Industrialist Anand Mahindra: ने यूरोप को क्यों कहा पाखंडी?
Industrialist Anand Mahindra के ट्वीट हमेशा से प्रेरणा और सोशल मैसेज से भरे होते हैं। लेकिन इस बार उन्होंने यूरोप के देशों को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने अपने ट्वीटर हैंडल से एक ट्वीट कर लिया कि यूरोप दोगला है। आनंद महिंद्रा को ऐसे ट्वीट करने की जरूरत क्यों पड़ी? इसका कारण जानेंगे तो आप भी हैरान रह जाएंगे। इससे पहले आपको समझना होगा एनालिटिक फर्म केप्लर (Kpler) की बड़ी रिपोर्ट, जिसने यूरोप की पोल खोल कर रख दी है।

जाने माने Industrialist Anand Mahindra के Tweet हमेशा से प्रेरणा और सोशल मैसेज से भरे होते हैं। लेकिन इस बार उन्होंने Europe के देशों को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने अपने Twitter Handle से एक ट्वीट कर लिया कि यूरोप दोगला है। आनंद महिंद्रा को ऐसे ट्वीट करने की जरूरत क्यों पड़ी? इसका कारण जानेंगे तो आप भी हैरान रह जाएंगे। इससे पहले आपको समझना होगा Analytics Firm Kpler की बड़ी रिपोर्ट, जिसने यूरोप की पोल खोल कर रख दी है। इस रिपोर्ट आने बाद सिर्फ आनंद महिंद्रा नहीं बल्कि पूरी दुनिया चौंक गई है।
थोड़ा पीछे चलते हैं, जब Ukraine पर Russia ने हमला किया तो दुनिया के कई देश Russia से नाराज हो गए और रूस पर कई तरह के प्रतिबंध भी लगा दिए। इसमें से एक प्रतिबंध था कि रूस से यूरोपिय देश तेल नहीं खरीदेंगे। सोचिए इस रोक को लगाने से पहले तक यूरोप रूस से अपनी जरूरत का 30 प्रतिशत तेल खरीदता था, जो कि कम मात्रा नहीं होती है। माना जा रहा था कि यूरोप के देशों के इस फैसले के बाद वहां Crude की भारी मात्रा में दिक्कत हो सकती है। पहले से ही यूक्रेन और रूस युद्ध के चलते महंगाई ने दुनिया के देशों की कमर तोड़ दी थी।
रूस का Crude Oil सीधे यूरोप तक न पहुंचने की वजह से वहां की तेल Refining कंपनियों के सामने प्रोडक्शन की बड़ी समस्या पैदा हो गई है। सोचिए जिस यूरोप ने भारत से इसलिए नाराजगी जताई थी क्योंकि वो रूस से Discount पर तेल खरीद रहा था। उसी यूरोप ने इस समस्या से उभरने के लिए भारत से मदद मांगी। भारत हमेशा से मददगार रहा है, इसलिए भारत की ओर से मदद की गई।
केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक भारत से यूरोप का रिफाइंड ईंधन इंपोर्ट हर दिन 3 लाख 60 हजार बैरल से ज्यादा होने वाला है। पिछले साल जनवरी तक भारत से European Union के देशों में रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का इंपोर्ट लगातार पांच महीने तक बढ़ता रहा। इस महीने ये 19 लाख टन के करीब पहुंच गया है। इसी बात पर आनंद महिंद्रा ने यूरोप को कड़े हाथों लिया है। उन्होंने लिखा, पाखंड का दाम बहुत ऊंचा होता है। भारत शुरू से इस मामले में अपनी बाध्यताओं को लेकर पारदर्शी रहा है। महिंद्रा ने अपने इस ट्वीट में देश के विदेश मंत्री S Jaishankar को भी टैग किया है।
लेकिन यूरोप के लिए ये राह आसान नहीं है। रूस के बजाए भारत से तेल खरीदना यूरोपीय देशों के लिए दोधारी तलवार जैसा है। रूस जो यूरोप का टॉप तेल सप्लायर था, उससे तेल मंगाना यूरोपीय देशों के लिए सस्ता पड़ता था लेकिन भारत से रिफाइंड तेल मंगाना उन्हें काफी महंगा पड़ रहा है। खबरों के मुताबिक यूरोप भारत और Saudi Arab से हर दिन करीब 5 लाख बैरल तेल खरीद रहा है। जो उसे बहुत भारी पड़ रहा है।