हर UPI पेमेंट में छिपा है नया बिजनेस मौका! जानिए फिनटेक कंपनियां अब इससे कैसे करेंगी कमाई?
भारत का फिनटेक सेक्टर अब सिर्फ डिजिटल पेमेंट तक सीमित नहीं है। UPI के बड़े ट्रांजैक्शन बेस के साथ कंपनियां रिवॉर्ड, कॉमर्स और फाइनेंशियल सर्विसेज को पेमेंट से जोड़ रही हैं। Gen Z और युवा मिलेनियल्स की बदलती उम्मीदें फिनटेक कंपनियों के प्रोडक्ट डिजाइन और एंगेजमेंट मॉडल को बदल रही हैं।

In Short
- NPCI के मुताबिक एक महीने में 18 अरब से ज्यादा UPI ट्रांजैक्शन होते हैं
- फिनटेक कंपनियां कैशबैक और डिस्काउंट से आगे बढ़कर एंगेजमेंट आधारित मॉडल पर जोर दे रही हैं
- UPI ट्रांजैक्शन और खर्च के पैटर्न युवा ग्राहकों के वित्तीय व्यवहार के अतिरिक्त संकेत दे सकते हैं
Gen Z: भारत का फिनटेक सेक्टर अब सिर्फ डिजिटल पेमेंट को तेज और आसान बनाने तक सीमित नहीं रह गया है। कंपनियां अब रोजमर्रा के लेनदेन को कंज्यूमर एंगेजमेंट के मौके में बदलने पर जोर दे रही हैं। खासकर युवा यूजर्स चाहते हैं कि पेमेंट का अनुभव शॉपिंग, रिवॉर्ड और फाइनेंशियल सर्विसेज से जुड़ा हो। इसी वजह से फिनटेक कंपनियां ट्रांजैक्शन के आसपास नए अनुभव तैयार कर रही हैं।
UPI बना नए फिनटेक मॉडल की नींव
UPI अब रोजमर्रा के खर्च का अहम हिस्सा बन चुका है। NPCI के मुताबिक एक महीने में 18 अरब से ज्यादा UPI ट्रांजैक्शन होते हैं। इतनी बड़ी ट्रांजैक्शन बेस के बाद फिनटेक कंपनियों के सामने अगला मौका पेमेंट के ऊपर अतिरिक्त सेवाएं तैयार करने का है।
बेंगलुरु स्थित फिनटेक प्लेटफॉर्म POP के फाउंडर भार्गव एरंगी के मुताबिक, पेमेंट अब एक तरह का इंफ्रास्ट्रक्चर बन चुका है। युवा ग्राहक चाहते हैं कि हर पेमेंट के साथ उन्हें रिवॉर्ड, कॉमर्स या बेहतर फाइनेंशियल अनुभव के रूप में कुछ अतिरिक्त वैल्यू मिले।
Gen Z को हर ट्रांजैक्शन से ज्यादा उम्मीद
Gen Z और युवा मिलेनियल्स के लिए पेमेंट अब एक बड़े डिजिटल सफर का हिस्सा बनता जा रहा है। किसी खरीदारी में प्रोडक्ट खोजने से लेकर भुगतान, रिवॉर्ड और खरीदारी के बाद की गतिविधियां एक ही इकोसिस्टम में जुड़ सकती हैं।
POP इसी मॉडल पर काम कर रहा है। 2023 में शुरू हुआ यह प्लेटफॉर्म UPI पेमेंट को कॉमर्स से जोड़ता है और रोजमर्रा के ट्रांजैक्शन पर यूजर्स को POPcoins देता है। इनका इस्तेमाल चुनिंदा कंज्यूमर ब्रांड्स के नेटवर्क में किया जा सकता है।
कैशबैक से एंगेजमेंट की ओर बदलाव
बढ़ती प्रतिस्पर्धा और कस्टमर जोड़ने की बढ़ती लागत के बीच फिनटेक कंपनियां कैशबैक और डिस्काउंट से आगे बढ़ रही हैं। अब कंपनियां ऐसे मॉडल तलाश रही हैं जो यूजर्स को लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रख सकें।
BCG और QED Investors की संयुक्त रिपोर्ट के मुताबिक भारत का फिनटेक सेक्टर 2030 तक लगभग तीन गुना बढ़ सकता है। इसके पीछे डिजिटल अपनाने की बढ़ती रफ्तार और नए इस्तेमाल के मामले अहम रहेंगे।
क्रेडिट तक पहुंच में भी बदल सकती है भूमिका
UPI ट्रांजैक्शन, नियमित भुगतान और खर्च का पैटर्न युवा ग्राहकों के व्यवहार से जुड़े संकेत दे सकते हैं। एरंगी के मुताबिक कई युवा डिजिटल अर्थव्यवस्था में सक्रिय होते हैं, लेकिन उनकी वित्तीय गतिविधियां पारंपरिक क्रेडिट आकलन में पूरी तरह दिखाई नहीं देतीं।
ऐसे में फिनटेक कंपनियों के लिए मुकाबला सिर्फ पेमेंट प्रोसेस करने का नहीं, बल्कि ग्राहक के साथ मजबूत और लंबे रिश्ते बनाने का बनता जा रहा है।

