ईरान-अमेरिका तनाव से रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर, डॉलर के मुकाबले ₹92.39 तक फिसली भारतीय करेंसी

शुक्रवार सुबह शुरुआती कारोबार में करीब 14 पैसे टूटकर अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया है, जिसके चलते घरेलू और ग्लोबल शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखी जा रही है।

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In Short

  • ईरान-अमेरिका तनाव और महंगे कच्चे तेल के बीच रुपया डॉलर के मुकाबले 92.39 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा।
  • ब्रेंट क्रूड $100 प्रति बैरल के पार, जिससे भारत के आयात बिल और मुद्रा पर दबाव बढ़ा।
  • FII की बिकवाली और शेयर बाजार में गिरावट से रुपये पर और दबाव, 91.45–92.75 के दायरे में रहने का अनुमान।

By Gaurav Kumar:

Rupee Price: ईरान और अमेरिका के बीच गहराते युद्ध के संकट ने ग्लोबल बाजारों में खलबली मचा दी है। इस तनाव का सीधा असर भारतीय मुद्रा पर पड़ा है, जिससे रुपया शुक्रवार सुबह शुरुआती कारोबार में करीब 14 पैसे टूटकर अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया है, जिसके चलते घरेलू और ग्लोबल शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखी जा रही है।

डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर

विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.39 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर फिसल गया है। ग्लोबल एनर्जी सेक्टर में बढ़ते संकट के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतों में आई उछाल ने भारतीय मुद्रा पर भारी दबाव बनाया है। इससे पहले गुरुवार को भी शेयर बाजार में मचे कोहराम के बीच रुपया 92.25 के स्तर पर बंद हुआ था। अब लगातार दूसरे दिन गिरावट ने भारतीय आयातकों और सरकार की चिंता बढ़ा दी है।

कच्चे तेल की कीमतों ने बिगाड़ा खेल

अगस्त 2022 के बाद पहली बार ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। कच्चे तेल की इस महंगाई ने अमेरिकी बाजारों सहित पूरी दुनिया के सेंटिमेंट को हिला कर रख दिया है। विदेशी मुद्रा व्यापारियों का कहना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकालने और घरेलू शेयर बाजार में आई भारी गिरावट ने रुपये की कमर तोड़ दी है।

क्या कहते हैं जानकार?

एलकेपी सिक्योरिटीज के वीपी रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटी और करेंसी) जतीन त्रिवेदी के अनुसार, रुपये की चाल के लिए फिलहाल तेल की कीमतें सबसे बड़ा फैक्टर बनी हुई हैं। घरेलू एक्सचेंज पर कच्चे तेल के दाम आज 4% और बढ़ गए हैं। इससे भारत का आयात बिल बढ़ेगा और रुपये पर और दबाव आएगा। जतीन त्रिवेदी ने अनुमान जताया है कि फिलहाल रुपया 91.45 से 92.75 के दायरे में कारोबार कर सकता है। बाजार की नजर अब आज आने वाले अमेरिका के जीडीपी डेटा पर टिकी है।

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