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मेट्रो नहीं, अब इस सिस्टम पर दांव? गडकरी ने बताया कैसे घटेगी पब्लिक ट्रांसपोर्ट की लागत

भारत के छोटे और मझोले शहरों में महंगी मेट्रो के बजाय सस्ते और प्रदूषण मुक्त पब्लिक ट्रांसपोर्ट का विकल्प तैयार करने पर काम हो रहा है। नितिन गडकरी ने फ्लैश चार्जिंग इलेक्ट्रिक बसों का मॉडल सामने रखते हुए कहा कि इससे लागत काफी कम हो सकती है और ज्यादा यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल सकती है।

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Nitin Gadkari
Nitin Gadkari

In Short

  • भारत में प्रति 1,000 लोगों पर अभी सिर्फ 2 बसें हैं जबकि जरूरत 8 बसों की बताई गई
  • अगले तीन साल में करीब 1.5 लाख इलेक्ट्रिक बसों की जरूरत, मैन्युफैक्चरिंग क्षमता तीन गुना बढ़ाने पर जोर
  • फ्लैश चार्जिंग बस 15 सेकेंड में चार्ज होकर 18 घंटे तक दे सकती है सेवा

भारत के ट्रांसपोर्ट सिस्टम में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बेहतर बनाना सबसे बड़ी जरूरतों में से एक है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि देश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है। खासकर छोटे और मझोले शहरों के लिए ऐसा ट्रांसपोर्ट सिस्टम तैयार करना जरूरी है, जो कम लागत वाला होने के साथ प्रदूषण मुक्त और देश में ही तैयार किया गया हो।

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मेट्रो पर खर्च बहुत ज्यादा

गडकरी के मुताबिक मेट्रो बनाने की लागत प्रति किलोमीटर 350 करोड़ रुपये से ज्यादा बैठती है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों के लिए यह संभव हो सकता है, लेकिन दूसरे और तीसरे स्तर के शहरों के लिए इतनी महंगी व्यवस्था आसान नहीं है। इसलिए सरकार ऐसे विकल्प पर काम कर रही है जिसकी लागत कम हो और वह ज्यादा यात्रियों को सुविधा दे सके।

भारत में बसों की संख्या काफी कम

उन्होंने बताया कि भारत में अभी प्रति एक हजार लोगों पर सिर्फ दो बसें हैं, जबकि वैश्विक मानक के मुताबिक यह संख्या आठ बस होनी चाहिए। देश में अभी बस बनाने की क्षमता करीब 70 हजार बस सालाना है और इस सेक्टर का टर्नओवर करीब 35 हजार करोड़ रुपये है।

अगले तीन साल में देश को करीब 1.5 लाख इलेक्ट्रिक बसों की जरूरत होगी। ऐसे में बस मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को लगभग तीन गुना बढ़ाने की जरूरत है।

Image Credit: AAJ TAK

15 सेकेंड में चार्ज होने वाली बसों पर काम

गडकरी ने नागपुर में फ्लैश चार्जिंग वाली आर्टिकुलेटेड इलेक्ट्रिक बसों का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल चुकी है। इसमें 25 से ज्यादा बसें होंगी। इन बसों की लंबाई करीब 18 मीटर होगी और एक बस में लगभग 130 यात्री सफर कर सकेंगे।

इन बसों की खास बात यह है कि इन्हें चार्ज होने में केवल 15 सेकेंड लगेंगे और ये लगातार 18 घंटे तक सेवा दे सकेंगी। कई कंपनियां अब इस सिस्टम में दिलचस्पी दिखा रही हैं।

बिजली की लागत घटाने का भी प्लान

गडकरी ने कहा कि इलेक्ट्रिक पब्लिक ट्रांसपोर्ट में बिजली की कीमत बड़ी चुनौती है। इसके लिए सोलर पावर कंपनियों के साथ पावर परचेज एग्रीमेंट यानी PPA करके चार से पांच रुपये प्रति यूनिट की दर पर बिजली ली जा सकती है। साथ ही दो से तीन मेगावाट की बैटरी स्टोरेज व्यवस्था भी बनाई जा सकती है।

उनके मुताबिक इससे बस ट्रांसपोर्ट की लागत मौजूदा डीजल बसों की तुलना में करीब 30 फीसदी कम हो सकती है।

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350 करोड़ के मुकाबले 2 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर

गडकरी ने कहा कि मेट्रो की लागत जहां करीब 350 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर है, वहीं इसी क्षमता वाले इस तरह के पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम की लागत करीब दो करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर हो सकती है। उनका मानना है कि बड़े शहरों में इस तरह की व्यवस्था और पहाड़ी इलाकों में रोपवे, केबल कार और फ्यूनिक्युलर रेलवे जैसे विकल्प भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।