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महंगी हुई बैंकिंग! 5 साल में डेबिट कार्ड मेंटेनेंस चार्ज में 90% तक उछाल

सरकार की ओर से संसद में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच साल में सरकारी बैंकों (PSBs) द्वारा डेबिट कार्ड पर वसूले जाने वाले फीस में करीब 90% की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, न्यूनतम बैलेंस नहीं रखने पर सरकारी और निजी बैंकों द्वारा वसूला जाने वाले टोटल फीस भी पिछले चार साल में बढ़ा है।

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भारत में बैंक खाता रखने और डेबिट कार्ड इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों के लिए बैंकिंग सेवाएं लगातार महंगी होती जा रही हैं। सरकार की ओर से संसद में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच साल में सरकारी बैंकों (PSBs) द्वारा डेबिट कार्ड पर वसूले जाने वाले फीस में करीब 90% की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, न्यूनतम बैलेंस नहीं रखने पर सरकारी और निजी बैंकों द्वारा वसूला जाने वाले टोटल फीस भी पिछले चार साल में बढ़ा है।

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डेबिट कार्ड का मेंटेनेंस चार्ज तेजी से बढ़ा

वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, देश के 12 सरकारी बैंकों ने वित्त वर्ष 2021-22 में डेबिट कार्ड के एनुअल मेंटेनेंस चार्ज के रूप में 3,905.5 करोड़ रुपये वसूले थे। यह राशि 2025-26 में बढ़कर 7,563.8 करोड़ रुपये हो गई, यानी करीब 94% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

रिजर्व बैंक (RBI) के डेबिट कार्ड जारी करने के आंकड़ों के आधार पर किए गए एनालिसिस के मुताबिक, प्रति डेबिट कार्ड औसत मेंटेनेंस चार्ज 2021-22 में करीब 61 रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 115.1 रुपये प्रति कार्ड हो गया। यानी प्रति कार्ड शुल्क में करीब 88.8% की बढ़ोतरी हुई।

कम बैलेंस रखने पर भी बढ़ी वसूली

राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में वित्त मंत्रालय ने न्यूनतम औसत बैलेंस (Minimum Average Balance) नहीं रखने पर बैंकों द्वारा वसूले गए शुल्क का भी ब्यौरा दिया। इसके अनुसार, सरकारी और निजी बैंकों ने 2025-26 में इस मद में कुल 7,086.6 करोड़ रुपये वसूले, जो 2022-23 के मुकाबले 27% अधिक है।

निजी बैंकों ने बढ़ाया ज्यादा शुल्क

आंकड़ों से यह भी सामने आया कि कम बैलेंस पर बढ़ी वसूली की मुख्य वजह निजी बैंक रहे। 2022-23 की तुलना में 2025-26 तक निजी बैंकों का प्रति खाते औसत कम बैलेंस शुल्क करीब 45% बढ़ गया। इसके उलट सरकारी बैंकों का यही शुल्क करीब 14% घटा है।

जनधन खातों पर नहीं लगता यह चार्ज

वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट (BSBDA) और प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) के तहत खोले गए खातों पर न्यूनतम बैलेंस नहीं रखने का शुल्क नहीं लगाया जाता।

10 सरकारी बैंकों ने हटाया जुर्माना

वित्त मंत्रालय के अनुसार, 12 सरकारी बैंकों में से 10 बैंकों ने बचत खातों में न्यूनतम औसत बैलेंस नहीं रखने पर लगने वाला जुर्माना पूरी तरह खत्म कर दिया है। बाकी दो बैंकों ने अपनी बोर्ड से मंजूर नीतियों और व्यावसायिक जरूरतों के अनुसार इन शुल्कों में बदलाव किया है।

सरकार ने यह भी बताया कि RBI ने बैंकों को निर्देश दिया है कि न्यूनतम बैलेंस की कमी होने पर ग्राहकों को SMS, ईमेल, पत्र या अन्य माध्यमों से पहले सूचना दी जाए। आमतौर पर ग्राहकों को जरूरी न्यूनतम बैलेंस बहाल करने का समय दिया जाता है, उसके बाद ही पेनल्टी लगाई जाती है।

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