Yes Bank को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका! ₹8,400 करोड़ के बॉन्ड पर फैसला पलटा, शेयर 14% टूटा, जानें पूरा मामला
Yes Bank के शेयरों में अचानक आई भारी गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने साल 2020 में करीब ₹8,400 करोड़ के AT1 बॉन्ड को खत्म करने का फैसला पलट दिया है। आखिर छह साल पुराने इस मामले में ऐसा क्या हुआ कि बैंक का शेयर 14% तक टूट गया और अब आगे क्या होगा?

In Short
- सुप्रीम कोर्ट ने Yes Bank के ₹8,400 करोड़ के बॉन्ड राइट ऑफ का फैसला पलटा।
- फैसले के बाद Yes Bank का शेयर 14.2% तक टूटकर ₹18.20 पर आया।
- बैंक पर बढ़ सकती है वित्तीय देनदारी, AT1 बॉन्ड निवेशकों पर भी असर।
प्राइवेट सेक्टर के यस बैंक (Yes Bank) को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने साल 2020 में बैंक के करीब 8,400 करोड़ रुपये के बॉन्ड को पूरी तरह खत्म करने के फैसले को पलट दिया है। इस फैसले के बाद बैंक पर नई वित्तीय देनदारी आने की आशंका बढ़ गई है। खबर सामने आते ही यस बैंक के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला उन निवेशकों से जुड़ा है, जिन्होंने यस बैंक के एडिशनल टियर-1 (AT1) बॉन्ड में पैसा लगाया था। साल 2020 में बैंक को वित्तीय संकट से बचाने के दौरान इन बॉन्ड की पूरी रकम राइट ऑफ कर दी गई थी।
क्या है पूरा मामला?
मार्च 2020 में यस बैंक गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रहा था। उस समय भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की निगरानी में बैंक को बचाने के लिए पुनर्गठन योजना लागू की गई थी।
इसी दौरान करीब 8,400 करोड़ रुपये के AT1 बॉन्ड को पूरी तरह राइट ऑफ कर दिया गया। आसान भाषा में समझें तो जिन निवेशकों ने इन बॉन्ड में पैसा लगाया था, उनकी निवेश की गई रकम शून्य कर दी गई थी।
साल 2023 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने प्रक्रिया में खामियों का हवाला देते हुए इस फैसले को रद्द कर दिया था। इसके बाद यस बैंक ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन अब शीर्ष अदालत ने भी बॉन्ड राइट ऑफ को पलट दिया है।
फैसले के बाद Yes Bank के शेयरों में भारी गिरावट
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर यस बैंक के शेयरों पर भी दिखाई दिया। बैंक का शेयर 14.2% तक गिरकर 18.20 रुपये पर पहुंच गया। अक्टूबर 2023 के बाद यह शेयर में सबसे बड़ी गिरावट रही।
ब्लूमबर्ग के मुताबिक, यस बैंक के पूर्व CEO प्रशांत कुमार ने 2023 में कहा था कि कानूनी सलाह के आधार पर बैंक ने इस विवाद से जुड़ी संभावित देनदारी के लिए कोई रकम अलग नहीं रखी थी।
AT1 बॉन्ड क्या होते हैं?
AT1 बॉन्ड ऐसे निवेश साधन हैं, जिनके जरिए बैंक अपनी पूंजी बढ़ाते हैं। आम बॉन्ड के मुकाबले इनमें जोखिम ज्यादा होता है।
अगर कोई बैंक गंभीर वित्तीय संकट में फंस जाता है और तय शर्तें पूरी होती हैं, तो इन बॉन्ड में निवेश की गई रकम घटाई या पूरी तरह खत्म की जा सकती है।
दूसरे बैंकों पर भी पड़ सकता है असर
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला भविष्य में संकटग्रस्त बैंकों को बचाने की प्रक्रिया पर असर डाल सकता है।
एंड्री लीगल के मैनेजिंग पार्टनर आशीष प्यासी के मुताबिक, यह फैसला भविष्य के बैंक पुनर्गठन मामलों के लिए एक मिसाल बन सकता है। हालांकि, सरकार और यस बैंक के पास सुप्रीम कोर्ट से फैसले की समीक्षा की मांग करने का विकल्प मौजूद है।
वहीं, रॉकफोर्ट फिनकैप के वेंकटकृष्णन श्रीनिवासन का कहना है कि इससे बॉन्ड निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है, लेकिन भविष्य में बैंकों के लिए पूंजी जुटाना महंगा भी हो सकता है।
