देखकर फैसला नहीं लेना चाहिए।

उन्होंने कहा कि किसी कंपनी की क्लेम सर्विस को समझने के लिए Complaint Ratio, Incurred Claims Ratio, ग्राहक अनुभव और क्लेम के दौरान कंपनी के व्यवहार को भी देखना चाहिए। क्योंकि इंश्योरेंस की असली परीक्षा तब होती है, जब पॉलिसीधारक को अस्पताल के खर्च के लिए क्लेम की जरूरत पड़ती है।

Claim Settlement Ratio क्यों नहीं है पूरा पैमाना?

आदित्य शाह ने Claim Settlement Ratio के ज्यादा इस्तेमाल पर सवाल उठाए। उनके मुताबिक, यह आंकड़ा सिर्फ यह बताता है कि कितने क्लेम प्रोसेस हुए हैं, लेकिन यह नहीं बताता कि क्लेम की वास्तविक रकम कितनी चुकाई गई।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर किसी इंश्योरेंस कंपनी ने ₹100 के क्लेम में सिर्फ ₹5 का भुगतान किया, फिर भी क्लेम सेटलमेंट रेशियो अच्छा दिख सकता है। ऐसे में यह आंकड़ा पॉलिसीधारक को पूरी तस्वीर नहीं दिखाता।

हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान

आदित्य शाह के अनुसार, इंश्योरेंस कंपनी चुनते समय शिकायतों का अनुपात एक अहम संकेत हो सकता है। इससे पता चलता है कि पॉलिसीधारकों को क्लेम के दौरान किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

इसके अलावा ग्राहक अनुभव भी महत्वपूर्ण है। किसी कंपनी का क्लेम प्रोसेस कितना आसान है और भुगतान को लेकर उसका रिकॉर्ड कैसा है, इसे भी समझना जरूरी है।

Incurred Claims Ratio से मिलेगी बेहतर जानकारी

शाह ने Incurred Claims Ratio को भी एक जरूरी मेट्रिक बताया। उनके अनुसार, यह आंकड़ा बताता है कि इंश्योरेंस कंपनी हर ₹100 के प्रीमियम में से क्लेम के तौर पर कितनी राशि का भुगतान कर रही है।

इससे ग्राहकों को कंपनी के वास्तविक भुगतान व्यवहार को समझने में मदद मिल सकती है।

क्लेम के समय असली परीक्षा होती है

हेल्थ इंश्योरेंस में सिर्फ पॉलिसी खरीदना ही काफी नहीं होता, बल्कि जरूरत के समय क्लेम मिलना सबसे अहम होता है। बढ़ते मेडिकल खर्चों के बीच यह और भी जरूरी हो जाता है कि कंपनी का क्लेम सर्विस रिकॉर्ड कैसा है।

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आदित्य शाह ने यह भी कहा कि लंबे अनुभव वाला अच्छा एजेंट ग्राहकों को इंश्योरेंस कंपनियों के क्लेम व्यवहार को समझने में मदद कर सकता है।

पॉलिसी खरीदने से पहले पूरी जांच जरूरी

हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय किसी एक आंकड़े पर भरोसा करने के बजाय कई पहलुओं को देखना चाहिए। शिकायतों का डेटा, Incurred Claims Ratio, ग्राहक अनुभव और भरोसेमंद सलाह के आधार पर फैसला लेना ज्यादा उपयोगी हो सकता है।


 

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।