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महंगा होगा लोन और ईएमआई! RBI ने बढ़ाया रेपो रेट- जानें आपकी EMI कितनी बढ़ेगी, यहां समझें पूरा गणित

RBI ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% कर दिया है। इस फैसले का असर होम लोन और दूसरी उधारी पर पड़ सकता है। वहीं, FD में निवेश करने वालों के लिए ब्याज दर बढ़ने की संभावना है। जानिए किसकी जेब पर कितना असर पड़ेगा।

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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आज तीन दिनों तक चली मौद्रिक नीति समिति (MPC) के फैसलों को सुनाते हुए रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाने का ऐलान किया। बीते चार साल में यह पहली बार है जब आरबीआई ने ब्याद दरों में बढ़ोतरी की  है। 

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इस बढ़ोतरी के बाद रेपो रेट अब 5.25% से बढ़कर 5.50% हो गया है। रेपो रेट के बढ़ने का सीधा असर आपके होम लोन की EMI और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के रिटर्न पर पड़ेगा।

रेपो रेट वह ब्याज दर होता है जिसपर आरबीआई देश के बैंकों को लोन देती है। बता दें कि ऐसी उम्मीद पहले से थी की आरबीआई महंगाई और क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए रेपो रेट को बढ़ा सकती है। 

रेपो रेट बढ़ाने के साथ-साथ आरबीआई ने पॉलिसी रुख को 'Neutral' से बदलकर 'Calibrated Tightening' कर दिया गया है. 'Calibrated Tightening' का मतलब है कि जरूरत पड़ने पर आगे भी ब्याज दरें बढ़ाई जा सकती हैं. 

क्यों लिया गया ये फैसला?

दरअसल अगस्त 2026 में खुदरा महंगाई दर 4.82 फीसदी रही थी। ये लगातार तीसरा महीना था जब महंगाई RBI के 4 फीसदी लक्ष्य से ऊपर बनी हुई थी। खाद्य वस्तुओं और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी के अलावा ये चिंता भी बढ़ रही थी कि महंगाई का दबाव अर्थव्यवस्था के दूसरे हिस्सों तक फैल सकता है। ऊंचे कच्चे तेल के दाम और वैश्विक अनिश्चितता ने भी RBI को सख्त रुख अपनाने के लिए मजबूर किया।

होम लोन वालों की जेब पर कितना पड़ेगा असर?

चूंकि अब जब आरबीआई ने रेपो रेट को बढ़ा दिया है ऐसे में अगर बैंक चाहे तो बढ़ी हुई रेपो रेट का पूरा असर ग्राहकों पर डाल सकते हैं। इससे होम लोन की ब्याज दर 0.25% तक बढ़ सकती है। उदाहरण के लिए, अगर आपने 25 साल की अवधि के लिए 7.50% ब्याज दर पर ₹50 लाख का होम लोन लिया है, तो अभी आपकी मासिक EMI करीब ₹36,950 है। ब्याज दर 0.25% बढ़कर 7.75% होने पर EMI बढ़कर करीब ₹37,766 हो सकती है। यानी आपको हर महीने करीब ₹817 ज्यादा चुकाने होंगे।

इस हिसाब से आपकी सालाना EMI करीब ₹9,800 बढ़ सकती है। वहीं, अगर पूरी 25 साल की अवधि में ब्याज दर 7.75% बनी रहती है, तो आपको करीब ₹2.45 लाख अतिरिक्त ब्याज चुकाना पड़ सकता है। हालांकि, रेपो रेट बढ़ने के तुरंत बाद हर ग्राहक की EMI नहीं बढ़ती। यह बदलाव बैंक की लोन रीसेट डेट पर लागू हो सकता है। कुछ बैंक EMI बढ़ाने के बजाय लोन की अवधि बढ़ाने का विकल्प भी चुनते हैं।

इसी तरह, अगर किसी ने 20 साल के लिए 8% सालाना ब्याज दर पर ₹50 लाख का होम लोन लिया है, तो उसकी EMI करीब ₹41,822 है। ब्याज दर 0.25% बढ़कर 8.25% होने पर EMI करीब ₹42,603 हो सकती है। यानी हर महीने लगभग ₹781 ज्यादा चुकाने पड़ सकते हैं।

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FD निवेशकों को हो सकता है फायदा

होम लोन ग्राहकों के उलट, बचत करने वालों और FD में पैसा लगाने वाले निवेशकों के लिए ब्याज दर बढ़ना फायदेमंद हो सकता है। अगर रेपो रेट बढ़ने के बाद बैंक FD की ब्याज दरों में भी 0.25% की बढ़ोतरी करते हैं, तो नई FD कराने वाले ग्राहकों को ज्यादा ब्याज मिल सकता है।

उदाहरण के लिए, अगर आप ₹10 लाख की FD एक साल के लिए 7% ब्याज दर पर कराते हैं, तो आपको करीब ₹70,000 ब्याज मिलेगा। वहीं, ब्याज दर बढ़कर 7.25% होने पर एक साल में ब्याज बढ़कर ₹72,500 हो जाएगा। यानी आपको सीधे ₹2,500 का अतिरिक्त फायदा मिल सकता है।

पुरानी FD पर नहीं पड़ेगा असर

ध्यान रखें कि पहले से चल रही FD की ब्याज दर में बदलाव नहीं होगा। नई ब्याज दर केवल नई FD कराने या पुरानी FD को मैच्योरिटी के बाद रिन्यू कराने पर लागू होगी।

अगर आप लंबी अवधि के लिए FD कराने की योजना बना रहे हैं, तो बैंक की डिपॉजिट रेट बढ़ने का इंतजार करना आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है। इससे आपको अपनी बचत पर पहले के मुकाबले ज्यादा ब्याज मिल सकता है।

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