
भारत-रूस के बीच LNG पर बड़ी बातचीत, तेल के बाद अब इस सेक्टर में बढ़ सकती है साझेदारी
भारत और रूस के बीच ऊर्जा कारोबार का दायरा और बढ़ सकता है। दोनों देश अब LNG को लेकर बातचीत कर रहे हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में रूसी अधिकारी ने इसकी पुष्टि की है। इस बीच तेल कारोबार और स्थानीय मुद्राओं में भुगतान से जुड़े आंकड़े भी दोनों देशों की बढ़ती आर्थिक साझेदारी की तस्वीर दिखाते हैं।

In Short
- भारत और रूस के बीच LNG को लेकर बातचीत चल रही है
- 2026 की पहली छमाही में रूसी क्रूड एक्सपोर्ट 17% बढ़ा
- भारत-रूस के 96% भुगतान अब राष्ट्रीय मुद्राओं में हो रहे हैं
भारत और रूस के बीच ऊर्जा कारोबार को लेकर एक और बड़ा कदम सामने आया है। दोनों देश अब LNG यानी Liquefied Natural Gas को लेकर बातचीत कर रहे हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, रूस के डिप्टी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव इन इंडिया Evgeniy Griva ने Vladivostok में आयोजित Eastern Economic Forum के दौरान इसकी जानकारी दी है। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि दोनों देशों के बीच LNG को लेकर किस स्तर पर बातचीत चल रही है और संभावित सप्लाई कितनी हो सकती है।
LNG कारोबार बढ़ाने पर बातचीत
भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा आयातकों में शामिल है और अपनी गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है। ऐसे में रूस के साथ LNG सप्लाई को लेकर संभावित समझौता भारत के लिए ऊर्जा स्रोतों में विविधता बढ़ाने का एक और रास्ता बन सकता है।
रूस पहले से ही भारत के लिए कच्चे तेल का एक प्रमुख सप्लायर बन चुका है। अब LNG को लेकर चल रही बातचीत से संकेत मिल रहे हैं कि दोनों देश तेल के अलावा गैस कारोबार को भी आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

रूस से तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट का आयात बढ़ा
रूसी अधिकारी के मुताबिक, साल 2026 की पहली छमाही में रूस के कच्चे तेल के निर्यात में 17 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का निर्यात भी 13 फीसदी बढ़ा है।
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में रूस से बड़ी मात्रा में क्रूड ऑयल खरीदा है। वैश्विक बाजार में सप्लाई और कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच रूसी तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए महत्वपूर्ण स्रोत बना हुआ है।
96% भुगतान अब राष्ट्रीय मुद्राओं में
भारत और रूस के व्यापार की एक और खास बात भुगतान व्यवस्था में हुआ बदलाव है। Griva के मुताबिक, दोनों देशों के बीच होने वाले करीब 96 फीसदी भुगतान अब राष्ट्रीय मुद्राओं में किए जा रहे हैं।
इस भुगतान व्यवस्था में रूस के 22 बैंक और भारत के 17 बैंक शामिल हैं। इसका मतलब है कि दोनों देशों के व्यापार में डॉलर जैसी तीसरी मुद्रा पर निर्भरता काफी कम हुई है।
ऊर्जा साझेदारी का दायरा बढ़ने के संकेत
रूस हाल के समय में अपने LNG एक्सपोर्ट को बढ़ाने की कोशिश भी कर रहा है। वहीं भारत लगातार अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के लिए नए और प्रतिस्पर्धी सप्लाई विकल्प तलाश रहा है। ऐसे में LNG को लेकर जारी बातचीत अगर किसी बड़े समझौते तक पहुंचती है तो भारत-रूस ऊर्जा साझेदारी का दायरा क्रूड ऑयल से आगे बढ़ सकता है।
