पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने गोवा में FHRAI के 54वें वार्षिक सम्मेलन का उद्घाटन किया
इस वर्ष के सम्मेलन का थीम -"टूरिज्म @2047: इनक्रेडिबल टू इनएविटेबल इंडिया – ड्राइविंग ग्रोथ एंड सस्टेनेबिलिटी इन ए मिशन मोड" है। इस इवेंट का मुख्य उद्देश्य ऐसी रणनीतियों की पहचान करना है, जो भारत के पर्यटन क्षेत्र में सतत विकास और नवाचार को बढ़ावा देंगी और जो 2047तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य के साथ तालमेल बना सकेंगी। सम्मेलन के दौरान चर्चाओं में इस बात पर जोर दिया गया कि कैसे पर्यटन एक मिशन-ओरिएंटेड तरीके से आर्थिक विकास और स्थिरता को बढ़ावा दे सकता है।

विश्व की तीसरी सबसे बड़ी हास्पिटैलिटी एसोसिएशन-फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FHRAI) ने आज ताज सिडेड डी गोवा ( होराइजन) में अपना 54वां वार्षिक सम्मेलन शुरू किया। 16से 18अक्टूबर तक चलने वाले इस तीन दिवसीय इवेंट का उद्घाटन भारत सरकार के माननीय पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने गोवा के माननीय मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत की उपस्थिति में किया। सम्मेलन में भारत के पर्यटन और आतिथ्य उद्योग के भविष्य पर चर्चा करने के लिए लगभग 800प्रतिनिधि एकत्रित हुए हैं। सम्मेलन आयोजन समिति (COC) के अध्यक्ष श्री डी.एस. आडवाणी और एफएचआरएआई के अध्यक्ष श्री प्रदीप शेट्टी ने स्वागत भाषण दिया।
इस वर्ष के सम्मेलन का थीम -"टूरिज्म @2047: इनक्रेडिबल टू इनएविटेबल इंडिया – ड्राइविंग ग्रोथ एंड सस्टेनेबिलिटी इन ए मिशन मोड" है। इस इवेंट का मुख्य उद्देश्य ऐसी रणनीतियों की पहचान करना है, जो भारत के पर्यटन क्षेत्र में सतत विकास और नवाचार को बढ़ावा देंगी और जो 2047तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य के साथ तालमेल बना सकेंगी। सम्मेलन के दौरान चर्चाओं में इस बात पर जोर दिया गया कि कैसे पर्यटन एक मिशन-ओरिएंटेड तरीके से आर्थिक विकास और स्थिरता को बढ़ावा दे सकता है।
उद्घाटन के दौरान, संस्कृति मंत्री और पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भारत के भविष्य को आकार देने में पर्यटन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "पर्यटन उद्योग के सामने आने वाली चुनौतियां स्पष्ट थीं। और इन मुद्दों को प्रभावी ढंग से समझने के लिए राज्य सरकार द्वारा उद्योग का दर्जा देने की आवश्यकता पर एक मजबूत सहमति थी। पिछले कुछ वर्षों में, हमने विभिन्न राज्यों के साथ सहयोग किया है।बेस्ट प्रैक्टिसेज और सरकारी नीतियों को साझा किया है। विश्व पर्यटन दिवस पर, हमने इन जानकारियों को संकलित किया और उन्हें व्यापक रूप से प्रसारित किया।राज्यों से इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए इन रणनीतियों को लागू करने का आग्रह किया। इन प्रैक्टिसेज के महत्व पर जोर देते हुए हमारे अनुवर्ती कार्य लगातार होते रहे हैं। हमारी जीएसटी और बुनियादी ढांचे से संबंधित चुनौतियों के बारे में, मैंने इस आयोजन से पहले वित्त मंत्री के साथ बैठक का अनुरोध किया और यह भी यह जानते हुए वह विश्व बैंक शिखर सम्मेलन की तैयारियों में व्यस्त थीं। इस उद्योग के लिए बुनियादी ढांचे की स्थिति और इसकी बेहतरी के बारे में हमारी बातचीत काफी सकारात्मक रही। मैं हमारी चर्चाओं से सकारात्मक परिणामों के बारे में आशावादी हूं।”
