यूक्रेन युद्ध होगा समाप्त, इकोनॉमी को मिलेगा बूस्ट?
एक तरफ यूक्रेन युद्ध हो रहा है दूसरी तरफ भारत इस साल जी20 की मेजबानी कर रहा है। जी-20 की अध्यक्षता के जरिए भारत को दुनियाभर के देशों के सामने ब्रैंड इंडिया की छवि मजबूत बनाने का मौका मिल रहा है। पहली बार भारत जी20 देशों की अध्यक्षता कर रहा है और भारत के कई हिस्सों में जी20 समिट का आयोजन हो चुका है।

यूक्रेन युद्ध होगा समाप्त, इकोनॉमी को मिलेगा बूस्ट?
एक तरफ यूक्रेन युद्ध हो रहा है दूसरी तरफ भारत इस साल G20 की मेजबानी कर रहा है। जी-20 की अध्यक्षता के जरिए भारत को दुनियाभर के देशों के सामने ब्रैंड इंडिया की छवि मजबूत बनाने का मौका मिल रहा है। पहली बार भारत जी20 देशों की अध्यक्षता कर रहा है और भारत के कई हिस्सों में जी20 समिट का आयोजन हो चुका है। ऐसे में यूक्रेन भी चाहता है कि भारत जी20 में अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए युद्ध को समाप्त करने की दिशा में कदम उठाएं। वहीं भारत भी जी20 के विभिन्न शहरों में किए जा रहे आयोजन के जरिए पूरी दुनिया को बताना चाहता है कि भारत अब वैश्विक स्तर पर एक बड़ी भूमिका के लिए तैयार है।
मई में जब से यूक्रेन युद्ध हुआ उसके बाद से पूरी दुनिया के शेयर बाज़ारों में गिरावट देखी गई। साल 2022 में भारतीय शेयर बाजार भी करीब 14 प्रतिशत गिर गया था। ऐसे में पूरी दुनिया को उम्मीद है कि अगर युद्ध खत्म होता है तो इससे यूक्रेन-रूस के अलावा भारत को भी फायदा होगा।
भुवनेश्वर की किट यूनिवर्सिटी में जी20 सम्मेलन में हिस्सा लेने आईं यूक्रेन की सांसद यूलिया क्लीमेंका का मानना है कि भारत एक बहुत बड़ी इकोनॉमी है और भारत को अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए युद्ध को खत्म करने की दिशा में कदम उठाने चाहिए।
यूक्रेन दुनिया के 10 प्रतिशत गेंहू निर्यात करता है। साथ ही यूक्रेन मक्का के वैश्विक व्यापार में भी 15 प्रतिशत भागीदार है। वह दुनिया का आधा सूरजमुखी का तेल बनाता है। युद्ध के कारण दुनिया में गेहूं और सूरजमुखी तेल की किल्लत ला दी है।संयुक्त राष्ट्र के खाद्य आपूर्ति कार्यक्रम बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं।
भारत ने जी20 के फोरम पर भी कई बार कहा कि वो युद्ध का समर्थक नहीं है और रूस-यूक्रेन को आपस में बातचीत करके इसको सुलझाना चाहिए। लेकिन अभी तक दोनों देशों के बीच ऐसे कोई संकेत नहीं मिले हैं जिससे लगे कि युद्ध खत्म होने वाला है। अमेरिका और दूसरे पश्चिमी देशों को हर महीने कई अरब डॉलर यूक्रेन को मदद के रूप में देने पड़ रहे हैं वहीं अमेरिका और यूरोप महंगाई की मार से भी जूझ रहे हैं। यही वजह है कि शेयर बाज़ार भी इस बात का इंतजार कर रहा है कि कब ये युद्ध खत्म हो और कब बाजार में रौनक लौटे।