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SEBI का बड़ा सुधार! म्यूचुअल फंड में आई नई ‘Life Cycle Fund’ कैटेगरी - हुआ बड़ा फेरबदल

26 फरवरी 2026 के सर्कुलर के जरिए सेबी ने नई कैटेगरी ‘Life Cycle Fund’ पेश की है और फंड ऑफ फंड्स (FoFs) की स्ट्रक्चर में भी बदलाव किए हैं।

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Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने म्यूचुअल फंड सेक्टर में बड़े सुधारों का ऐलान किया है। 26 फरवरी 2026 के सर्कुलर के जरिए सेबी ने नई कैटेगरी ‘Life Cycle Fund’ पेश की है और फंड ऑफ फंड्स (FoFs) की स्ट्रक्चर में भी बदलाव किए हैं। इस बदलाव का मकसद साफ है- हर स्कीम अपने नाम और उद्देश्य के मुताबिक 'ट्रू-टू-लेबल' रहे, ताकि निवेशकों को भ्रम न हो।

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लाइफ साइकिल फंड्स क्या है?

लाइफ साइकिल फंड्स एक ओपन-एंडेड स्कीम होंगी, जिनकी मैच्योरिटी 5 से 30 साल के बीच, हर 5 साल के अंतराल पर तय होगी। स्कीम के नाम में मैच्योरिटी ईयर लिखना जरूरी होगा, जैसे 'Life Cycle Fund 2045', ताकि निवेशक समयसीमा और जोखिम प्रोफाइल तुरंत समझ सकें।

इन फंड्स में ‘ग्लाइड पाथ’ मॉडल लागू होगा। शुरुआती सालों में इक्विटी एक्सपोजर 65% से 95% तक रह सकता है, जो समय के साथ घटेगा और डेट व सुरक्षित इंस्ट्रूमेंट्स का हिस्सा बढ़ेगा। इससे निवेशक के जीवन चरण के हिसाब से जोखिम अपने आप संतुलित होता रहेगा।

पुरानी स्कीम्स की जगह नई स्ट्रक्चर

एडलवाइस म्यूचुअल फंड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट निरंजन अवस्थी ने इस फैसले को एक बड़ा स्ट्रक्चरल बदलाव बताया। उन्होंने कहा कि सेबी ने लाइफ साइकिल फंड की नई कैटेगरी शुरू की है, जो पहले के रिटायरमेंट और चिल्ड्रन फंड जैसे 'सॉल्यूशन ओरिएंटेड' फंड की जगह लेगी। ये नए फंड निवेशक की उम्र और जीवन के चरण के अनुसार जोखिम को अपने आप एडजस्ट करेंगे, जिससे पुराने रिटायरमेंट फंड की तरह स्थिर एसेट अलोकेशन की समस्या नहीं रहेगी और स्ट्रक्चरल फैसलों की जरूरत भी कम होगी।

एग्जिट लोड और निवेश दायरा

लॉन्ग टर्म के लिए SEBI ने ग्रेडेड एग्जिट लोड तय किया है- पहले साल में 3%, दूसरे साल में 2% और तीसरे साल में 1%। इससे समय से पहले निकासी कम होगी। ये फंड इक्विटी, डेट, InvITs, ETCDs और गोल्ड-सिल्वर ETFs में निवेश कर सकेंगे। हालांकि, कोई भी AMC एक समय में अधिकतम छह लाइफ साइकिल फंड ही लॉन्च कर सकेगी।

SEBI ने पांच मुख्य कैटेगरी- Equity, Debt, Hybrid, Life Cycle Funds और Other Schemes को बरकरार रखा है। मल्टी-कैप फंड्स को कम से कम 75% इक्विटी में और बड़े, मिड व स्मॉल कैप में समान न्यूनतम निवेश रखना होगा। लार्ज-कैप फंड्स में 80% निवेश लार्ज-कैप में अनिवार्य रहेगा।

सेक्टरल और थीमैटिक फंड्स के पोर्टफोलियो ओवरलैप को 50% तक सीमित किया गया है, जिसे तीन साल में लागू करना होगा। साथ ही स्कीम नाम अब रिटर्न-फोकस्ड शब्दों का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।

Disclaimer: म्यूचुअल फंड्स निवेश बाज़ार जोखिमों के अधीन है। ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।