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ब्याज दरें बढ़ीं तो Debt Fund पर क्या होगा असर? जानिए Bond Returns का पूरा गणित

बिजनेस टुडे के एक शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए Anand Rathi Wealth की म्यूचुअल फंड हेड श्वेता रजनी ने बताया कि बढ़ती ब्याज दरों का असर Debt Fund और Bond Returns पर पड़ सकता है। उन्होंने समझाया कि Yield और Bond Price के बीच उल्टा संबंध होता है।

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ब्याज दर बढ़ने पर Debt Fund और Bond Returns पर असर समझिए
ब्याज दर बढ़ने पर Debt Fund और Bond Returns पर असर समझिए

In Short

  • ब्याज दरें बढ़ने पर पुराने बॉन्ड की कीमतें गिर सकती हैं क्योंकि नए बॉन्ड ज्यादा ब्याज ऑफर करते हैं
  • Debt Fund में रिटर्न पर असर फंड की Duration और ब्याज दरों के बदलाव पर निर्भर करता है
  • निवेशकों को अपनी Investment Horizon के हिसाब से Bond Duration चुननी चाहिए ताकि Interest Rate Risk को बेहतर तरीके से संभाला जा सके

Debt Fund में निवेश करने वालों के लिए ब्याज दरों का चक्र यानी Interest Rate Cycle काफी अहम होता है। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं या घटती हैं तो इसका सीधा असर बॉन्ड की कीमतों और Debt Fund के रिटर्न पर पड़ सकता है। बिजनेस टुडे के एक शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए Anand Rathi Wealth की म्यूचुअल फंड हेड श्वेता रजनी ने बताया कि निवेशकों के लिए Yield और Bond Price के बीच संबंध को समझना बेहद जरूरी है।

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ब्याज दर और बॉन्ड की कीमत का क्या है कनेक्शन?

श्वेता रजनी ने आसान उदाहरण से समझाया कि मान लीजिए आपने 100 रुपये का एक बॉन्ड खरीदा है, जिस पर 7% ब्याज मिल रहा है। अब एक हफ्ते बाद उसी कंपनी और उसी अवधि का नया बॉन्ड 7.5% ब्याज पर बाजार में आता है।

ऐसे में आपका पुराना बॉन्ड कम आकर्षक हो जाएगा क्योंकि नए बॉन्ड पर ज्यादा ब्याज मिल रहा है। इसकी वजह से आपके 100 रुपये वाले बॉन्ड की बाजार कीमत गिरकर 99 रुपये तक आ सकती है।

यानी जब ब्याज दरें बढ़ती हैं तो पुराने बॉन्ड की कीमतों पर दबाव आता है। यही वजह है कि ब्याज दर और बॉन्ड कीमतों के बीच उल्टा संबंध होता है।

ब्याज दर बढ़ने पर Debt Fund Returns पर असर

श्वेता रजनी के मुताबिक अगर ब्याज दरों में बढ़ोतरी का दौर चलता है तो Debt Fund की नेट एसेट वैल्यू यानी NAV पर भी असर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में निवेशकों को उम्मीद से कम रिटर्न मिल सकता है या कुछ समय के लिए गिरावट भी दिखाई दे सकती है।

हालांकि हर Debt Fund पर इसका असर अलग-अलग होता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि फंड किस तरह के बॉन्ड में निवेश करता है और उसकी Duration कितनी है।

Duration क्यों है इतना जरूरी?

एक्सपर्ट ने बताया कि निवेशकों को अपने निवेश की अवधि यानी Investment Horizon को बॉन्ड की Duration के साथ मिलाना चाहिए। Duration यह संकेत देती है कि ब्याज दरों में बदलाव से बॉन्ड की कीमत कितनी प्रभावित हो सकती है।

अगर ब्याज दरें बढ़ रही हैं तो लंबी Duration वाले बॉन्ड ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। वहीं छोटी Duration वाले फंड में ब्याज दरों के बदलाव का असर तुलनात्मक रूप से कम हो सकता है।

निवेशकों को क्या ध्यान रखना चाहिए?

Debt Fund को सिर्फ कम जोखिम वाला निवेश मानना सही नहीं है। इसमें भी Interest Rate Risk होता है। इसलिए निवेश से पहले यह समझना जरूरी है कि ब्याज दरों का माहौल कैसा है, फंड की Duration कितनी है और आपका निवेश लक्ष्य क्या है।

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सही Duration और सही निवेश अवधि का चुनाव करने से ब्याज दरों में बदलाव के असर को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है।

Disclaimer: म्यूचुअल फंड्स निवेश बाज़ार जोखिमों के अधीन है। ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।