'मैं एक लूप में फंस गई हूं...' सोशल मीडिया पर वायरल हुई कनाडा में पढ़ रही एक छात्रा की हकीकत

कॉलेज की पढ़ाई और स्टारबक्स की पार्ट-टाइम नौकरी के बीच फंसी ज्योति की कहानी अंतरराष्ट्रीय छात्रों की थकाऊ दिनचर्या की पोल खोलती है। यह लेख विदेश में पढ़ाई के ग्लैमर के पीछे छिपे वित्तीय दबाव और मानसिक थकान को उजागर करता है।

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By Gaurav Kumar:

Viral Video: कनाडा में पढ़ाई के लिए जाने वाले हर युवा की आंखों में बड़े सपने होते हैं, लेकिन इन सपनों के पीछे की असलियत अक्सर चमक-धमक वाली तस्वीरों से अलग होती है।

भारतीय छात्रा ज्योति खरयत ने सोशल मीडिया पर अपनी आपबीती साझा कर इसी 'अदृश्य हकीकत' को दुनिया के सामने रखा है। उनके द्वारा साझा किया गया एक वीडियो इस समय चर्चा का विषय बना हुआ है, जो दिखाता है कि विदेश में पढ़ाई का मतलब सिर्फ डिग्री लेना नहीं, बल्कि थकान और संघर्ष के एक अंतहीन सिलसिले से गुजरना भी है।

कॉलेज से सीधा स्टारबक्स का सफर

इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए इस वीडियो में ज्योति कॉलेज में क्लास खत्म करने के तुरंत बाद बिना किसी आराम के स्टारबक्स में अपनी पार्ट-टाइम नौकरी के लिए निकल जाती हैं। ज्योति का कहना है कि उनकी जिंदगी अब एक ऐसे लूप में फंस गई है जहां कॉलेज की पढ़ाई और खर्चों को पूरा करने के लिए काम करना ही एकमात्र विकल्प है।

उन्होंने अपनी स्थिति बयां करते हुए लिखा कि मैं एक लूप में फंस गई हूं। 

थकान के बीच उम्मीद की तलाश

कनाडा में रहने और वहां की महंगी ट्यूशन फीस भरने का दबाव छात्रों पर इतना अधिक होता है कि उनके पास आराम के लिए नाममात्र का समय बचता है। ज्योति बताती हैं कि वह क्लास जाती हैं, काम करती हैं और फिर जो थोड़ा बहुत समय मिलता है उसमें आराम कर दोबारा उसी दिनचर्या को दोहराती हैं।

हालांकि, इस भारी तनाव और थकान के बावजूद ज्योति ने हार नहीं मानी है। वह अपनी इस संघर्षपूर्ण स्थिति में भी छोटी-छोटी खुशियां ढूंढने की कोशिश करती हैं। 

हजारों छात्रों की एक जैसी कहानी

ज्योति का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही उन हजारों छात्रों के लिए एक सहारा बन गया है जो इसी तरह की परिस्थितियों से जूझ रहे हैं। वीडियो पर कमेंट करते हुए कई छात्रों ने लिखा कि विदेश में पढ़ाई को जितना ग्लैमरस दिखाया जाता है, असल में वह उतना ही थकाऊ है। कई यूजर्स ने माना कि लंबे वर्किंग ऑवर्स और असाइनमेंट की डेडलाइन के बीच अपनी मानसिक सेहत को बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है।

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