रसोई पर महंगाई की मार, चीनी 70 रुपये किलो तक पहुंची; प्याज दाल और तेल भी महंगे
रसोई का बजट महंगाई की मार झेल रहा है। पिछले कुछ दिनों में चीनी, प्याज, दाल और खाने के तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। चीनी 70 रुपये किलो तक पहुंच गई है। सरकार सप्लाई बढ़ाने, स्टॉक लिमिट तय करने और बफर स्टॉक से राहत देने की तैयारी में है।

In Short
- पिछले एक हफ्ते में चीनी प्याज दाल और खाने के तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई।
- चीनी के दाम 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंचे सरकार ने आयात और स्टॉक लिमिट जैसे कदम उठाए।
- प्याज दाल और खाद्य तेलों की कीमतों पर मानसून और ग्लोबल मार्केट का असर दिख रहा है।
रसोई का बजट अब और बढ़ सकता है। पिछले एक हफ्ते के दौरान देशभर में खाने-पीने की कई जरूरी चीजें महंगी हुई हैं। चीनी के साथ प्याज, दाल और खाने के तेल की कीमतों में तेजी आई है। सरकार कीमतों को काबू में करने के लिए कदम उठा रही है, लेकिन महंगाई को लेकर चिंता बनी हुई है।
चीनी 70 रुपये किलो तक पहुंची
पिछले एक हफ्ते में चीनी की कीमतों में 7 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है। वहीं एक महीने के दौरान इसके दाम करीब 17 रुपये प्रति किलो बढ़े हैं। इसके बाद चीनी की कीमत 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।
चीनी की कीमतों को काबू में करने के लिए सरकार तीन स्तरों पर काम कर रही है। बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए 31 अक्टूबर तक ड्यूटी फ्री 10 लाख टन चीनी के आयात की मंजूरी दी गई है।
जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक लिमिट
सरकार ने चीनी की जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक सीमा भी तय कर दी है। कारोबारियों के लिए 30 नवंबर तक 400 टन की स्टॉक लिमिट तय की गई है।
इसके अलावा घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए चीनी मिलों से इस बार 15 अक्टूबर से ही पेराई शुरू करने को कहा गया है। इसका मकसद नई फसल आने के बाद त्योहारों तक बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध कराना है।
प्याज की कीमतों में भी तेजी
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 21 अगस्त को प्याज का औसत खुदरा भाव 40.79 रुपये प्रति किलो था। एक सप्ताह पहले यह 36.56 रुपये और एक महीने पहले 34.87 रुपये प्रति किलो था।
इस तरह प्याज की कीमतों में 4 से 5 रुपये प्रति किलो तक बढ़ोतरी हुई है। कुछ जगहों पर दाम करीब 25 फीसदी तक बढ़े हैं। इसकी बड़ी वजह खरीफ प्याज की नई फसल की आवक में देरी बताई गई है।
दालों पर भी महंगाई का असर
पिछले एक महीने में अरहर, मूंग, उरद और चना जैसी दालों की कीमतों में 1 से 2 रुपये तक की तेजी आई है। इसके पीछे मानसून को बड़ी वजह माना जा रहा है।
इस साल दलहन की बुआई का रकबा पिछले साल से 35 हजार हेक्टेयर कम है। अरहर की बुआई का रकबा भी 1.69 लाख हेक्टेयर कम है। ऐसे में कमजोर मानसून की आशंका से दालों की कीमतों में आगे और तेजी आ सकती है।
खाने के तेल भी हुए महंगे
अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम ऑयल की कीमतें 20 महीने के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं। इंडोनेशिया में सूखे की स्थिति के कारण इसकी कीमतों में तेजी आई है।
भारत पाम ऑयल का आयात करता है और अभी आयात कम होने से इसके दाम बढ़े हैं। सूर्यमुखी तेल के आयात पर भी रूस-यूक्रेन युद्ध का असर पड़ा है। पिछले एक महीने में खाने के तेल की कीमतों में 2 से 3 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है।

