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रुपया सीमित दायरे में, RBI की खास डिपॉजिट सुविधा के आखिरी हफ्ते में $7 अरब फ्लो की उम्मीद

ब्लूमबर्ग के रिपोर्ट के मुताबिक घरेलू बाजार में इस सप्ताह विदेशी मुद्रा जमा से आने वाले प्रवाह पर खास ध्यान रहेगा, क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की विशेष डिपॉजिट सुविधा 31 अगस्त को खत्म हो रही है और अब इसका आखिरी चरण चल रहा है।

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रुपया सोमवार को एशियाई मुद्राओं के साथ सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। बाजार की नजर अमेरिका की ओर से ईरान पर संभावित प्रतिबंधों की घोषणा पर है। ब्लूमबर्ग के रिपोर्ट के मुताबिक घरेलू बाजार में इस सप्ताह विदेशी मुद्रा जमा से आने वाले प्रवाह पर खास ध्यान रहेगा, क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की विशेष डिपॉजिट सुविधा 31 अगस्त को खत्म हो रही है और अब इसका आखिरी चरण चल रहा है।

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आखिरी हफ्ते में $7 अरब के फ्लो की उम्मीद

USD/INR 95.7263 पर लगभग स्थिर रहा, जबकि 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड 2 बेसिस पॉइंट बढ़कर 6.87% हो गई। HDFC Securities के FX Analyst Dilip Parmar के मुताबिक, बाजार को डिपॉजिट सुविधा के आखिरी सप्ताह में करीब 7 अरब डॉलर के प्रवाह की उम्मीद है।

RBI का हालिया डेटा रुपये के लिए सकारात्मक है, लेकिन ईरान पर अमेरिका की संभावित कार्रवाई को लेकर अनिश्चितता के कारण बाजार सतर्क है।

RBI के हस्तक्षेप से सीमित दायरे में रुपया

विदेशी मुद्रा जमा बढ़ने के साथ RBI ने बाजार में हस्तक्षेप भी बढ़ाया है। इससे रुपये की चाल एक संकरे दायरे में रही है। हालांकि, Parmar के मुताबिक RBI का हस्तक्षेप बाजार की दिशा को बदलने की संभावना कम है। महंगा कच्चा तेल, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और विकसित अर्थव्यवस्थाओं में ऊंची बॉन्ड यील्ड अब भी बाजार की चाल तय कर रहे हैं।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पिछले सप्ताह कम से कम 80 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा प्रवाह की उम्मीद जताई थी। 14 अगस्त तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 716.9 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था।

बॉन्ड बाजार पर बढ़ा दबाव

विदेशी मुद्रा प्रवाह से बैंकिंग सिस्टम में नकदी बढ़ने के कारण बॉन्ड बाजार को फिलहाल कुछ सहारा मिला है। लेकिन RBI की मौद्रिक नीति बैठक के पिछले सप्ताह जारी अपेक्षा से ज्यादा सख्त रुख वाले मिनट्स ने बाजार धारणा पर दबाव डाला है।

पिछले सप्ताह बैंकिंग सिस्टम की अतिरिक्त नकदी करीब 4 लाख करोड़ रुपये के चार महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई थी, जो अब घटकर 3.1 लाख करोड़ रुपये रह गई है। RBI अतिरिक्त नकदी को सोखने के लिए रिवर्स रेपो नीलामी भी कर रहा है।

यील्ड कर्व में बढ़ सकती है तेजी

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, यील्ड कर्व में तेजी से ढलान बढ़ सकता है। आसान बैंकिंग लिक्विडिटी से छोटी अवधि की यील्ड को सहारा मिल सकता है, जबकि अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने और RBI के आने वाले महीनों में ब्याज दरें बढ़ाने के संकेत से लंबी अवधि की यील्ड पर दबाव बन सकता है। पिछले सप्ताह ग्लोबल फंड्स ने इंडेक्स-एलिजिबल बॉन्ड में 59,150 करोड़ रुपये की बिकवाली की।

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