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कम्यूटेड या अनकम्यूटेड पेंशन? रिटायरमेंट के बाद कौन सा विकल्प है बेहतर, एक्सपर्ट से समझें टैक्स और फायदे का पूरा गणित!

रिटायरमेंट के बाद पेंशन लेने का तरीका आपकी टैक्स देनदारी और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा दोनों को प्रभावित कर सकता है। टैक्स एक्सपर्ट अंकित जैन ने बताया कि कम्यूटेड और अनकम्यूटेड पेंशन में बड़ा अंतर होता है और सही चुनाव से रिटायर लोग अपने पैसे का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं।

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In Short

  • पेंशन लेते समय ये एक फैसला बदल सकता है आपकी पूरी कमाई का हिसाब जानें कौन सा विकल्प है फायदेमंद
  • रिटायरमेंट के बाद पैसा तो मिलेगा लेकिन टैक्स बचा पाएंगे या नहीं ये तय करेगा पेंशन का ये चुनाव
  • एक तरफ लाखों रुपये का फायदा दूसरी तरफ टैक्स का झटका पेंशन लेने से पहले समझ लें ये अंतर

रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन के दो अलग-अलग रूप में मिलती है। पहला- कम्यूटेड पेंशन (Commuted Pension) और दूसरा- अनकम्यूटेड पेंशन (Uncommuted Pension)। 

बिजनेस टुडे के एक शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए Ved Jain & Associates के अंकित जैन के मुताबिक कम्यूटेड और अनकम्यूटेड पेंशन के बीच अंतर रिटायरमेंट के बाद आपकी आय और टैक्स दोनों को प्रभावित कर सकता है।

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एक साथ पैसा लेने पर कम हो जाती है भविष्य की पेंशन

एक्सपर्ट अंकित जैन ने बताया कि पेंशन का उद्देश्य रिटायरमेंट के बाद नौकरी से मिलने वाली सैलरी की जगह नियमित आय उपलब्ध कराना होता है। हालांकि नियमों के तहत कर्मचारी अपनी पेंशन के एक हिस्से को पहले ही एकमुश्त रकम के रूप में ले सकते हैं।

इसे कम्यूटेड पेंशन कहा जाता है। इसमें रिटायर व्यक्ति भविष्य में मिलने वाली मासिक पेंशन के कुछ हिस्से को छोड़कर उसकी रकम पहले प्राप्त कर लेता है। उदाहरण के तौर पर अगर किसी व्यक्ति को हर महीने पचास हजार रुपये पेंशन मिलनी है तो वह अपनी जरूरत के हिसाब से कुछ हिस्सा पहले ले सकता है, जिसके बाद उसकी मासिक पेंशन कम हो जाती है।

यह विकल्प उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है जिन्हें रिटायरमेंट के समय घर खरीदने, किसी बड़े खर्च या निवेश के लिए एक बड़ी रकम की जरूरत होती है।

कम्यूटेड पेंशन पर टैक्स के नियम अलग

कम्यूटेड पेंशन को लेकर टैक्स नियम सामान्य मासिक पेंशन से अलग होते हैं। अंकित जैन के अनुसार, सरकार ने एकमुश्त मिलने वाली इस रकम को लेकर टैक्स में राहत दी है क्योंकि रिटायरमेंट के समय मिलने वाली बड़ी रकम पर ज्यादा टैक्स लगाने से व्यक्ति की बची हुई पूंजी प्रभावित हो सकती है।

उन्होंने बताया कि सरकारी कर्मचारियों के लिए कम्यूटेड पेंशन पूरी तरह टैक्स फ्री होती है। वहीं निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए कुछ सीमाएं तय हैं और टैक्स नियम इस बात पर भी निर्भर करते हैं कि कर्मचारी को ग्रेच्युटी मिल रही है या नहीं।

हर महीने मिलने वाली पेंशन पर देना पड़ सकता है टैक्स

इसके विपरीत अनकम्यूटेड पेंशन यानी हर महीने मिलने वाली नियमित पेंशन को सामान्य आय माना जाता है। इसका मतलब है कि यह रकम व्यक्ति की कुल सालाना आय में जुड़ती है और उसी आधार पर टैक्स की गणना होती है।

अंकित जैन ने बताया कि अगर किसी व्यक्ति को हर महीने तीस हजार रुपये पेंशन मिलती है तो यह उसकी टैक्स योग्य आय में शामिल होगी। इसके अलावा अगर रिटायर व्यक्ति को फिक्स्ड डिपॉजिट से ब्याज, किराये या निवेश से आय मिल रही है तो कुल आय बढ़ने पर टैक्स देनदारी भी बढ़ सकती है।

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रिटायरमेंट में सिर्फ पेंशन नहीं पूरी आय की प्लानिंग जरूरी

रिटायरमेंट के बाद आर्थिक योजना बनाते समय सिर्फ पेंशन की रकम देखना काफी नहीं है। व्यक्ति को अपनी सभी आय के स्रोतों को ध्यान में रखकर फैसला करना चाहिए।

कम्यूटेड पेंशन से जहां शुरुआत में बड़ी रकम मिल सकती है, वहीं इससे भविष्य की नियमित आय कम हो जाती है। दूसरी तरफ अनकम्यूटेड पेंशन हर महीने स्थिर आय देती है लेकिन यह टैक्स के दायरे में आ सकती है।

इसलिए पेंशन का चुनाव केवल तुरंत मिलने वाले पैसे के आधार पर नहीं बल्कि भविष्य की जरूरत, खर्च और टैक्स प्रभाव को ध्यान में रखकर करना चाहिए। रिटायरमेंट के बाद आर्थिक स्थिरता के लिए सही संतुलन बनाना सबसे जरूरी है।

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।