Small Cap में निवेश किया है तो कितनी बार चेक करें पोर्टफोलियो? एक्सपर्ट ने बताया कब बढ़ सकता है नुकसान
स्मॉल कैप शेयरों या म्यूचुअल फंड में निवेश किया है तो क्या हर तिमाही पोर्टफोलियो चेक करना जरूरी है? कंपनियों की कमाई में 25% से 35% तक की बढ़ोतरी के बावजूद कुछ शेयरों का महंगा वैल्यूएशन चिंता बढ़ा रहा है। बिजनेस टुडे से बातचीत में मनीफ्रंट के को-फाउंडर और सीईओ मोहित गैंग ने बताया कि कब पोर्टफोलियो की समीक्षा करें और किन संकेतों को नजरअंदाज न करें।

In Short
- स्मॉल कैप कंपनियों की कमाई में पिछली तिमाही 25% से 35% तक ग्रोथ रही।
- कमाई की रफ्तार धीमी पड़ने पर महंगे स्मॉल कैप शेयरों में तेज गिरावट का जोखिम।
- स्मॉल कैप म्यूचुअल फंड की साल में एक बार समीक्षा करने की सलाह।
स्मॉल कैप शेयरों में निवेश करने वाले लोगों के लिए कंपनियों के तिमाही नतीजे कितने महत्वपूर्ण हैं? क्या हर तीन महीने में कंपनियों की कमाई पर नजर रखना जरूरी है या साल में एक बार पोर्टफोलियो की समीक्षा करना काफी है? खासकर जब स्मॉल कैप शेयरों के कुछ हिस्सों में वैल्यूएशन काफी ऊंचे हैं, तब निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि कमाई की रफ्तार धीमी पड़ने पर उनके निवेश पर क्या असर हो सकता है।
बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए मनीफ्रंट के को-फाउंडर और सीईओ मोहित गैंग ने कहा कि स्मॉल कैप में निवेश की समीक्षा का तरीका इस बात पर निर्भर करता है कि निवेशक सीधे शेयर खरीद रहा है या म्यूचुअल फंड के जरिए निवेश कर रहा है। दोनों ही स्थितियों में अलग रणनीति अपनाने की जरूरत है।
सीधे शेयर खरीदते हैं तो नतीजों पर रखें नजर
मोहित गैंग के मुताबिक, जो निवेशक खुद शेयर चुनते हैं और अपने पोर्टफोलियो को सक्रिय रूप से संभालते हैं, उन्हें कंपनियों के तिमाही नतीजों और कमाई की रफ्तार पर लगातार नजर रखनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि पिछली तिमाही में स्मॉल कैप कंपनियों की कमाई में करीब 25% से 35% की बढ़ोतरी देखने को मिली थी। अगर यह रफ्तार आगे भी बनी रहती है, तो निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत हो सकता है।
कमाई घटी तो शेयरों में आ सकती है तेज गिरावट
एक्सपर्ट ने चेतावनी दी कि स्मॉल कैप के कुछ शेयरों का प्राइस टू अर्निंग यानी PE रेशियो तीन अंकों तक पहुंच चुका है। इसका मतलब है कि निवेशक इन कंपनियों की कमाई के मुकाबले काफी ऊंची कीमत चुका रहे हैं।
ऐसे में अगर कंपनियों की कमाई में 30% से 35% की बढ़ोतरी बरकरार नहीं रहती, तो शेयरों की वैल्यूएशन में तेज गिरावट आ सकती है। इसे डी-रेटिंग कहा जाता है। मोहित गैंग के मुताबिक, ऐसी स्थिति में शेयरों में भारी करेक्शन देखने को मिल सकता है।
Small Cap Mutual Fund में कितनी बार करें समीक्षा?
मोहित गैंग ने कहा कि जो निवेशक स्मॉल कैप म्यूचुअल फंड के जरिए पैसा लगाते हैं, उनके लिए स्थिति अपेक्षाकृत आसान है। फंड मैनेजर कंपनियों की कमाई, वैल्यूएशन और बाजार की स्थिति का विश्लेषण करते हैं।
उनके मुताबिक, स्मॉल कैप म्यूचुअल फंड का आकलन सिर्फ छह महीने के प्रदर्शन के आधार पर नहीं करना चाहिए। निवेशकों को कम से कम साल में एक बार अपने फंड की समीक्षा करनी चाहिए और यह देखना चाहिए कि फंड का प्रदर्शन उनकी उम्मीदों के मुताबिक है या नहीं।
फंड की समीक्षा करते समय क्या देखें?
एक्सपर्ट के मुताबिक, सालाना समीक्षा के दौरान फंड में शामिल शेयरों, अलग-अलग सेक्टर में निवेश के अनुपात और फंड मैनेजर की निवेश रणनीति को समझना जरूरी है।
अगर फंड की निवेश रणनीति सही दिशा में है, पोर्टफोलियो में कोई गंभीर समस्या नहीं है और प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप है, तो निवेशक उसमें बने रहने और निवेश बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, सिर्फ पिछले रिटर्न के आधार पर फैसला लेने के बजाय फंड की गुणवत्ता और निवेश रणनीति पर ध्यान देना जरूरी है।

