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मिडिल ईस्ट युद्ध का भारत के रियल एस्टेट बाजार पर कितना असर?

ईरान-इजरायल संघर्ष और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सवाल उठ रहा है कि क्या भारत का रियल एस्टेट बाजार प्रभावित होगा। एक्सपर्ट्स का मानना है कि लागत बढ़ने और निवेशकों के सतर्क रुख से रफ्तार कुछ धीमी हुई है, लेकिन शहरीकरण, बढ़ती आय और सरकारी योजनाओं से मांग मजबूत बनी हुई है।

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AI Generated Image

Real Estate: मिडिल ईस्ट में एक बार फिर जंग शुरू हो गई है। ईरान और इजरायल के बीच तनावपूर्ण हालातों ने न केवल वैश्विक राजनीति को प्रभावित किया है, बल्कि इसकी आंच दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं तक भी पहुंच रही है। इस अनिश्चितता के बीच बड़ा सवाल यह है कि क्या यह ग्लोबल वॉर भारत के रियल एस्टेट बाजार की चमक फीकी कर सकता है या इसकी रफ्तार को धीमा कर सकता है?

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वैश्विक तनाव का असर और बाजार की चाल

BASIC Home Loan के अतुल मोंगा के अनुसार, भारत इस समय एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, 2036 तक देश की लगभग 40% आबादी यानी करीब 60 करोड़ लोग शहरों में बस जाएंगे। देश की GDP में 70% योगदान देने वाले इन शहरों का रियल एस्टेट बाजार सीधे तौर पर तरक्की का पैमाना है।

हालांकि, मिडिल ईस्ट का तनाव, सप्लाई चेन में बाधा और पेट्रोल-डीजल व बिजली की बढ़ती कीमतें भारत के प्रॉपर्टी बाजार पर असर डाल रही हैं। अतुल मोंगा का मानना है कि असर बहुत विनाशकारी नहीं है, लेकिन बाजार की रफ्तार थोड़ी धीमी जरूर हुई है। डेवलपर्स अब नए प्रोजेक्ट्स को लेकर बेहद फूंक-फूंककर कदम रख रहे हैं, जबकि निवेशक और खरीदार 'Wait & Watch' की नीति अपना रहे हैं।

बाजार रुका है, कमजोर नहीं हुआ

सीमेंट, स्टील और लेबर की लागत बढ़ने से निर्माण महंगा हो गया है, जिसके चलते कई बिल्डर्स ने नए प्रोजेक्ट्स को फिलहाल टाल दिया है। इसके बावजूद, लोगों की घर खरीदने की इच्छा कम नहीं हुई है। खरीदार ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव और नौकरी की सुरक्षा को लेकर जागरूक हैं, जिसके कारण वे जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय सोच-समझकर निर्णय ले रहे हैं।

घरों की मांग के पीछे के मजबूत फैक्टर्स

भारत में प्रॉपर्टी की मांग को लेकर एक्सपर्ट्स काफी पॉजिटिव हैं। इसके पीछे कई ठोस कारण हैं:

  • तेजी से शहरीकरण: गांवों और छोटे शहरों से बड़े शहरों की ओर पलायन।
  • बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर: नए हाईवे, एक्सप्रेसवे और मेट्रो लाइनों के विस्तार से नए इलाकों का उदय।
  • बढ़ती आय: प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी से घर खरीदने की क्षमता का विस्तार।
  • सरकारी समर्थन: सरकार की नीतियां, जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY), मध्यम और निम्न आय वर्ग के लिए मददगार साबित हो रही हैं।

लक्जरी घरों का जलवा बरकरार

दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों में लक्जरी घरों की मांग वैश्विक तनावों से लगभग अछूती है। इस सेगमेंट के खरीदार अक्सर बैंक लोन पर निर्भर नहीं होते और प्रॉपर्टी को एक सुरक्षित लॉन्ग टर्म निवेश के रूप में देखते हैं। दूसरी ओर, बजट घरों के सेगमेंट में खरीदार महंगाई और ब्याज दरों के प्रति थोड़े ज्यादा संवेदनशील हैं।

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