EPS-95 पेंशनर्स ऐसे घर बैठे जमा करें जीवन प्रमाण, एक गलती से रुक सकती है पेंशन
ईपीएस-95 के लाखों पेंशनर्स के लिए जीवन प्रमाण जरूरी है, लेकिन इसकी वैधता को लेकर छोटी सी चूक पेंशन भुगतान में रुकावट डाल सकती है। डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट घर बैठे आधार आधारित फेस ऑथेंटिकेशन से बनाया जा सकता है। जानिए इसकी वैधता कितनी है और इसे जमा करने का तरीका क्या है।

In Short
- ईपीएफओ के मुताबिक, ईपीएस-95 में 82,11,182 पेंशनर्स शामिल हैं।
- डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट जमा करने की तारीख से 12 महीने तक वैध रहता है।
- आधार आधारित फेस ऑथेंटिकेशन से घर बैठे डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट बनाया जा सकता है।
EPFO Pensioners: कर्मचारी पेंशन योजना यानी ईपीएस-95 के 82 लाख से ज्यादा पेंशनर्स हर महीने मिलने वाली पेंशन पर आर्थिक सुरक्षा के लिए निर्भर हैं। ईपीएफओ डैशबोर्ड के मुताबिक, इस योजना में अभी 82,11,182 पेंशनर्स हैं। इन सभी के लिए जीवन प्रमाण यानी लाइफ सर्टिफिकेट को वैध रखना जरूरी है, ताकि पेंशन भुगतान में रुकावट न आए।
ईपीएफ पेंशनर्स के डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट यानी डीएलसी की कोई तय सालाना अंतिम तारीख नहीं होती। यह सर्टिफिकेट जमा करने की तारीख से 12 महीने तक वैध रहता है। अगर वैधता खत्म होने से पहले नया सर्टिफिकेट जमा नहीं किया जाता है, तो अगली पेमेंट साइकिल से पेंशन रुक सकती है। नया सर्टिफिकेट जमा और प्रोसेस होने के बाद पेंशन दोबारा शुरू हो सकती है और रुकी हुई राशि बाद में जारी की जा सकती है।
घर बैठे कैसे जमा करें जीवन प्रमाण?
आधार आधारित फेस ऑथेंटिकेशन की मदद से पेंशनर्स घर बैठे डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट बना सकते हैं। इसके लिए बैंक या पेंशन ऑफिस जाने की जरूरत नहीं होती। पेंशनर के पास वैध आधार नंबर, आधार से जुड़ा सक्रिय मोबाइल नंबर और जरूरी पेंशन डिटेल होनी चाहिए। आधार पहले से पेंशन भुगतान एजेंसी यानी बैंक या पोस्ट ऑफिस के रिकॉर्ड में दर्ज होना चाहिए।
पहला कदम: जरूरी ऐप डाउनलोड करें
किसी ऐसे एंड्रॉयड स्मार्टफोन में जीवन प्रमाण ऐप और आधारफेसआरडी डाउनलोड करें, जिसमें फ्रंट कैमरा और इंटरनेट कनेक्शन हो।
दूसरा कदम: जीवन प्रमाण ऐप खोलें
ऐप खोलने के बाद जरूरी परमिशन दें, ताकि ऐप कैमरा और दूसरी जरूरी सुविधाओं का इस्तेमाल कर सके।
तीसरा कदम: ऑपरेटर का सत्यापन करें
आधार नंबर, मोबाइल नंबर और ईमेल एड्रेस दर्ज करें। ओटीपी से सत्यापन के बाद ऑपरेटर की जानकारी दर्ज की जा सकती है। बुजुर्ग या बिस्तर पर रहने वाले पेंशनर की मदद परिवार का सदस्य या भरोसेमंद व्यक्ति कर सकता है और ऑपरेटर बन सकता है।
चौथा कदम: पेंशन डिटेल और फेस ऑथेंटिकेशन
स्मार्टफोन के फ्रंट कैमरे से पेंशनर का चेहरा कैप्चर करें और जरूरी पेंशन जानकारी भरें। उपलब्ध सूची में से सही पेंशन भुगतान आदेश यानी पीपीओ नंबर चुनें। अगर पीपीओ नंबर दिखाई नहीं देता है तो नया पीपीओ जोड़ने का विकल्प इस्तेमाल किया जा सकता है।
पांचवां कदम: डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट बनाएं
जानकारी जमा करने के बाद आधार आधारित फेस ऑथेंटिकेशन पूरा करें। सत्यापन सफल होने पर डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट बन जाएगा और एक यूनिक प्रमाण आईडी मिलेगी।
छठा कदम: पुष्टि सुरक्षित रखें
रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर प्रमाण आईडी और डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट की लिंक वाला एसएमएस आएगा। डीएलसी प्रक्रिया के दौरान चुनी गई पेंशन भुगतान एजेंसी को इलेक्ट्रॉनिक तरीके से भेज दिया जाता है, इसलिए आमतौर पर इसे अलग से जमा करने की जरूरत नहीं होती।
इन गलतियों से बचें
पेंशनर्स को पीपीओ नंबर, आधार की जानकारी, बैंक खाते की जानकारी और मोबाइल नंबर को पेंशन भुगतान एजेंसी के रिकॉर्ड से मिलाना चाहिए। जानकारी में अंतर होने पर सर्टिफिकेट रिजेक्ट हो सकता है या उसे प्रोसेस करने में समस्या आ सकती है।
पहले जमा किए गए सर्टिफिकेट का स्टेटस देखे बिना बार-बार नया सर्टिफिकेट जमा करने से भी बचना चाहिए। प्रमाण आईडी को सुरक्षित रखना चाहिए, क्योंकि इसका इस्तेमाल सर्टिफिकेट को ट्रैक करने के लिए किया जा सकता है।
स्मार्टफोन इस्तेमाल न कर पाने पर क्या करें?
फेस ऑथेंटिकेशन ही एकमात्र विकल्प नहीं है। पेंशनर्स परिवार के सदस्यों या देखभाल करने वालों की मदद ले सकते हैं या संबंधित बैंक और पोस्ट ऑफिस जा सकते हैं। रजिस्टर्ड डिवाइस के जरिए फिंगरप्रिंट या आइरिस से बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन की सुविधा भी उपलब्ध है। कुछ बैंक और इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक बुजुर्ग या चलने-फिरने में असमर्थ पेंशनर्स के लिए डोरस्टेप बैंकिंग की सुविधा भी देते हैं।