उन्होंने आगे कहा,"हमारे माननीय प्रधानमंत्री के नेतृत्व में दुनिया भर में प्रतिष्ठा बढ़ रही है। 'देखो अपना देश' और 'चलो इंडिया' जैसी पहलों का उद्देश्य प्रवासी भारतीयों को हमारे देश को बढ़ावा देने के लिए सशक्त बनाना है। उल्लेखनीय रूप से, हमने हाल ही में विश्व पर्यटन दिवस के उपलक्ष्य में एक लाख वीजा निःशुल्क प्रदान किए हैं, और हम प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को आकर्षित करने के लिए विदेश मंत्रालय के साथ सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। जैसा कि हम लोकप्रिय पर्यटन स्थलों को भीड़-भाड़ से मुक्त करने और नए विकल्प विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं, मैं बड़े पैमाने पर परियोजनाएं लाने के लिए राज्यों के साथ सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध हूं। हमें अपने पर्यटन परिदृश्य में विविधता लाने के लिए विशेष रूप से ग्रामीण और कम प्रसिद्ध क्षेत्रों में नए पर्यटन स्थलों को विकसित करने पर भी ध्यान केंद्रित करना चाहिए। अंत में, मैं इस सम्मेलन की मेजबानी के लिए गोवा सरकार और मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करता हूं। और मैं एफएचआरएआई के अथक प्रयासों की सराहना करता हूं। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन का हिस्सा बनना मेरे लिए सम्मान की बात है।"
गोवा सरकार के माननीय पर्यटन मंत्री श्री रोहन खाउंटे ने कहा, "हम गोवा में 12 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आयोजित हो रहे एफएचआरआई के 54वें वार्षिक सम्मेलन के लिए एकत्रित हुए हैं। मैं देश भर से आए सभी प्रतिनिधियों का हार्दिक स्वागत करता हूं। अपने अद्वितीय आतिथ्य के लिए प्रसिद्ध हमारा प्रिय गोवा "अतिथि देवो भव" की भावना को दर्शाता है। एक ऐसा दर्शन जो हर आगंतुक के साथ हमारी बातचीत का मार्गदर्शन करता है। "टूरिज्म@2047: इनक्रेडिबल टू इनएविटेबल इंडिया– ड्राइविंग ग्रोथ एंड सस्टेनेबिलिटी इन ए मिशन मोड" थीम वाले इस सम्मेलन के माध्यम सेहम भारतीय पर्यटन में परिवर्तनकारी बदलाव के मुहाने पर खड़े हैं।"
उन्होंने आगे कहा,“यह सम्मेलन हमारे पर्यटन लैंडस्कैप को नया आकार देने के उद्देश्य से सार्थक चर्चाओं और सहयोगों के लिए एक अनूठा मंच प्रदान करता है। हमारा साझा दृष्टिकोण 2047 तक 3 खरब डॉलर की पर्यटन अर्थव्यवस्था का निर्माण करना और सालाना 10 करोड़ अंतरराष्ट्रीय आगंतुकों का स्वागत करना है। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, हमें सस्टेनेबिलिटी लानी होगी। साथ ही तकनीकी प्रगति को अपनाना चाहिए और एक कुशल कार्यबल को बढ़ावा देना चाहिए। इन सिद्धांतों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता भारत को वैश्विक पर्यटन में एक महत्वपूर्ण प्लेयर के रूप में स्थापित करेगी और वह भी यह सुनिश्चित करते हुए कि यह एक ऐसा गंतव्य बन जाए जिसके बारे में हर कोई अच्छा बोले। अपनी लुभावनी प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साथ गोवा इस यात्रा में सबसे आगे है। हम अपने राज्य के अंतर्देशीय खजाने को शामिल करने के लिए तट से परे अपने पर्यटन क्षितिज का विस्तार कर रहे हैं। संधारणीय पर्यटन, सांस्कृतिक अनुभवों और डिजिटल इनोवेशन पर केंद्रित पहलों के माध्यम से, हम एक समग्र पर्यटन केंद्र बनने की आकांक्षा रखते हैं। अंत में, मैं आयोजकों और इस प्रयास में शामिल सभी स्टेकहोल्डर्स के प्रति अपना आभार व्यक्त करता हूं। आइए हम सब मिलकर अपने माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में "विकासशील भारत" के विजन को साकार करने की दिशा में एक रास्ता बनाएं। भारतीय पर्यटन का भविष्य उज्ज्वल है और आपके सहयोग से हम इसे अपरिहार्य बना सकते हैं।”
गोवा के माननीय मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने कहा, “गोवा में इस प्रतिष्ठित 54वें वार्षिक एफएचआरएआई सम्मेलन के लिए एकत्र होना हम सबके लिए बहुत गर्व का क्षण है। पर्यटन हमेशा से भारत की प्रमुख शक्तियों में से एक रहा है, लेकिन अब समय आ गया है कि हम आगे की ओर देखें। 2047 तक 3 खरब डॉलर की पर्यटन अर्थव्यवस्था और 10 करोड़ वार्षिक विदेशी आगंतुकों के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के साथ, हम परिवर्तन के लिए तैयार हैं। 'अतुल्य भारत' से 'अपरिहार्य भारत' तक, हमारा ध्यान स्थिरता, तकनीकी इनोवेशन और एक कुशल वर्कफोर्स के निर्माण पर होगा।”
