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Car Sunroof: क्यों दिया जाता है कार में सनरूफ? जानिए इसका सही इस्तेमाल और जरूरी बातें

सनरूफ आज कारों का पसंदीदा फीचर बन चुका है। फिल्मों से प्रेरित होकर लोग इसे अलग अंदाज में इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इसका असली मकसद कार के केबिन में फ्रेश एयर और नेचुरल लाइट पहुंचाना है। जानिए सनरूफ कितने तरह के होते हैं, इसके फायदे नुकसान और आफ्टरमार्केट सनरूफ से जुड़े खतरे।

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In Short

  • फिल्मों में दिखने वाले स्टंट के लिए नहीं, कार के केबिन को हवादार और खुला बनाने के लिए होता है सनरूफ।
  • रेगुलर सनरूफ, पैनोरमिक सनरूफ और मूनरूफ में क्या है अंतर, जानिए।
  • आफ्टरमार्केट सनरूफ लगवाने से लीकेज और इलेक्ट्रिकल फॉल्ट जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

आजकल कारों में सनरूफ का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। पहले यह फीचर सिर्फ महंगी और लग्जरी कारों में देखने को मिलता था, लेकिन अब 10 लाख रुपये से कम कीमत वाली कारों में भी सनरूफ उपलब्ध है। फिल्मों में अक्सर लोगों को सनरूफ से बाहर निकलकर हवा का मजा लेते हुए दिखाया जाता है, लेकिन असल में सनरूफ का इस्तेमाल इसके लिए नहीं किया जाता।

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सनरूफ का असली काम क्या है?

सनरूफ कार के लुक को बेहतर बनाने के साथ केबिन को ज्यादा हवादार और खुला महसूस कराने में मदद करता है। इससे कार के अंदर फ्रेश एयर वेंटिलेशन मिलता है। सर्दियों में धूप का आनंद लेने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। कुछ परिस्थितियों में इसे इमरजेंसी एग्जिट के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

कितने तरह के होते हैं सनरूफ?

रेगुलर सनरूफ

रेगुलर सनरूफ में इलेक्ट्रिकली ऑपरेट होने वाला ग्लास पैनल होता है। इसमें टिंटेड शेड भी दिया जाता है, जो तेज धूप में केबिन को गर्म होने से बचाने में मदद करता है। यह मुख्य रूप से कार के फ्रंट सीट वाले रूफ एरिया को कवर करता है।

पैनोरमिक सनरूफ

पैनोरमिक सनरूफ आकार में बड़ा होता है और कार की पिछली सीट से लेकर फ्रंट रूफ एरिया तक फैला रहता है। इसमें एक से ज्यादा पैनल हो सकते हैं। कुछ पैनल फिक्स होते हैं जबकि कुछ ऑपरेट किए जा सकते हैं। इससे कार के अंदर बैठकर दिन और रात दोनों समय बाहर के नजारों का आनंद लिया जा सकता है।

मूनरूफ

मूनरूफ का इस्तेमाल शुरुआती दौर की कारों में ज्यादा देखने को मिलता था। इसे स्लाइड करने के साथ टिल्ट भी किया जा सकता था, जिससे केबिन में फ्रेश एयर आती थी। हालांकि अब इसका चलन काफी कम हो गया है।

सनरूफ के फायदे और नुकसान

सनरूफ कार को स्पोर्टी लुक देने के साथ बेहतर वेंटिलेशन में मदद करता है। वहीं बारिश या आंधी के दौरान इसे खोलने पर पानी और धूल केबिन में आ सकती है। पुराने वाहनों में सनरूफ से लीकेज की समस्या भी देखने को मिल सकती है।

(Photo: Aaj Tak)

भारत में कब आया सनरूफ?

ग्लोबल मार्केट में सनरूफ का इस्तेमाल काफी पुराना है। साल 1937 में नैश कार में पहली बार सनरूफ फीचर शामिल किया गया था। भारत में इसका इस्तेमाल नब्बे के दशक के आखिरी वर्षों में देखने को मिला, जब स्कोडा और ओपल जैसी कंपनियों ने अपनी कारों में यह फीचर दिया।

आफ्टरमार्केट सनरूफ लगवाना कितना सही?

कई लोग अपनी कार में बाद में बाजार से सनरूफ लगवाते हैं। हालांकि ऐसा करना सही नहीं माना जाता। कंपनी से मिलने वाले सनरूफ को कार की बॉडी और मजबूती को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जाता है। आफ्टरमार्केट सनरूफ से लीकेज और इलेक्ट्रिकल फॉल्ट जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

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क्या सनरूफ से कार की परफॉर्मेंस प्रभावित होती है?

सनरूफ से कार की मजबूती पर कोई ठोस प्रभाव पड़ता है, ऐसा कहना सही नहीं है। आधुनिक कारों में ए, बी, सी और डी पिलर्स को मजबूत बनाया जाता है, जो छत पर पड़ने वाले फोर्स को संभालने में मदद करते हैं। हालांकि सनरूफ से वाहन का वजन बढ़ सकता है और इससे स्पीड या माइलेज पर असर पड़ने की संभावना बताई जाती है।