अब कहां जाकर थमेगा Iran-Israel तनाव?
ईरान- इजराइल के हमले ने पूरे विश्व में तबाही मचाने का आगाज कर दिया है। अगर समय रहते इस युद्ध को ना रोका गया तो वैश्विक मंदी से पूरे विश्व की मुसीबते बढ़ेगी। वैश्विक बाजार में हलचल बढ़ गई है, जहॉ शेयर बाजार में लगातार गिरावटें देखी जा रही हैं।

Iran-Israel के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव के बीच अब ये सीधे संघर्ष मे बदल गया है। अप्रैल के पहले हफते में इजराइल ने दमिश्म में ईरानी वाणिज्य दूतावास पर बमबारी की, जिसमे कई वरिष्ठ ईरानी अधिकारी मारे गए। इस हमले के जबाब में, ईरान और उसके प्रतिनिधियों ने 13 अप्रैल को इजराइल के अंदर हमले शुरु किए, जिसके बाद ईरान ने इजराइल पर अधिक सख्त रुख अपना लिया है और अब युध्द की स्थिति बनती ही जा रही है।
आखिर क्य़ों बनी युद्ध की स्थिती?
दोनो देशो के बीच मतभेद की शुरुआत 1982 से हुई, जब ईरान ने लेबनान युद्ध के दौरान लेबनानी शिया और फिलिस्तीनी आतंकवादी ‘हमास’ का आंशिक रुप से समर्थन किया था। ईरान लगातार अपनी शक्ति और प्रभाव को बढ़ाते चला गया, जिससे परेशान इजरायल के मन में खतरे की घंटी बज गई, बात तो तब और तनावपूर्ण हो गया जब फिलिस्तीनी आतंकवादी संगठन हमास ने इजराइल पर हमला कर दिया और लगभग 1200 इजराइली मारे गए और इजराइल–हमास युद्ध छिड़ गया। इसके बाद हिजबुल्लाह के साथ भी झड़प हुई। हमले के बाद इजराइल प्रतिशोध के रुप में सीरीया में ईरानी और प्रॉक्सी सैनिकों को निशाना बनाना शुरु कर दिया, जिसके बाद युद्ध की आशंकाए बढ़ गई।
ईरान–इजराइल युद्ध से बढ़ी तीन देशों की परेशानी...
ईरान और इजराइल के बीच की दूरी काफी ज्यादा है, जिसमे तीन देशों को पार करना पड़ता है जो ईराक, सीरिया और जॉर्डन है। समस्या यह है कि अगर युद्ध को समय रहते ना रोका गया तो इन देशो की समस्या भी बढ़ेंगी, क्योंकि युद्ध की स्थिती में वायु,जल,थल तीनों का प्रयोग होगा और इसका प्रभाव इन देशों को भी भुगतना पड़ेगा।
विश्व पर इस युद्ध का प्रभाव....
ईरान- इजराइल के बीच संभावित युद्ध ने पूरी दुनिया को असमंजस में डाल दिया है। इजराइल के समर्थक देश या ईरान के समर्थक देश कोई भी नहीं चाहता कि युद्ध की स्थिति बने, क्योंकि सबको पता है कि इसका प्रभाव पूरे विश्व में किसी न किसी रुप में पड़ेगा। ईरान मे स्थित “स्ट्रेट ऑफ होर्मुज” एक ऐसा रास्ता है जिससे पुरी दुनिया में फ्युल सप्लाई होता है, उसी रास्ते से साऊदी अरब , इराक और यु ए ई से कच्चे तेल की शिपमेंट गुजरते है, अगर मिडिल ईस्ट की टेंशन में ईरान ने इस रास्ते को रोक दिया तो, पूरा देश को तेल के संकट से गुजरना पड़ेगा। “स्ट्रेट ऑफ होर्मुज” के रास्ते से दुनिया को एक तिहाई एल एन जी सप्लाई होता है, मतलब अगर बात कच्चे तेल की करे तो 25 प्रतिशत क्रुड इसी रास्ते से जाते है।
वैश्विक बाजार की बढ़ेगी मुसीबतें...
ईरान- इजराइल के हमले ने पूरे विश्व में तबाही मचाने का आगाज कर दिया है। अगर समय रहते इस युद्ध को ना रोका गया तो वैश्विक मंदी से पूरे विश्व की मुसीबते बढ़ेगी। वैश्विक बाजार में हलचल बढ़ गई है, जहॉ शेयर बाजार में लगातार गिरावटें देखी जा रही हैं। वही सुरक्षित निवेश के बेहतर विकल्प माने जाने वाले गोल्ड और डॉलर में तेजी है। तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमत भी आसमान छु रहा है। कच्चा तेल 90 डॉलर के ऊपर पहुच गया है तो गोल्ड का भाव 2400 डॉलर के ऊपर चल रहा है। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स भी 106 के ऊपर पहुच गया है। डॉलर और कच्चे तेल में तेजी की वजह से रुपए पर भी दबाब है और रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर लुढ़क गया है।