बिना LPG/PNG के इस इलेक्ट्रिक स्टोव से निकल रही फ्लेम! जानिए इंडक्शन से कितना है अलग?

प्लाज्मा स्टोव एक नई तकनीक है जो बिजली से तेज गर्मी पैदा कर बिना गैस के खाना बनाने का दावा करती है। यह इंडक्शन से अलग है और गैस जैसी लौ देता है। हालांकि, यह अभी शुरुआती चरण में है और लागत, सुरक्षा व बिजली खपत जैसी चुनौतियां बाकी हैं।

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By Gaurav Kumar:

भारतीय रसोई में LPG गैस का इस्तेमाल दशकों से रोजमर्रा का हिस्सा रहा है। लेकिन अब एक नई तकनीक, प्लाज्मा कुकिंग स्टोव तेजी से चर्चा में है, जो बिना गैस सिलेंडर या पाइप्ड गैस के खाना बनाने का दावा करती है। सोशल मीडिया पर इसके डेमो वीडियो वायरल होने के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या भविष्य में रसोई गैस की जगह यह तकनीक ले सकती है।

क्या है प्लाज्मा स्टोव?

इस तकनीक का आधार ‘प्लाज्मा’ है। जब किसी गैस को बहुत ज्यादा ऊर्जा दी जाती है, तो उसके इलेक्ट्रॉन अलग हो जाते हैं और एक अत्यधिक ऊर्जा वाला आयनाइज्ड स्टेट बनता है जिसे प्लाज्मा कहते हैं।

प्लाज्मा स्टोव में बिजली के जरिए एक प्लाज्मा आर्क (arc) या जेट बनाया जाता है, जो तेज गर्मी पैदा करता है। यह गर्मी देखने में गैस की नीली लौ जैसी लगती है, लेकिन इसमें LPG या PNG जैसे किसी ईंधन का इस्तेमाल नहीं होता।

क्यों बढ़ रही है दिलचस्पी?

भारत जैसे देश में, जहां करोड़ों घर LPG पर निर्भर हैं, यह तकनीक बड़ी राहत दे सकती है। अगर यह सफल होती है, तो गैस सिलेंडर की जरूरत खत्म हो सकती है और खाना बनाने के लिए सिर्फ बिजली पर्याप्त होगी।

प्लाज्मा स्टोव की एक खासियत यह है कि यह तुरंत बहुत ज्यादा तापमान पैदा कर सकता है। यानी खाना जल्दी बन सकता है, जो व्यस्त शहरी जीवन में बड़ा फायदा है। इसके अलावा, सिलेंडर की डिलीवरी, स्टोरेज और रिफिल जैसी झंझट भी खत्म हो सकती है।

इंडक्शन से कितना अलग?

भारत में इलेक्ट्रिक कुकिंग नई नहीं है। इंडक्शन कुकटॉप पहले से इस्तेमाल में हैं, लेकिन प्लाज्मा स्टोव उनसे अलग है। इंडक्शन में मैग्नेटिक फील्ड से बर्तन गर्म होता है और इसके लिए खास तरह के बर्तन चाहिए होते हैं।

वहीं प्लाज्मा स्टोव सीधे ‘लौ जैसी’ गर्मी देता है, जिससे पारंपरिक गैस जैसा अनुभव मिल सकता है और संभवतः अलग-अलग तरह के बर्तन इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

अभी लंबा रास्ता बाकी

हालांकि यह तकनीक अभी शुरुआती चरण में है। ज्यादातर डेमो प्रोटोटाइप हैं, बाजार में उपलब्ध प्रोडक्ट नहीं।

इसके सामने कई चुनौतियां भी हैं- जैसे ज्यादा बिजली खपत, सुरक्षा मानक और लागत। प्लाज्मा आर्क बेहद उच्च तापमान पैदा करता है, इसलिए इसे सुरक्षित बनाना आसान नहीं है।

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