उन्होंने आगे कहा, "गोवा अपनी अद्वितीय सुंदरता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साथ भारतीय पर्यटन के एक प्रकाश स्तंभ के रूप में खड़ा है और हमें इस मार्ग का नेतृत्व करने पर गर्व है। भविष्य की ओर देखते हुए हमारे लिए यह महत्वपूर्ण है कि उद्योग के लीडर्स, नीति निर्माता और सभी स्टेकहोल्डर्स एक साथ मिलकर एक रोडमैप तैयार करें जो भारत को वैश्विक पर्यटन में एक अपरिहार्य शक्ति के रूप में स्थापित करेगा। भारतीय पर्यटन का भविष्य उज्ज्वल है, और सहयोगी प्रयासों से, हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि भारत दुनिया भर के पर्यटकों के लिए एक जरूरी डेस्टीनेशन बन जाए।एक ऐसा स्थान जहां 'अतिथि देवो भव' वाक्यांश हर लिहाज से गुंजता रहे।"
एफएचआरएआई के प्रेसिडेंट श्री प्रदीप शेट्टी ने कहा, "पर्यटन क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था को बदल सकता है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, यह उद्योग अभी भारत के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 9 फीसदी का योगदान देता है। हालांकि, हमारे अनुमानों के अनुसार, हम सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 12से 13 फीसदी तक का योगदान दे रहे हैं। हमारा मानना है कि इस उद्योग का अधिकांश हिस्सा असंगठित है, जिसमें से 80 फीसदी औपचारिक संरचनाओं (फारमल स्ट्रक्चर) के बाहर संचालित होता है। जैसा कि हम अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी तक एक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर देखते हैं, इस क्षेत्र की क्षमताओं को पहचानना और उनका दोहन करना महत्वपूर्ण है। पर्यटन उद्योग समाज के सभी वर्गों के लिए रोजगार पैदा कर सकता है। यह उच्च शिक्षित पेशेवरों से लेकर माली और स्थानीय कारीगरों जैसे न्यूनतम औपचारिक शिक्षा वाले लोगों तक क लिए मददगार हो सकता है। आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए यह समावेशिता महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सभी नागरिकों को लाभान्वित करती है। इसके अलावा, अनुमान बताते हैं कि अगले पांच वर्षों में 50,000से 60,000नए कमरे जोड़ने से रोजगार के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। और इससे खासकर युवाओं, महिलाओं और हाशिए पर रहने वाले हमारे समुदायों के लोगों को फायदा हो सकता है।"
उन्होंने आगे कहा, "मैं जिन मुद्दों पर प्रकाश डालना चाहता हूं, उनमें से एक हमारे यहां का हाई जीएसटी रेट है। यदि हमें अपने किसी करीबी, प्रतिस्पर्धी दक्षिण पूर्व एशियाई देश के साथ प्रतिस्पर्धा करनी है, तो देखना होगा कि वहां सिंगल विजिट जीएसटी हैं। हाल के वर्षों में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, लेकिन इन सुधारों का कार्यान्वयन महत्वपूर्ण है। अंतिम रूप से इसका निष्पादन सबसे चुनौतीपूर्ण होता है। यह समय है कि हम केवल वादे के युग से निकलकर ठोस नतीजों के युग की ओर बढ़ें और वह भीयह सुनिश्चित करते हुए कि पर्यटन क्षेत्र हमारे देश के विकास का इंजन बन जाए। अब समय आ गया है कि हम निर्णायक रूप से कार्य करें और इस उभरते क्षेत्र की क्षमताओं का उपयोग करते हुए सभी के लिए एक उज्जवल भविष्य का निर्माण करें।"
इस दिन का मुख्य आकर्षण स्वर्गीय श्री पी.आर.एस. ओबेरॉय को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किया जाना था। इस दौरान भारतीय आतिथ्य क्षेत्र में उनके अपार योगदान को याद किया गया। इसके अतिरिक्त, श्री ललित सूरी, स्वर्गीय कैप्टन सी.पी. कृष्णन नायर और डॉ. अजीत बी. केरकर को उद्योग में उनके अभूतपूर्व कार्य के लिए हॉल ऑफ फेम अवार्ड प्रदान किया गया।
पहले दिन का समापन सीओसी के को-चेयरमैन श्री विनय अल्बुकर्क के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ और इसके बाद इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड (आईएचसीएल) द्वारा एग्जीबिशन का उद्घाटन किया गया। इस एक्जीबिशन में आतिथ्य क्षेत्र में लेटेस्ट इनोवेशंस और एडवांसमेंट्स को दिखाया जाएगा, जिससे प्रतिनिधियों को नए ट्रेंड्स और टेक्नोलॉजी का पता लगाने के अवसर मिल सकेंगे।
